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सद्कर्म-परोपकार की भावना से होता जीवन सार्थक : वैद्य धीमान
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय और महर्षि दधीचि देहदान समिति ने शनिवार को सन्निहित सरोवर पर महर्षि दधीचि जयंती मनाई। इस अवसर पर हवन और पौधरोपण किया गया। कुलपति वैद्य करतार सिंह धीमान ने सद्कर्म और देहदान के महत्व पर प्रकाश डाला।
कुलपति धीमान ने कहा कि शुद्ध भावना से प्रकृति अनुकूल परिस्थितियां बनाती है। उन्होंने चरक एवं सुश्रुत संहिता का उल्लेख करते हुए जीवन को शरीर, इंद्रियों, मन और आत्मा का संयोग बताया। उनके अनुसार, वर्तमान के सद्कर्म ही भविष्य के कल्याण का आधार हैं। उन्होंने मंदिर जाने और सर्वकल्याण की भावना को वास्तविक अध्यात्म बताया। कुलपति ने 23 सितंबर को विश्व आयुर्वेद दिवस पर आयुर्वेदा फॉर हेल्दी टुमारो के संदेश का जिक्र किया। उन्होंने महर्षि दधीचि के अस्थि दान को लोक कल्याण का उदाहरण बताया। देहदान को चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए समाजहित में योगदान का आह्वान किया।
त्याग, सेवा और राष्ट्रहित का प्रेरक जीवन
महर्षि दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष अशोक रोशा ने सन्निहित सरोवर को अत्यंत पवित्र स्थान बताया। उन्होंने महर्षि दधीचि के त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। रोशा ने कहा कि देश की रक्षा के लिए सैनिकों का बलिदान सर्वोच्च है। महर्षि दधीचि का जीवन भी त्याग, सेवा और राष्ट्रहित की प्रेरणा देता है।
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कुलपति धीमान ने कहा कि शुद्ध भावना से प्रकृति अनुकूल परिस्थितियां बनाती है। उन्होंने चरक एवं सुश्रुत संहिता का उल्लेख करते हुए जीवन को शरीर, इंद्रियों, मन और आत्मा का संयोग बताया। उनके अनुसार, वर्तमान के सद्कर्म ही भविष्य के कल्याण का आधार हैं। उन्होंने मंदिर जाने और सर्वकल्याण की भावना को वास्तविक अध्यात्म बताया। कुलपति ने 23 सितंबर को विश्व आयुर्वेद दिवस पर आयुर्वेदा फॉर हेल्दी टुमारो के संदेश का जिक्र किया। उन्होंने महर्षि दधीचि के अस्थि दान को लोक कल्याण का उदाहरण बताया। देहदान को चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए समाजहित में योगदान का आह्वान किया।
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त्याग, सेवा और राष्ट्रहित का प्रेरक जीवन
महर्षि दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष अशोक रोशा ने सन्निहित सरोवर को अत्यंत पवित्र स्थान बताया। उन्होंने महर्षि दधीचि के त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। रोशा ने कहा कि देश की रक्षा के लिए सैनिकों का बलिदान सर्वोच्च है। महर्षि दधीचि का जीवन भी त्याग, सेवा और राष्ट्रहित की प्रेरणा देता है।
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