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Kurukshetra News: केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा को मिला श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय का कार्यभार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Apr 2023 02:20 AM IST
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KU Vice Chancellor Prof. Somnath Sachdeva got the charge of Shri Krishna Ayush University
कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सोमनाथ सचदेवा को सौंप दिया गया है। इस संबंध में सोमवार को अधिसूचना जारी कर दी गई, जिसके साथ ही अब उम्मीद जग गई है कि आखिरकार आयुष विश्वविद्यालय के अटके कार्यों को गति मिल सकेगी।
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बता दें कि आयुष विश्वविद्यालय के पहले कुलपति के तौर पर प्रो. बलदेव सिंह धीमान को जिम्मेदारी मिली थी और उनका कार्यकाल गत 28 फरवरी को पूरा हो चुका है। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद अभी तक यह पद रिक्त है। यहां तक कि अभी तक आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार भी प्रदेश सरकार द्वारा नहीं दिया जा सका था। सोमवार को जैसे ही केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा को यह अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया तो विश्वविद्यालय प्रशासन में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर अटके कार्य फिर से शुरू हो सकेंगे।
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कुलपति की दौड़ में कई प्रोफेसर शामिल
बता दें कि जैसे ही डॉ. बलदेव सिंह धीमान कुलपति पद से सेवानिवृत्त हुए तो कई प्रोफेसर ने इस पद पर नियुक्ति के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे। इनमें कई प्रो. श्रीकृष्णा आयुर्वेदिक कॉलेज से भी जुड़े है तो कई प्रो. दूसरे कॉलेज से भी है। उधर, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जा चुका है, लेकिन इसमें संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों व विद्वानों की ओर से आपत्ति भी जताई जा रही है। उनका कहना है कि इसमें पीजी स्तर पर 15 साल तक शैक्षिक अनुभव मांगा गया है, जबकि प्रदेश में पीजी हाल में ही शुरू की जा सकी है। ऐसे में शर्तें पूरी कर पाना आसान नहीं है।
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विश्वविद्यालय निर्माण कार्य के साथ-साथ भर्ती भी अटकी
बता दें कि गांव फतुहपुर में विश्वविद्यालय बनाया जाना है। पांच साल पहले विश्वविद्यालय बनाए जाने की घोषणा हुई थी, जिसके बाद आज तक महज चहारदीवारी ही बन पाई है। अब 100 करोड़ रुपये का बजट जारी हो चुका है, लेकिन इसके लिए टेंडर व अन्य प्रक्रियाएं कुलपति न होने के चलते अटक गई थी। वहीं सरकार ने विश्वविद्यालय के लिए 265 पद स्वीकृत किए हुए हैं, जिनमें 80 लेक्चरर भी शामिल हैं। अभी इस भर्ती को लेकर भी मापदंड तक तय नहीं हो पाए थे। अब संभावना है कि इन दोनों बड़े कार्यों के अलावा अन्य कार्यों को भी गति मिल सकेगी।
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