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बारिश का अनुमान, खुले में धान, चिंतित किसान
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Rain forecast, paddy in the open, farmers worried
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जिले भर की अनाज मंडियां धान से भरी पड़ी हैं। 50 लाख क्विंटल से ज्यादा धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। उठान उम्मीद के अनुसार नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते न केवल मंडियां बल्कि आसपास के रास्ते भी जाम हो चुके हैं। शहर में ही तीन किलोमीटर दूरी तक सड़कों किनारे धान की ढेरियां लगी है। राहगीरों का निकलना मुश्किल हो चुका है। ये हालात प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय पर उचित प्रबंध न किए जाने, अनदेखी व लापरवाही की पोल खोल रहे हैं।
शुक्रवार से कई दिनों तक बारिश का मौसम होने की आशंका के चलते वीरवार को भी धान की आवक ताबड़तोड़ रही, जिसके चलते हालात और भी गंभीर दिखाई देने लगे। अब माना जा रहा है कि बारिश हुई तो बड़े स्तर पर नुकसान होगा। इसी आशंका के चलते किसान परेशान है और धान बेचने को लेकर होड़ सी लगी रही
एसीएस ने पूछा तो अधिकारी बगलें झांकने लगे अधिकारी
थानेसर अनाज मंडी के हालात देखकर हैरान रह गई एसीएस जी अनुपमा
एसीएस जी अनुपमा वीरवार को जब थानेसर अनाजमंडी का जायजा लेने पहुंची तो वे भी हालात देख हैरान रह गई। उन्होंने मार्केट कमेटी कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक की और अधिकारियों से इसकी जिम्मेदारी पूछी तो अधिकारी न केवल बगलें झांकने लगे बल्कि अपनी खामियां छिपाते हुए बताते रहे।
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उनकी दलील थी कि किसान सड़कों पर रात के समय धान डाल जाते हैं। इस पर भी आइएएस अधिकारी ने कड़ा संज्ञान लिया और कहा कि रात को भी ऐसे हालात क्यों बनने दिए जाते हैं। दिन हो या रात, हर समय अधिकारियों को ही तो व्यवस्था बनाकर रखनी होगी। इस पर अधिकारी कोई सार्थक जवाब नहीं दे पाए और कहने लगे कि मौसम खराब होने की संभावना के चलते आवक तेज हो गई है। एसीएस ने कहा कि सड़कों पर किसी भी स्थिति में ऐसे धान नहीं डाला जा सकता। उन्होंने उठान कार्य में तेजी लाने व व्यवस्था दुरुस्त किए जाने के कड़े निर्देश दिए। इस दौरान एसीएस ने गेट पास से लेकर पोर्टल व अन्य व्यवस्था भी जांची। उन्होंने मंडी में कई ढेरियों पर जाकर भी नमी जांची तो 17 से 27 तक मिली। उन्होंने कई किसानों व आढ़तियों से भी बातचीत की। इस दौरान जिला उपायुक्त शांतनु शर्मा, खाद्य आपूर्ति अधिकारी सुरेंद्र सैनी सहित अन्य सभी संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
मात्र 16.65 लाख क्विंटल धान का हो पाया उठान
जिले में विभिन्न एजेंसियां बुधवार तक 16 लाख 5 हजार क्विंटल धान का उठान कर पाई हैं जबकि आढ़तियों की मानें तो मंडियों व खरीद केंद्रों पर 50 लाख क्विंटल से ज्यादा धान आया हुआ है। थानेसर अनाजमंडी में ही एक लाख क्विंटल धान उठान की बाट जोह रहा है। प्रशासन का कहना है कि बुधवार तक तक खरीद एजेंसियों ने 47291 किसानों की 34 लाख 96 हजार क्विंटल धान की खरीद की है। फूड एंड सप्लाई विभाग द्वारा 35750 किसानों और हैफेड द्वारा 11541 किसानों की धान की फसल खरीदी गई है।
पानी में बही धान तो कौन होगा जिम्मेदार : सुरजीत
सन्निहित सरोवर के समीप सड़क किनारे धान उतरवा रहे समसीपुर के किसान सुरजीत का कहना था कि वे मंडी में ही डालने के लिए धान लेकर आए थे। वहां तक जाने का भी रास्ता नहीं मिला तो मजबूरी में यही डालनी पड़ी। अब कई दिनों तक मौसम खराब होने की संभावना है। ऐसे में धान पानी में बही या खराब हुई तो कौन जिम्मेदार होगा। हर सीजन में किसानों को ऐसे हालात का सामाना करना पड़ता है। अफसर समय रहते प्रबंध नहीं करते।
