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कला शिक्षा को नवाचार और वैश्विक दृष्टि से जोड़ना समय की मांग : प्रो. सचदेवा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Feb 2026 01:54 AM IST
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Linking art education with innovation and global vision is the need of the hour: Prof. Sachdeva
कुरुक्षेत्र। कुवि में कार्यशाला के दौरान विचार रखते कुलगुरु प्रो सोमनाथ सचदेवा। विज्ञ​​प्ति
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग की ओर से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय रूसा प्रोजेक्ट सोसाइटी के तहत सतत शिक्षा केंद्र के सहयोग से ''शिक्षण में समकालीन कला अभ्यास'' विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने बतौर मुख्य अतिथि उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप कला शिक्षा को केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित न रखकर उसे चिंतन, नवाचार और सामाजिक सरोकारों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
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उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं पारंपरिक कलात्मकता और आधुनिक रचनात्मक चुनौतियों के बीच सेतु का कार्य करती हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की हालिया उपलब्धियों नैक की ओर से ए-प्लस-प्लस ग्रेड, एनआईआरएफ रैंकिंग में 35वां स्थान और यूजी से पीजी तक समेकित योजनाओं और अंतरराष्ट्रीय एमओयू जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि विवि निरंतर शैक्षणिक उत्कृष्टता और नवाचार की दिशा में अग्रसर है।
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विशिष्ट अतिथि अनुसंधान व विकास अधिष्ठाता और रूसा के नोडल अधिकारी डॉ. संजीव अग्रवाल रहे। उन्होंने कहा कि समकालीन कला अभ्यास शिक्षण पद्धतियों को नई दृष्टि प्रदान करता है और विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करता है। कार्यक्रम समन्वयक ललित कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरचरण सिंह ने परियोजना-आधारित व प्रयोगात्मक शिक्षण पद्धतियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण विद्यार्थियों में पेशेवर कौशल, टीम वर्क और प्रस्तुतीकरण क्षमता का विकास करता है जिससे वे गैलरी मालिकों और संग्रहकर्ताओं के समक्ष आत्मविश्वास के साथ अपनी कला प्रस्तुत कर सकें।
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कार्यशाला में देशभर से प्रतिष्ठित कलाकारों और विशेषज्ञों का पैनल शामिल हुआ। विनय शर्मा, अजय समीर, कविता नायर, प्रो. राम विरंजन, केके गांधी और गुरदीप धीमान प्रमुख रहे। पहले दिन प्रतिभागियों को उद्यमिता, ब्रांडिंग और डिजिटल नेटवर्किंग जैसे बाजार-उन्मुख कौशलों से परिचित कराया गया। विशेषज्ञों ने व्याख्यानों और व्यावहारिक प्रदर्शनों (डेमो) के माध्यम से अपना अनुभव साझा किया। पीपीटी पोर्टफोलियो प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने व्यक्तिगत ब्रांड निर्माण और सफलता के व्यावहारिक सूत्र साझा किए।


प्रसिद्ध पेपर मैन विनय शर्मा ने अपने विशिष्ट पेन वर्क का प्रदर्शन किया। इसमें रद्दी कागज, प्राचीन पांडुलिपियों और कुंडली की रेखाओं को लेयर्ड कंपोजिशन में रूपांतरित कर राजस्थान की ग्रामीण परंपराओं को आधुनिक अमूर्तन से जोड़ा। वहीं अजय समीर ने कला को कलाकार, सामग्री और दर्शक के मध्य जीवंत संवाद बताया। उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, शोधार्थी और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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