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Kurukshetra News: स्वामित्व के विवाद में दोनों पक्षों की याचिकाएं खारिज
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कुरुक्षेत्र।
सिविल जज सीनियर डिवीजन दविंदर की अदालत ने सेक्टर-पांच अर्बन एस्टेट स्थित प्लॉट नंबर 1802 के स्वामित्व के लिए वर्ष 2017 से चल रहे दो पक्षों श्याम लाल और रेखा रानी की ओर काउंटर क्लेम याचिका को खारिज कर दिया है। वादी श्याम लाल ने 2016 में यह प्लॉट अंकित से खरीदा था, जिसे बाद में अंकित ने रेखा रानी को बेच दिया। इसके बाद दोनों ने प्लॉट पर स्वामित्व दिखाया।
विवाद का आधार यह था कि प्लॉट पहले अंकित सिंह के नाम था। अंकित ने अप्रैल 2016 में यह प्लॉट श्याम लाल को बेच दिया। बाद में जून 2016 में अंकित ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) से नई ट्रांसफर परमिशन लेकर यही प्लॉट रेखा रानी को बेच दिया और हुडा ने रेखा रानी के नाम री-एलॉटमेंट लेटर भी जारी कर दिया।
श्याम लाल ने अदालत में दावा किया कि पहली सेल डीड वैध है और दूसरी सेल डीड धोखाधड़ी से बनी है। वहीं रेखा रानी ने काउंटर क्लेम में श्याम लाल की सेल डीड को फर्जी बताकर उसे रद्द करने और खुद को मालिक घोषित करने की मांग की।
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अदालत ने पाया कि पहली सेल डीड समय में पहले होने से प्राथमिकता रखती है, लेकिन श्याम लाल कब्जे में नहीं हैं और कब्जे की मांग वाली संशोधन याचिका पहले खारिज हो चुकी है। ऐसे में केवल घोषणा (डिक्लेरेशन) का मुकदमा बिना कब्जे की मांग के मान्य नहीं है। दूसरी ओर रेखा रानी की ओर से दायर काउंटर क्लेम में स्वामित्व की घोषणा मांगी ही नहीं गई, इसलिए स्थायी निषेधाज्ञा भी नहीं दी जा सकती। नतीजतन अदालत ने दोनों पक्षों की दावे खारिज कर दिए गए।
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सिविल जज सीनियर डिवीजन दविंदर की अदालत ने सेक्टर-पांच अर्बन एस्टेट स्थित प्लॉट नंबर 1802 के स्वामित्व के लिए वर्ष 2017 से चल रहे दो पक्षों श्याम लाल और रेखा रानी की ओर काउंटर क्लेम याचिका को खारिज कर दिया है। वादी श्याम लाल ने 2016 में यह प्लॉट अंकित से खरीदा था, जिसे बाद में अंकित ने रेखा रानी को बेच दिया। इसके बाद दोनों ने प्लॉट पर स्वामित्व दिखाया।
विवाद का आधार यह था कि प्लॉट पहले अंकित सिंह के नाम था। अंकित ने अप्रैल 2016 में यह प्लॉट श्याम लाल को बेच दिया। बाद में जून 2016 में अंकित ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) से नई ट्रांसफर परमिशन लेकर यही प्लॉट रेखा रानी को बेच दिया और हुडा ने रेखा रानी के नाम री-एलॉटमेंट लेटर भी जारी कर दिया।
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श्याम लाल ने अदालत में दावा किया कि पहली सेल डीड वैध है और दूसरी सेल डीड धोखाधड़ी से बनी है। वहीं रेखा रानी ने काउंटर क्लेम में श्याम लाल की सेल डीड को फर्जी बताकर उसे रद्द करने और खुद को मालिक घोषित करने की मांग की।
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अदालत ने पाया कि पहली सेल डीड समय में पहले होने से प्राथमिकता रखती है, लेकिन श्याम लाल कब्जे में नहीं हैं और कब्जे की मांग वाली संशोधन याचिका पहले खारिज हो चुकी है। ऐसे में केवल घोषणा (डिक्लेरेशन) का मुकदमा बिना कब्जे की मांग के मान्य नहीं है। दूसरी ओर रेखा रानी की ओर से दायर काउंटर क्लेम में स्वामित्व की घोषणा मांगी ही नहीं गई, इसलिए स्थायी निषेधाज्ञा भी नहीं दी जा सकती। नतीजतन अदालत ने दोनों पक्षों की दावे खारिज कर दिए गए।