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कुरुक्षेत्र। जिले भर की अनाज मंडियां धान से भरी पड़ी हैं। 50 लाख क्विंटल से ज्यादा धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। उठान उम्मीद के अनुसार नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते न केवल मंडियां बल्कि आसपास के रास्ते भी जाम हो चुके हैं। शहर में ही तीन किलोमीटर दूरी तक सड़कों किनारे धान की ढेरियां लगी है। राहगीरों का निकलना मुश्किल हो चुका है। ये हालात प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय पर उचित प्रबंध न किए जाने, अनदेखी व लापरवाही की पोल खोल रहे हैं।
शुक्रवार से कई दिनों तक बारिश का मौसम होने की आशंका के चलते वीरवार को भी धान की आवक ताबड़तोड़ रही, जिसके चलते हालात और भी गंभीर दिखाई देने लगे। अब माना जा रहा है कि बारिश हुई तो बड़े स्तर पर नुकसान होगा। इसी आशंका के चलते किसान परेशान है और धान बेचने को लेकर होड़ सी लगी रही
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एसीएस ने पूछा तो अधिकारी बगलें झांकने लगे अधिकारी
थानेसर अनाज मंडी के हालात देखकर हैरान रह गई एसीएस जी अनुपमा
एसीएस जी अनुपमा वीरवार को जब थानेसर अनाजमंडी का जायजा लेने पहुंची तो वे भी हालात देख हैरान रह गई। उन्होंने मार्केट कमेटी कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक की और अधिकारियों से इसकी जिम्मेदारी पूछी तो अधिकारी न केवल बगलें झांकने लगे बल्कि अपनी खामियां छिपाते हुए बताते रहे।
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उनकी दलील थी कि किसान सड़कों पर रात के समय धान डाल जाते हैं। इस पर भी आइएएस अधिकारी ने कड़ा संज्ञान लिया और कहा कि रात को भी ऐसे हालात क्यों बनने दिए जाते हैं। दिन हो या रात, हर समय अधिकारियों को ही तो व्यवस्था बनाकर रखनी होगी। इस पर अधिकारी कोई सार्थक जवाब नहीं दे पाए और कहने लगे कि मौसम खराब होने की संभावना के चलते आवक तेज हो गई है। एसीएस ने कहा कि सड़कों पर किसी भी स्थिति में ऐसे धान नहीं डाला जा सकता। उन्होंने उठान कार्य में तेजी लाने व व्यवस्था दुरुस्त किए जाने के कड़े निर्देश दिए। इस दौरान एसीएस ने गेट पास से लेकर पोर्टल व अन्य व्यवस्था भी जांची। उन्होंने मंडी में कई ढेरियों पर जाकर भी नमी जांची तो 17 से 27 तक मिली। उन्होंने कई किसानों व आढ़तियों से भी बातचीत की। इस दौरान जिला उपायुक्त शांतनु शर्मा, खाद्य आपूर्ति अधिकारी सुरेंद्र सैनी सहित अन्य सभी संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
मात्र 16.65 लाख क्विंटल धान का हो पाया उठान
जिले में विभिन्न एजेंसियां बुधवार तक 16 लाख 5 हजार क्विंटल धान का उठान कर पाई हैं जबकि आढ़तियों की मानें तो मंडियों व खरीद केंद्रों पर 50 लाख क्विंटल से ज्यादा धान आया हुआ है। थानेसर अनाजमंडी में ही एक लाख क्विंटल धान उठान की बाट जोह रहा है। प्रशासन का कहना है कि बुधवार तक तक खरीद एजेंसियों ने 47291 किसानों की 34 लाख 96 हजार क्विंटल धान की खरीद की है। फूड एंड सप्लाई विभाग द्वारा 35750 किसानों और हैफेड द्वारा 11541 किसानों की धान की फसल खरीदी गई है।
पानी में बही धान तो कौन होगा जिम्मेदार : सुरजीत
सन्निहित सरोवर के समीप सड़क किनारे धान उतरवा रहे समसीपुर के किसान सुरजीत का कहना था कि वे मंडी में ही डालने के लिए धान लेकर आए थे। वहां तक जाने का भी रास्ता नहीं मिला तो मजबूरी में यही डालनी पड़ी। अब कई दिनों तक मौसम खराब होने की संभावना है। ऐसे में धान पानी में बही या खराब हुई तो कौन जिम्मेदार होगा। हर सीजन में किसानों को ऐसे हालात का सामाना करना पड़ता है। अफसर समय रहते प्रबंध नहीं करते।