{"_id":"9a3683aae80eaac489bc953c421e7dcc","slug":"personnel-did-not-pay-several-months-in-ku-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"केयू में कर्मियों को कई माह से नहीं मिला वेतन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केयू में कर्मियों को कई माह से नहीं मिला वेतन
अमर उजाला ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 05 Aug 2014 12:27 AM IST
विज्ञापन
केयू में आउट सोर्सिंग पर लगे सैकड़ों कर्मचारियों ने कई महीने से वेतन और डीसी रेट न मिलने को लेकर सोमवार को पंचायत भवन में जिला परिषद चेयरमैन प्रवीण चौधरी को ज्ञापन सौंपा।
कर्मचारियों ने बताया कि पिछले कई सालों से उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है, जिसके बारे में उन्होंने कई बार यूनिवर्सिटी प्रशासन और जिला प्रशासन को भी शिकायत दी।
इसके बावजूद उनकी समस्याओं का हल नहीं हुआ। कर्मचारियों ने कहा कि एक अक्टूबर 2012 से उन्हें डीसी रेट नहीं मिल रहा।
कर्मचारी नेता मदन कुमार ने बताया कि केयू में 1421 कर्मचारी आउटसोर्सिंग के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को कभी भी सही समय पर वेतन नहीं मिल पाया, हमेशा चार से पांच महीने बाद ही वेतन मिल पाता है।
विज्ञापन
इतना ही नहीं चार महीने बाद भी धरना देने के बाद वेतन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि 2006 से लेकर मार्च 2011 तक के पीएफ का भी कर्मचारियों को अब तक हिसाब नहीं दिया गया है।
आउटसोर्सिंग कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष सुभाष चंद ने कहा कि ठेकेदार उनका शोषण कर रहे हैं, जिसकी शिकायत करने पर केयू प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
जिला परिषद चेयरमैन प्रवीण चौधरी ने कहा कि कर्मचारियों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, इसलिए वे इस मामले को लेकर अब सीधे राज्यपाल से मिलेंगे।
उन्होंने बताया कि केयू प्रशासन कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने में नाकाम साबित हो रहा है। वहीं कर्मचारियों ने कहा कि अगर उन्हें सात अगस्त तक वेतन नहीं दिया गया तो आठ अगस्त से वे प्रदर्शन शुरू कर देंगे।
उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी में कुल तीन ठेकेदार हैं, जिनमें से एक ठेकेदार तो डीसी रेट के अनुसार वेतन दे रहा है, जबकि दो ठेकेदार मनमर्जी का वेतन दे रहे हैं। जिप चेयरमैन ने कहा कि केयू वीसी मामले में हस्तक्षेप करें, नहीं तो कर्मचारियों के प्रदर्शन में वह खुद शामिल होंगे।
विज्ञापन
कर्मचारियों ने बताया कि पिछले कई सालों से उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है, जिसके बारे में उन्होंने कई बार यूनिवर्सिटी प्रशासन और जिला प्रशासन को भी शिकायत दी।
विज्ञापन
इसके बावजूद उनकी समस्याओं का हल नहीं हुआ। कर्मचारियों ने कहा कि एक अक्टूबर 2012 से उन्हें डीसी रेट नहीं मिल रहा।
कर्मचारी नेता मदन कुमार ने बताया कि केयू में 1421 कर्मचारी आउटसोर्सिंग के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को कभी भी सही समय पर वेतन नहीं मिल पाया, हमेशा चार से पांच महीने बाद ही वेतन मिल पाता है।
विज्ञापन
इतना ही नहीं चार महीने बाद भी धरना देने के बाद वेतन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि 2006 से लेकर मार्च 2011 तक के पीएफ का भी कर्मचारियों को अब तक हिसाब नहीं दिया गया है।
आउटसोर्सिंग कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष सुभाष चंद ने कहा कि ठेकेदार उनका शोषण कर रहे हैं, जिसकी शिकायत करने पर केयू प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
जिला परिषद चेयरमैन प्रवीण चौधरी ने कहा कि कर्मचारियों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, इसलिए वे इस मामले को लेकर अब सीधे राज्यपाल से मिलेंगे।
उन्होंने बताया कि केयू प्रशासन कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने में नाकाम साबित हो रहा है। वहीं कर्मचारियों ने कहा कि अगर उन्हें सात अगस्त तक वेतन नहीं दिया गया तो आठ अगस्त से वे प्रदर्शन शुरू कर देंगे।
उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी में कुल तीन ठेकेदार हैं, जिनमें से एक ठेकेदार तो डीसी रेट के अनुसार वेतन दे रहा है, जबकि दो ठेकेदार मनमर्जी का वेतन दे रहे हैं। जिप चेयरमैन ने कहा कि केयू वीसी मामले में हस्तक्षेप करें, नहीं तो कर्मचारियों के प्रदर्शन में वह खुद शामिल होंगे।