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हरियाणा दिवस विशेष: राज्य बनने के बाद धर्मनगरी को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान, 1973 में करनाल से अलग होकर बना जिला

Mon, 01 Nov 2021 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो अजय जौली, अमर उजाला ब्यूरो, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
अजय जौली, अमर उजाला ब्यूरो, कुरुक्षेत्र(हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 01 Nov 2021 12:33 AM IST
सार

23 जनवरी, 1973 को करनाल से अलग होकर कुरुक्षेत्र जिला बना। कुरुक्षेत्र करनाल जिले का एक छोटा सा हिस्सा था और काफी पिछड़ा हुआ था। आज वही अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।

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Haryana Day Special: Dharmanagari got international recognition after becoming haryana as a state
ज्ञान मंदिर की 18वीं मंजिल से लिया गया शहर का विहंगम दृश्य। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

1966 में हरियाणा प्रदेश के अस्तित्व में आने पर जो कुरुक्षेत्र हरियाणा के नक्शे में ढूंढने पर बड़ी मुश्किल से मिलता था, आज वही अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। संयुक्त पंजाब से अलग होने पर जब हरियाणा अस्तित्व में आया तो कुरुक्षेत्र करनाल जिले का एक छोटा सा हिस्सा था और काफी पिछड़ा हुआ था। धर्मनगरी का इतिहास बेशक युगों पुराना रहा, लेकिन पहचान मिलने में काफी समय लगा।

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23 जनवरी, 1973 को करनाल से अलग होकर कुरुक्षेत्र जिला बना। वैसे तो कुरुक्षेत्र के विकास के प्रयास 1966 में ही शुरू हो गए थे, लेकिन 1973 के बाद विकास की गंगा ऐसी बही की उस समय का पिछड़ा हुआ क्षेत्र आज धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र बन चुका है। पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा का कुरुक्षेत्र के विकास में अहम योगदान रहा।
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उनके द्वारा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का गठन किया गया था, जिसके बाद कुरुक्षेत्र को अलग पहचान मिली और ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर तीर्थ व अन्य धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार हुआ। वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 2021 के बजट में कुरुक्षेत्र को दिव्य कुरुक्षेत्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की, इसके तहत एक तरह से कुरुक्षेत्र को प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी का दर्जा मिला।
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1966 में कुरुक्षेत्र करनाल का हिस्सा था। पिछड़ा होने के कारण यह क्षेत्र एक गांव की तरह नजर आता था। पुराने लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र का अधिकतम भाग जंगल था। सुविधाओं का अभाव था। अधिकतम सड़कें कच्ची थीं। एक विश्वविद्यालय यहां पर था। ब्रह्मसरोवर एक गांव के तालाब की तरह नजर आता था, जो रेलवे लाइन आज शहर के बीचों बीच से गुजर रही है, उस समय इसके सिर्फ दायीं ओर का ही क्षेत्र बसा हुआ था। कृष्णा गेट से रेलवे रोड के बीच भी जंगल था।

हरियाणा के अस्तित्व में आने के बाद और कुरुक्षेत्र जिला बनने से पहले 1 अगस्त 1968 को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का गठन हुआ था। बोर्ड के गठन के बाद 1971 में ब्रह्मसरोवर के जीर्णोद्धार का काम शुरू हुआ। 1975 में विशाल ब्रह्मसरोवर बनकर तैयार हुआ। यह एशिया का सबसे बड़ा सरोवर है।

हरियाणा के अस्तित्व में आने से पहले का विश्वविद्यालय भी कुरुक्षेत्र में ही है। इसके अलावा देश का एक मात्र आयुष विश्वविद्यालय भी कुरुक्षेत्र में है। हर वर्ष अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गीता जयंती महोत्सव आयोजित किया जाता है। इतना ही नहीं विदेशों में भी गीता महोत्सव मनाया जाता है। विश्व प्रसिद्ध सूर्य ग्रहण का मेला भी यहीं लगता है।

