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15 लाख की आबादी पर मात्र 80 डाक्टर
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सरकार और स्वास्थ्य विभाग बिना डॉक्टरों के ही कोरोना की संभावित तीसरी लहर से मुकाबले की तैयारी में है। हालात ये हैं कि जिले की करीब 15 लाख आबादी की सेहत का जिम्मा महज 80 डॉक्टरों के कंधों पर है। अभी तक भी जिला अस्पताल सहित पीएचसी और सीएचसी के 122 में से रिक्त पड़े 42 पदों पर डॉक्टरों की भर्ती नहीं की जा सकी। एलएनजेपी अस्पताल में डॉक्टरों के 42 में से 18 पद खाली पड़े हैं। यहां महज 24 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहेे हैं। इसके अलावा पीएचसी और सीएचसी स्तर पर स्थिति ओर भी चिंताजनक है।
बता दें कि बेकाबू हुई कोरोना की दूसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग को आयुर्वेदिक चिकित्सकों और राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के शोधार्थियों का सहयोग लेना पड़ा था, लेकिन इनसे सबक लेने के बावजूद भी सरकार और स्वास्थ्य विभाग का डॉक्टरों की नियुक्ति की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसा नहीं है कि आमजन को ही परेशानी झेलनी पड़ रही है, बल्कि कहीं-कहीं तो एक डॉक्टर के कंधों पर कई-कई गांवों के इलाज का जिम्मा है। ग्रामीण क्षेत्र से मरीज बेहतर उपचार की आस के साथ कई किमी का सफर तय कर जिला अस्पताल पहुंचे हैं, लेकिन उन्हें यहां भी कई बार बिना इलाज कराए लौटना पड़ता है या फिर निजी अस्पताल की शरण लेनी पड़ती है।
सबसे बुरे हालात प्रसूति विभाग के हैं। यहां एक समय में 100 से ज्यादा जच्चा-बच्चा दाखिल रहते हैं, जिनके सेहत का बोझ मात्र एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ के कंधों पर है। बढ़ते बोझ के चलते पहले 3-4 स्त्री रोग विशेषज्ञ नौकरी छोड़ चुकी हैं। इसके अलावा बाल रोग विशेषज्ञों की स्थिति ये है कि तीन लाख बच्चों की आबादी पर महज चार बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इनमें से एक बाल रोग विशेषज्ञ अस्पताल की एसएनसीयू को संभाल रहा है, जबकि यहां चार एमओ की आवश्यकता है।
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हेल्थ सेंटर--------स्वीकृत पद---------------रिक्त पद
-जिला अस्पताल---42------------------------18
-सीएचसी झांसा----06------------------------02
-सीएचसी लाडवा---07------------------------02
-सीएचसी बाबैन----10------------------------08
-सीएचसी शाहाबाद--07-----------------------05
-सीएचसी पिहोवा----07-----------------------03
-ठसका मीराजीं------02-----------------------01
-पीएचसी रामगढ़ रोड़-02---------------------01
-पॉली क्लीनिक-------02----------------------01
-जिला डिस्पेंसरी-----01-----------------------01
-जिला जेल---------02-------------------------01
-पीएचसी आईएसएम--02--------------------01
सीएचसी शाहाबाद एसएमओ के अलावा महज एक डॉक्टर के सहारे चल रही है। बता दें कि दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर जिले की एकमात्र सीएचसी है। यहां डॉक्टरों की सात पदों की स्वीकृत हैं, लेकिन यहां एसएमओ सहित दो डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं। बताया गया कि यहां रोजाना 200 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन कई बार डॉक्टर छुट्टी पर होने के चलते मरीजों को लौटना पड़ता है।
जिला सिविल सर्जन डॉ. संत लाल वर्मा का कहना है कि स्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति सरकार करेगी, लेकिन जिला स्वास्थ्य विभाग एनएचएम के तहत ही अनुबंध आधार पर डॉक्टरों की भर्ती कर सकता है। जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है गई। विभाग तीसरी लहर को जहन में रखते हुए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं के लिए भरसक प्रयास कर रहा है।
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बता दें कि बेकाबू हुई कोरोना की दूसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग को आयुर्वेदिक चिकित्सकों और राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के शोधार्थियों का सहयोग लेना पड़ा था, लेकिन इनसे सबक लेने के बावजूद भी सरकार और स्वास्थ्य विभाग का डॉक्टरों की नियुक्ति की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसा नहीं है कि आमजन को ही परेशानी झेलनी पड़ रही है, बल्कि कहीं-कहीं तो एक डॉक्टर के कंधों पर कई-कई गांवों के इलाज का जिम्मा है। ग्रामीण क्षेत्र से मरीज बेहतर उपचार की आस के साथ कई किमी का सफर तय कर जिला अस्पताल पहुंचे हैं, लेकिन उन्हें यहां भी कई बार बिना इलाज कराए लौटना पड़ता है या फिर निजी अस्पताल की शरण लेनी पड़ती है।
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सबसे बुरे हालात प्रसूति विभाग के हैं। यहां एक समय में 100 से ज्यादा जच्चा-बच्चा दाखिल रहते हैं, जिनके सेहत का बोझ मात्र एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ के कंधों पर है। बढ़ते बोझ के चलते पहले 3-4 स्त्री रोग विशेषज्ञ नौकरी छोड़ चुकी हैं। इसके अलावा बाल रोग विशेषज्ञों की स्थिति ये है कि तीन लाख बच्चों की आबादी पर महज चार बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इनमें से एक बाल रोग विशेषज्ञ अस्पताल की एसएनसीयू को संभाल रहा है, जबकि यहां चार एमओ की आवश्यकता है।
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हेल्थ सेंटर--------स्वीकृत पद---------------रिक्त पद
-जिला अस्पताल---42------------------------18
-सीएचसी झांसा----06------------------------02
-सीएचसी लाडवा---07------------------------02
-सीएचसी बाबैन----10------------------------08
-सीएचसी शाहाबाद--07-----------------------05
-सीएचसी पिहोवा----07-----------------------03
-ठसका मीराजीं------02-----------------------01
-पीएचसी रामगढ़ रोड़-02---------------------01
-पॉली क्लीनिक-------02----------------------01
-जिला डिस्पेंसरी-----01-----------------------01
-जिला जेल---------02-------------------------01
-पीएचसी आईएसएम--02--------------------01
सीएचसी शाहाबाद एसएमओ के अलावा महज एक डॉक्टर के सहारे चल रही है। बता दें कि दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर जिले की एकमात्र सीएचसी है। यहां डॉक्टरों की सात पदों की स्वीकृत हैं, लेकिन यहां एसएमओ सहित दो डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं। बताया गया कि यहां रोजाना 200 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन कई बार डॉक्टर छुट्टी पर होने के चलते मरीजों को लौटना पड़ता है।
जिला सिविल सर्जन डॉ. संत लाल वर्मा का कहना है कि स्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति सरकार करेगी, लेकिन जिला स्वास्थ्य विभाग एनएचएम के तहत ही अनुबंध आधार पर डॉक्टरों की भर्ती कर सकता है। जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है गई। विभाग तीसरी लहर को जहन में रखते हुए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं के लिए भरसक प्रयास कर रहा है।