दिन में वेटर, रात में हाइवे के लुटेरे: बर्फ तोड़ने वाले सुए से करते थे लूटपाट, पुलिस ने तीन को किया गिरफ्तार
इन आरोपियों को 2 सितंबर को हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया। इन्होंने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व सदस्य और ठेकेदार सतपाल सिंह रामगढ़िया से पिहोवा में दो लाख रुपये लूटे थे। घटना के वक्त सतपाल सिंह एक मिस्त्री को दो लाख रुपये देने मोटरसाइकिल से जा रहे थे।
विस्तार
हरियाणा के कुरुक्षेत्र पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जिसके सदस्य दिन में शादियों और पारिवारिक समारोहों में वेटर का काम करते थे, लेकिन रात के अंधेरे में सुनसान हाईवे पर लोगों को अपना शिकार बनाते थे। पुलिस ने गुरुवार को बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ये आरोपी पिस्तौल या बंदूक के बजाय शादियों में कोल्ड ड्रिंक्स के लिए बर्फ तोड़ने वाले नुकीले सुए का इस्तेमाल हथियार के रूप में करते थे।
पिहोवा में की थी दो लाख रुपये की लूट
पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों को 2 सितंबर को हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया। इन्होंने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व सदस्य और ठेकेदार सतपाल सिंह रामगढ़िया से पिहोवा में दो लाख रुपये लूटे थे। घटना के वक्त सतपाल सिंह एक मिस्त्री को दो लाख रुपये देने मोटरसाइकिल से जा रहे थे। गुहला-चीका रोड पर हुडा ग्राउंड के पास तीन मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने उनका पीछा किया, उन्हें धक्का देकर गिरा दिया और नकदी लूट कर फरार हो गए।
सीसीटीवी और सर्विलांस से खुला राज
लूट के बाद तीनों आरोपी हरिद्वार भाग गए थे। पुलिस को एक वीडियो मिला जिसमें तीनों अपराध के बाद मोटरसाइकिल से भागते हुए दिख रहे थे। इसी वीडियो फुटेज और मोबाइल सर्विलांस की मदद से पुलिस की टीम उनकी लोकेशन तक पहुंचने में कामयाब रही।
आरोपियों की पहचान और बरामदगी
अभिषेक (उर्फ अभि) और आशीष (उर्फ बिल्ला) जो बलबीरा के रहने वाले हैं, और अमित (उर्फ अंकित) जो कैथल जिले के हजवाना गांव का निवासी है। पुलिस ने इनके पास से चोरी का कई सामान बरामद किया है, जिसमें एलईडी टीवी, एक म्यूजिक सिस्टम, मोबाइल फोन और दो बर्फ तोड़ने वाले सुए शामिल हैं।
पहले भी कर चुके हैं वारदात
अपराध जांच एजेंसी के प्रभारी मनदीप सिंह के अनुसार, इस गिरोह ने पिहोवा की घटना से ठीक एक दिन पहले 31 अगस्त को कैथल के पूंडरी इलाके में भी एक लूट की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने बताया कि यह गिरोह सुनसान जगहों की रेकी करता था और अकेले यात्रा कर रहे लोगों को निशाना बनाता था। अगर पीड़ित विरोध करते थे, तो ये बल प्रयोग करने से भी नहीं चूकते थे।