आज के समय में कुरुक्षेत्र का लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 909 महिलाएं हैं और साक्षरता दर 76.07 प्रतिशत है। जिले में दो विश्वविद्यालय के साथ-साथ 16 महाविद्यालय हैं। सड़कों की बात की जाए तो कुरुक्षेत्र में तीन राष्ट्रीय और चार राज्य राजमार्ग हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग में एनएच-44, 152 हिसार-चंडीगढ़, 152डी गंगहेड़ी- नारनौल, 444ए साहा-अंबाला। स्टेट राजमार्ग नंबर-4 बराडा-शाहाबाद-ठोल, नंबर-7 इंद्री-लाडवा-शाहाबाद, नंबर-6 सहारनपुर-यमुनानगर व नंबर-9 पिहोवा-पटियाला। जिले में चार विधानसभा क्षेत्र थानेसर, पिहोवा, लाडवा और शाहाबाद हैं। वहीं 400 से ज्यादा ग्राम पंचायतें हैं। कुरुक्षेत्र का भौगोलिक क्षेत्र 1530 स्क्वायर मीटर है। इस समय जिले की आबादी करीब 12 लाख है।

जिले में एक वेटनरी कॉलेज बनेगा, जिसमें वेटनरी के डिप्लोमा कोर्स होंगे। यह हरियाणा वेटनरी की दूसरा कॉलेज होगा। यह कॉलेज हिसार स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के अधीन होगा। फिलहाल कॉलेज बनाने के लिए जगह की तलाश की जा रही है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव की देखरेख में यह कार्य किया जा रहा है। यह प्रदेश का दूसरा वेटनी कॉलेज होगा, जिसे कुरुक्षेत्र में बनाया जाएगा।

विकास के इन प्रोजेक्टों पर चल रहा अभी कार्य

  1. किसान सेवा केंद्र- यह प्रोजेक्ट पिहोवा में चल रहा है। 5 करोड़ 41 लाख 91 हजार की लागत से बनाए जा रहे इस सेवा केंद्र का अधिकतम निर्माण पूरा हो चुका है।
  2. किरमच से ईशाकपुर रोड- किरमच से ईशाकपुर तक रोड बनाने के लिए 1 करोड़ 60 लाख 34 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं। 4.94 किलोमीटर लंबी इस सड़क के बनने से ग्रामीणों को काफी फायदा होगा।
  3. वेटरनरी पॉली क्लीनिक- गांव बोहली में वेटरनरी पॉली क्लीनिक तैयार किया जा रहा है। इस क्लीनिक में पशुओं के एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी होगा। 4 करोड़ 56 लाख की लागत से बनाया जा रहा यह क्लीनिक जल्द बनकर तैयार होगा। इस प्रोजेक्ट की सीएम द्वारा 2015 में घोषणा की गई थी।
  4. पिहोवा में 50 बेड का अस्पताल- पिहोवा में अरुणाय रोड पर 50 बेड का अस्पताल बनकर तैयार है। उम्मीद है कि दो माह के भी इसका उद्घाटन हो सकता है। इस अस्पताल के निर्माण पर 18 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 2016 में इस प्रोजेक्ट की घोषणा की गई थी।
  5. पीएचसी-इस्माईलाबाद में 3 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से पीएचसी तैयार की जा रही है।
  6. नर्सिंग कॉलेज- खेड़ी रामनगर में 33 करोड़ 15 लाख की लागत से नर्सिंग कॉलेज बनाया जाएगा।
  7. सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट- इस्माईलाबाद में 23 करोड़ 57 लाख रुपये में सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाना है। फिलहाल इसके लिए जमीन फाइनल नहीं हो पाई है। उम्मीद है इस वर्ष यह इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा।
  8. सब डिवीजन ऑफिस: शाहाबाद में सब डिवीजन ऑफिस बनकर तैयार है। इस पर 13 करोड़ 58 लाख की लागत आई है।
  9. ओवर ब्रिज- गांव दीवाना में घघर नदी के ऊपर ओवर ब्रिज बनाया जा रहा है। आठ करोड़ की लागत से बनाए जा रहे ब्रिज का निर्माण कार्य जल्द पूरा होगा।
  10. सिक्स लेन प्रोजेक्ट- करीब 57 करोड़ की लागत से पिपली से थर्ड गेट की सड़क को सिक्स लेन बनाया जा रहा है। यह सड़क शहर की लाइफलाइन है। 2022 में सड़क का निर्माण पूरा होने की उम्मीद है।
  11. एलिवेटेड रेलवे ट्रैक- शहरवासियों को आए दिन जाम से निजात दिलाने के लिए 224 करोड़ की लागत से एलिवेटेड रेलवे ट्रैक बनाया जा रहा है। इसके बनने से शहर के बीच से गुजर रही रेलवे लाइन पर बने पांच फाटकों से निजात मिलेगी। इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में दो साल का समय लगेगा।
  12.  वेलोड्रम स्टेडियम- प्रदेश का एकमात्र वेलोड्रम स्टेडियम कुरुक्षेत्र में ही बनना है। फिलहाल स्टेडियम की फाइल ठंडे बस्ते में है, लेकिन 2022 में इस पर कार्य हो सकता है।
  13.  अंतरराज्यीय बस अड्डा- यह बस अड्डा पिपली में बनेगा। प्रोजेक्ट की सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। 2022 में इस का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।

