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मनमानी करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जाए
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बैठक के बाद जानकारी देते पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रधान जेपी सैनी व अन्य। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। निजी स्कूल संचालकों की ओर से 25 अप्रैल को स्कूल बंद करने के एलान पर पेरेंट्स एसोसिएशन ने आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के प्रधान जेपी सैनी ने कहा कि बेवजह शिक्षा के मंदिर को बंद रखने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण एवं असांविधानिक है। एसोसिएशन ने सरकारी आदेशों को न मानने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द करने की मांग उठाई है।
पेरेंट्स एसोसिएशन की बुधवार को हुई जेपी सैनी ने कहा कि हाईकोर्ट, शुल्क एवं निधि नियामक समिति अंबाला संभाग (एफएफआरसी) के सभी आदेश, सीएम विंडो तथा शिक्षा निदेशालय, हरियाणा सरकार के निर्देश, निर्णय एसोसिएशन के पक्ष में हैं, लेकिन इसके बावजूद कानून एवं सरकारी आदेशों की अवहेलना करने वाले निजी स्कूल संचालक अन्याय एवं आर्थिक शोषण का विरोध कर रहे अभिभावकों पर ही कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सैनी ने कहा कि अभिभावकों की लड़ाई कम या ज्यादा फीस को लेकर नहीं है, बल्कि अभिभावक जायज और नाजायज फीस एवं फीस वृद्धि के विरोध में लड़ रहे हैं। जब से अभिभावकों ने निजी स्कूल संचालकों की गलत नीतियों का विरोध करना शुरू किया है, तभी से निजी स्कूल बच्चों को क्लास से वंचित करना, पेपर न दिखाना, रिजल्ट रोकना, यातायात सुविधाओं को उपलब्ध न कराना आदि युक्तियां अपनाकर अभिभावकों और इनके बच्चों की मानसिक प्रताड़ना कर रहे हैं।
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एसोसिएशन के महासचिव मयंक बजाज ने कहा कि कई निजी स्कूलों ने पिछले वर्षों के फॉर्म छह में छेड़छाड़ करके वर्तमान शैक्षणिक सत्र में अप्रत्याशित फीस वृद्धि की है। आरोप लगाया कि निजी स्कूलों ने शिक्षा को मुनाफाखोरी का धंधा बना लिया हैं। उन्होंने स्कूल संचालकों के कम फीस वाले स्कूलों में पढ़ाने वाले बयान की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट एवं एफएफआरसी के आदेशों की धज्जियां उड़ाने वाले स्कूलों के खिलाफ उन्होंने शिकायत सौंपी है, लेकिन अभी तक पुलिस प्रशासन व शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अभिभावकों को कार्रवाई का इंतजार है।
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कुरुक्षेत्र। निजी स्कूल संचालकों की ओर से 25 अप्रैल को स्कूल बंद करने के एलान पर पेरेंट्स एसोसिएशन ने आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के प्रधान जेपी सैनी ने कहा कि बेवजह शिक्षा के मंदिर को बंद रखने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण एवं असांविधानिक है। एसोसिएशन ने सरकारी आदेशों को न मानने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द करने की मांग उठाई है।
पेरेंट्स एसोसिएशन की बुधवार को हुई जेपी सैनी ने कहा कि हाईकोर्ट, शुल्क एवं निधि नियामक समिति अंबाला संभाग (एफएफआरसी) के सभी आदेश, सीएम विंडो तथा शिक्षा निदेशालय, हरियाणा सरकार के निर्देश, निर्णय एसोसिएशन के पक्ष में हैं, लेकिन इसके बावजूद कानून एवं सरकारी आदेशों की अवहेलना करने वाले निजी स्कूल संचालक अन्याय एवं आर्थिक शोषण का विरोध कर रहे अभिभावकों पर ही कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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सैनी ने कहा कि अभिभावकों की लड़ाई कम या ज्यादा फीस को लेकर नहीं है, बल्कि अभिभावक जायज और नाजायज फीस एवं फीस वृद्धि के विरोध में लड़ रहे हैं। जब से अभिभावकों ने निजी स्कूल संचालकों की गलत नीतियों का विरोध करना शुरू किया है, तभी से निजी स्कूल बच्चों को क्लास से वंचित करना, पेपर न दिखाना, रिजल्ट रोकना, यातायात सुविधाओं को उपलब्ध न कराना आदि युक्तियां अपनाकर अभिभावकों और इनके बच्चों की मानसिक प्रताड़ना कर रहे हैं।
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एसोसिएशन के महासचिव मयंक बजाज ने कहा कि कई निजी स्कूलों ने पिछले वर्षों के फॉर्म छह में छेड़छाड़ करके वर्तमान शैक्षणिक सत्र में अप्रत्याशित फीस वृद्धि की है। आरोप लगाया कि निजी स्कूलों ने शिक्षा को मुनाफाखोरी का धंधा बना लिया हैं। उन्होंने स्कूल संचालकों के कम फीस वाले स्कूलों में पढ़ाने वाले बयान की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट एवं एफएफआरसी के आदेशों की धज्जियां उड़ाने वाले स्कूलों के खिलाफ उन्होंने शिकायत सौंपी है, लेकिन अभी तक पुलिस प्रशासन व शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अभिभावकों को कार्रवाई का इंतजार है।