{"_id":"623246b3dcb463725919c67c","slug":"live-life-with-ease-in-difficult-situations-kurukshetra-kurukshetra-news-knl1021042149","type":"story","status":"publish","title_hn":"विकट परिस्थितियों में सहज भाव से जीवन व्यतीत करें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विकट परिस्थितियों में सहज भाव से जीवन व्यतीत करें
विज्ञापन
केयू के नॉन टीचिंग क्लब में चल रही भागवत कथा में आरती करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक क्लब में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ में बुधवार को श्रद्धालुओं को कथावाचक पंडित अनिल शास्त्री ने बताया कि भगवान वामन ने लघु रूप धारण कर संदेश दिया कर मनुष्य कितना भी बड़ा हो उसे हमेशा लोक दृष्टि से संसार वह समाज परिवार में छोटे बनकर रहना चाहिए। छोटे बनकर रहने से कभी भी विकट परिस्थिति में उस प्राणी को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है। मनुष्य विकट परिस्थितियों में भी सरल सहज भाव से अपना जीवन व्यतीत कर लेता है।
कथावाचक ने कहा कि भगवान वामन राजा बलि के यज्ञ को परिपूर्ण कराने के लिए यज्ञशाला मे पहुंचे राजा बलि ने भगवान वामन का षोडशोपचार से पूजन करते हुए भगवान का लोक दृष्टि से बहुत मान किया। भगवान वामन प्रसन्न हुए भगवान ने राजा बलि के समस्त पूर्वजों की प्रशंसा की। प्रशंसा सुनकर राजा बलि ने कुछ भी मांगने को कहा।
भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि तीन पग भूमि देने के लिए तैयार हुए। तभी भगवान वामन का रूप बहुत ही विशाल हो गया। भगवान वामन ने एक पग में संपूर्ण आकाश मंडल को मापा, दूसरे पार्क में भूमंडल को मापा। राजा के पास तीसरा पग देने को कुछ भी नहीं था, तब राजा बलि ने भगवान त्रिविक्रम के सामने अपना शरीर समर्पण कर दिया और कहा कि मेरे शरीर के ऊपर अपना चरण रखकर मेरी प्रतिज्ञा को पूर्ण कराइए। राजा बलि की बात सुनकर भगवान वामन ने ऐसा ही किया।
विज्ञापन
कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि समाज में बिना त्याग कुछ भी नहीं हो सकता। अगर समाज के अंदर मान सम्मान यश कीर्ति चाहिए तो मनुष्य को अपने कमाए हुए धन में से दान अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर पंडित रंगनाथ त्रिपाठी, रेखा दुबे, डॉ. आनंद दुबे, डॉ. शालिनी, डॉ. पीकुमार, डॉ. दिलीप कालरा, रीना गुप्ता, सरिता शर्मा, माया शर्मा, मदन रंगा, डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. सुनील ढींगरा, रमन मिश्रा व जय किशन सैनी सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक क्लब में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ में बुधवार को श्रद्धालुओं को कथावाचक पंडित अनिल शास्त्री ने बताया कि भगवान वामन ने लघु रूप धारण कर संदेश दिया कर मनुष्य कितना भी बड़ा हो उसे हमेशा लोक दृष्टि से संसार वह समाज परिवार में छोटे बनकर रहना चाहिए। छोटे बनकर रहने से कभी भी विकट परिस्थिति में उस प्राणी को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है। मनुष्य विकट परिस्थितियों में भी सरल सहज भाव से अपना जीवन व्यतीत कर लेता है।
कथावाचक ने कहा कि भगवान वामन राजा बलि के यज्ञ को परिपूर्ण कराने के लिए यज्ञशाला मे पहुंचे राजा बलि ने भगवान वामन का षोडशोपचार से पूजन करते हुए भगवान का लोक दृष्टि से बहुत मान किया। भगवान वामन प्रसन्न हुए भगवान ने राजा बलि के समस्त पूर्वजों की प्रशंसा की। प्रशंसा सुनकर राजा बलि ने कुछ भी मांगने को कहा।
विज्ञापन
भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि तीन पग भूमि देने के लिए तैयार हुए। तभी भगवान वामन का रूप बहुत ही विशाल हो गया। भगवान वामन ने एक पग में संपूर्ण आकाश मंडल को मापा, दूसरे पार्क में भूमंडल को मापा। राजा के पास तीसरा पग देने को कुछ भी नहीं था, तब राजा बलि ने भगवान त्रिविक्रम के सामने अपना शरीर समर्पण कर दिया और कहा कि मेरे शरीर के ऊपर अपना चरण रखकर मेरी प्रतिज्ञा को पूर्ण कराइए। राजा बलि की बात सुनकर भगवान वामन ने ऐसा ही किया।
विज्ञापन
कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि समाज में बिना त्याग कुछ भी नहीं हो सकता। अगर समाज के अंदर मान सम्मान यश कीर्ति चाहिए तो मनुष्य को अपने कमाए हुए धन में से दान अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर पंडित रंगनाथ त्रिपाठी, रेखा दुबे, डॉ. आनंद दुबे, डॉ. शालिनी, डॉ. पीकुमार, डॉ. दिलीप कालरा, रीना गुप्ता, सरिता शर्मा, माया शर्मा, मदन रंगा, डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. सुनील ढींगरा, रमन मिश्रा व जय किशन सैनी सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।