Haryana Day Special: Dharmanagari got international recognition after becoming haryana as a state
ज्ञान मंदिर की 18वीं मंजिल से लिया गया शहर का विहंगम दृश्य। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन प्रोजेक्टों के पूरा होने पर बदली धर्मनगरी की तस्वीर
  • पहला सिनेमा रुद्रा गौतम के नाम रुद्रा थिएटर बना,1966
  • कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का गठन,1968
  • करनाल से अलग जिला कुरुक्षेत्र बना,1973
  • श्रीकृष्ण राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, 1975
  • विख्यात ब्रह्मसरोवर का जीर्णोद्धार, 1975
  • नेशनल हाईवे स्थित पिपली चिड़ियाघर, 1982
  • शहर में पहला रेस्टोरेंट मेजबान, 1986
  • भारत का एक मात्र श्रीकृष्ण संग्रहालय, 1991
  • राष्ट्रीय स्तर पर गीता जयंती की शुरुआत,1989
  • पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र, 2001
  • गीता जयंती को राष्ट्रीय उत्सव की पहचान, 2001
  • रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, 2002 डीम्ड यूनिवर्सिटी, फिर एनआईटी बनी
  • 18 मंजिला गीता ज्ञान मंदिर-2004
  • कल्पना चावला तारामंडल, 2005
  • हरियाणा धरोहर संग्रहालय, 2006
  • 1857 की क्रांति में हरियाणा का योगदान संग्रहालय, 2008
  • होटल मैनेजमेंट संस्थान, 2008
  • हरियाणा मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर, 2009
  • तिरुपति बालाजी मंदिर, 2012
  • एनआईडी, 2013
  • 100 करंड़ की लागत से निर्माणाधीन इस्कॉन मंदिर, 2014
  • गीता जयंती को अंतरराष्ट्रीय उत्सव की पहचान, 2016
  • केंद्र की 100 करोड़ की कृष्ण सर्किट परियोजना, 2016
  • गीता ज्ञान मंदिर, 2016
  • महाभारत थीम पर रेलवे जंक्शन का कायाकल्प, 2016-देश का पहला आयुष विश्वविद्यालय, 2019
  • महाभारत थीम पर छह करोड़ का लाइट एंड साउंड शो-2019
  • गीता ज्ञान संस्थानम्

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने कहा कि तीर्थों के जीर्णोद्धार के लिए कृष्ण सर्किट के तहत 97 करोड़ रुपये आए थे। 70 प्रतिशत कार्य हो चुका है। इन पैसों से पांच जगह ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर, नरकातारी तीर्थ, सिटी स्ट्रक्चर और ज्योतिसर में काम हुए। फिलहाल दो जगह का काम अधूरा है, जिसमें ब्रह्मसरोवर पर लाइट एंड साउंड शो और ज्योतिसर में कुरुक्षेत्र महाभारत थीम बिल्डिंग का काम शामिल है। बाकी तीर्थों पर काम किए जा चुके हैं।

अधूरे पड़े काम भी 2022 तक हो जाएगा। फिलहाल ज्योतिसर में कृष्ण भगवान का विराट स्वरूप लगाया जा रहा है। वहीं 48 कोर्स के 50 से ज्यादा तीर्थों पर भी काम चल रहा है। 2022 में 50 दूसरे तीर्थों पर भी काम शुरू हो जाएगा। सरकार की योजना है कि 2023 तक 48 कोस के सभी तीर्थों स्थलों पर कुछ न कुछ कराया जाए।
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