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सोमवती, भौमवती अमावस पर चमत्कारी योग
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डॉ. रामराज कौशिक।
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। नए साल की शुरुआत में पहली अमावस ही सोमवती अमावस होगी। 31 जनवरी को सोमवती अमावस और 1 फरवरी को भौमवती अमावस है। मंगलवार को पड़ने वाली अमावस को भौमवती अमावस कहा जाता है। इस तरह से इस साल में कुल 13 अमावस होंगी। सोमवती व भौमवती अमावस पर एक अद्भुत संयोग बनने जा रहा है, जो सिद्धि व साधना के लिए चमत्कारी योग है।
गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि साल की शुरुआत में ही दो अमावस्या रहेगी। दोनों ही अमावस बेहद खास है, क्योंकि एक अमावस सोमवती तो दूसरी भौमवती अमावस है। सोमवती अमावस दोपहर 2 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी और 1 फरवरी को भौमवती अमावस सूर्योदय में होकर सुबह 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। मान्यता है कि अमावस के दिन व्रत पूजन और पितरों के निमित्त जल, तिल व कर्म करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। सुहागिनों के लिए तो इस व्रत का खास ही महत्व है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और शिव-पार्वती की पूजा करने से सुहाग की आयु लंबी होती है।
उन्होंने बताया कि इस साल में कुल 13 अमावस तिथियां हैं। वहीं साल में दो बार सोमवती अमावस पड़ेंगी। साल की पहली सोमवती अमावस्या 31 जनवरी को तो दूसरी ज्येष्ठ मास में 30 मई को होगी। पंचांग गणना के अनुसार 31 जनवरी को दोपहर में 2 बजकर 19 मिनट से पहले चतुर्दशी तिथि है। इस दिन 10 बजकर 25 मिनट से सिद्धि योग भी लग जाएगा। इस दिन सुबह पैरों के नीचे आक के पत्ते, सिर और माथे पर रखकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए स्नान करे। उसके बाद जल में दूध मिलाकर शिवजी का अभिषेक करके बेलपत्र और धतूरे को शिवजी को अर्पित करें। इस शुभ संयोग में घर में पारद शिवलिंग की स्थापना कर सकते हैं।
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पितृ ऋण से मुक्ति के लिए मंगलकारी
डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि भौमवती अमावस पर पितरों के निमित्त पूजा अर्चना करने से पितृ ऋण से मुक्त हो सकते हैं। इस दिन हनुमानजी और मंगल देव की उपासना करने से कर्ज, बीमारी तथा भूमि भवन की समस्या तथा मंगल से संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।
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कुरुक्षेत्र। नए साल की शुरुआत में पहली अमावस ही सोमवती अमावस होगी। 31 जनवरी को सोमवती अमावस और 1 फरवरी को भौमवती अमावस है। मंगलवार को पड़ने वाली अमावस को भौमवती अमावस कहा जाता है। इस तरह से इस साल में कुल 13 अमावस होंगी। सोमवती व भौमवती अमावस पर एक अद्भुत संयोग बनने जा रहा है, जो सिद्धि व साधना के लिए चमत्कारी योग है।
गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि साल की शुरुआत में ही दो अमावस्या रहेगी। दोनों ही अमावस बेहद खास है, क्योंकि एक अमावस सोमवती तो दूसरी भौमवती अमावस है। सोमवती अमावस दोपहर 2 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी और 1 फरवरी को भौमवती अमावस सूर्योदय में होकर सुबह 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। मान्यता है कि अमावस के दिन व्रत पूजन और पितरों के निमित्त जल, तिल व कर्म करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। सुहागिनों के लिए तो इस व्रत का खास ही महत्व है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और शिव-पार्वती की पूजा करने से सुहाग की आयु लंबी होती है।
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उन्होंने बताया कि इस साल में कुल 13 अमावस तिथियां हैं। वहीं साल में दो बार सोमवती अमावस पड़ेंगी। साल की पहली सोमवती अमावस्या 31 जनवरी को तो दूसरी ज्येष्ठ मास में 30 मई को होगी। पंचांग गणना के अनुसार 31 जनवरी को दोपहर में 2 बजकर 19 मिनट से पहले चतुर्दशी तिथि है। इस दिन 10 बजकर 25 मिनट से सिद्धि योग भी लग जाएगा। इस दिन सुबह पैरों के नीचे आक के पत्ते, सिर और माथे पर रखकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए स्नान करे। उसके बाद जल में दूध मिलाकर शिवजी का अभिषेक करके बेलपत्र और धतूरे को शिवजी को अर्पित करें। इस शुभ संयोग में घर में पारद शिवलिंग की स्थापना कर सकते हैं।
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पितृ ऋण से मुक्ति के लिए मंगलकारी
डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि भौमवती अमावस पर पितरों के निमित्त पूजा अर्चना करने से पितृ ऋण से मुक्त हो सकते हैं। इस दिन हनुमानजी और मंगल देव की उपासना करने से कर्ज, बीमारी तथा भूमि भवन की समस्या तथा मंगल से संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।