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Kurukshetra News: देश में 32 में से 16 एनआईटी में स्थायी बीओजी चेयरमैन तो छह में स्थायी निदेशक नहीं
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कुरुक्षेत्र। देश को उच्चकोटि के इंजीनियर देने वाले कई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) को डायरेक्टर और बोर्ड ऑफ गर्वनर्स चेयरमैन की कमी झेलनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि देशभर के 32 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में से 16 में बोर्ड ऑफ गर्वनर्स चेयरमैन की स्थायी नियुक्ति ही नहीं है। वहीं छह संस्थानों में कई वर्षों से स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं हो सकी है। एनआईटी कुरुक्षेत्र के सर्व कर्मचारी संघ के पूर्व महासचिव कुलविंदर सिंह की ओर से आरटीआई में उच्चतर शिक्षा विभाग से मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है।
एनआईटी कुरुक्षेत्र के सर्व कर्मचारी संघ की ओर से प्रधानमंत्री और केंद्रीय उच्च शिक्षा विभाग को लिखे गए पत्र में न सिर्फ संस्थान में खाली पड़े पदों की जानकारी दी गई है, बल्कि खाली पड़े पदों पर प्राथमिकता से नियुक्ति की मांग उठाई गई है। पत्र में बताया गया है कि कई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों वर्षों से निदेशक और बीओजी चेयरमैन की नियुक्ति नहीं हो सकी है, जबकि एनआईटी एक्ट के अनुसार, जल्द ही बोर्ड ऑफ गवर्नर की नियुक्ति की जानी चाहिए। बताया गया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में निदेशकों को एक सीमा तक आदेश पारित करने की अनुमति होती है, उसके पश्चात संस्थान का बोर्ड ऑफ गवर्नर ही उन आदेशाें को पारित करता है। ऐसे में स्थायी चेयरमैन हो तो काम आसान हो जाता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र में भी पिछले चार साल से स्थायी बोर्ड ऑफ गवर्नर नहीं हैं। इसके अलावा करीब सात साल से स्थायी तौर पर रजिस्ट्रार नहीं हैं। इससे प्रशासनिक काम प्रभावित हो रहे हैं।
इन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में निदेशक के पद रिक्त
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इन संस्थानों में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी)
नागपुर, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, पांडिचेरी के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में स्थायी निदेशक के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
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इन संस्थानों में बीओजी चेयरमैन के पद रिक्त
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कालीकट, हमीरपुर, तिरुचिरापल्ली, जालंधर, कुरुक्षेत्र, उत्तराखंड, जयपुर, वारंगल, श्रीनगर, सिलचर, भोपाल, गोवा, सुरतकल, दुर्गापुर, नागालैंड, पांडिचेरी ।
फोटो 16
बीओजी चेयरमैन होने से संस्थान संचालन में होती है सुविधा : प्रो रेड्डी
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एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी का कहना है कि बीओजी चेयरमैन पूरे कार्यकाल के लिए स्थायी हो तो संस्थान के संचालन में कुशलता अधिक रहती है। हर संस्थान में यह स्थायी नियुक्ति जरूरी होती है। उन्होंने माना कि 17 जनवरी 2019 से एनआईटी कुरुक्षेत्र में स्थाई चेयरमैन नहीं है। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया जारी है।
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एनआईटी कुरुक्षेत्र के सर्व कर्मचारी संघ की ओर से प्रधानमंत्री और केंद्रीय उच्च शिक्षा विभाग को लिखे गए पत्र में न सिर्फ संस्थान में खाली पड़े पदों की जानकारी दी गई है, बल्कि खाली पड़े पदों पर प्राथमिकता से नियुक्ति की मांग उठाई गई है। पत्र में बताया गया है कि कई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों वर्षों से निदेशक और बीओजी चेयरमैन की नियुक्ति नहीं हो सकी है, जबकि एनआईटी एक्ट के अनुसार, जल्द ही बोर्ड ऑफ गवर्नर की नियुक्ति की जानी चाहिए। बताया गया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में निदेशकों को एक सीमा तक आदेश पारित करने की अनुमति होती है, उसके पश्चात संस्थान का बोर्ड ऑफ गवर्नर ही उन आदेशाें को पारित करता है। ऐसे में स्थायी चेयरमैन हो तो काम आसान हो जाता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र में भी पिछले चार साल से स्थायी बोर्ड ऑफ गवर्नर नहीं हैं। इसके अलावा करीब सात साल से स्थायी तौर पर रजिस्ट्रार नहीं हैं। इससे प्रशासनिक काम प्रभावित हो रहे हैं।
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इन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में निदेशक के पद रिक्त
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इन संस्थानों में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी)
नागपुर, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, पांडिचेरी के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में स्थायी निदेशक के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
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इन संस्थानों में बीओजी चेयरमैन के पद रिक्त
कालीकट, हमीरपुर, तिरुचिरापल्ली, जालंधर, कुरुक्षेत्र, उत्तराखंड, जयपुर, वारंगल, श्रीनगर, सिलचर, भोपाल, गोवा, सुरतकल, दुर्गापुर, नागालैंड, पांडिचेरी ।
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बीओजी चेयरमैन होने से संस्थान संचालन में होती है सुविधा : प्रो रेड्डी
एनआईटी कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी का कहना है कि बीओजी चेयरमैन पूरे कार्यकाल के लिए स्थायी हो तो संस्थान के संचालन में कुशलता अधिक रहती है। हर संस्थान में यह स्थायी नियुक्ति जरूरी होती है। उन्होंने माना कि 17 जनवरी 2019 से एनआईटी कुरुक्षेत्र में स्थाई चेयरमैन नहीं है। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया जारी है।