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कालबेलिया लोक नृत्य ने ब्रह्मसरोवर पर दिखाई राजस्थानी संस्कृति की झलक
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कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में बुधवार को लोक कलाकारों ने कालबेलिया लोक नृत्य की प्रस्तुति देकर राजस्थानी संस्कृति की झलक दिखाई। उन्होंने कालबेलिया व चकरी नृत्य के माध्यम से भगवान की आराधना के साथ अन्य राजस्थानी त्योहारों पर महिलाओं के मन में उठने वाली उमंग का प्रदर्शन किया। इस लोक नृत्य को देखकर महोत्सव में आए दर्शक गदगद हो गए। वहीं महोत्सव के सातवें दिन बुधवार को ब्रह्मसरोवर के तट पर दोपहर के समय पर्यटकों का मनोरंजन करने के लिए उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के कलाकारों ने मंच पर अपना जलवा दिखाया।
मंच पर पहली प्रस्तुति राजस्थान से आए लोक कलाकारों के ग्रुप ने दी। इस ग्रुप के कलाकार विशेष तौर पर कालबेलिया और चकरी लोक नृत्य की प्रस्तुति देकर सभी दर्शकों को आकर्षित किया। कलाकारों ने अपने पांव पर परंपरागत आभूषण बांधकर और हाथों में राजस्थानी परंपरा के अनुसार चूड़ा पहन कर जबरदस्त प्रस्तुती दी। इस प्रस्तुति को देखकर दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। इन कलाकारों ने अपने इस लोक नृत्य के माध्यम से तीज त्योहारों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा किए जाने वाले नृत्य से सबको भार विभोर कर दिया। वहीं हिमाचल प्रदेश के लोक कलाकारों ने कुल्लू नाटी व गद्दी नाटी नृत्य के माध्यम से पर्यटकों का खूब मनोरंजन किया। इसमें प्रदेश ग्रामीण जीवन स्तर भी दर्शाने का प्रयास किया। इन लोक नृत्यों के द्वारा हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से गद्दी, पंजाब का भांगड़ा व जिंदवा तथा उत्तराखंड का छबेली नृत्य भी लोगों ने पसंद किया। एनजेडसीसी के अधिकारी महिंद्र सिंह ने बताया कि कलाकार इस महोत्सव में सालों से लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। विभाग का प्रयास रहता है कि हर वर्ष कुछ न कुछ नया किया जाए ताकि दर्शक क्राफ्ट मेले के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी खूब आनंद ले सकें। वहीं हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की निदेशिका प्रतिमा चौधरी ने पुरुषोत्तमपुरा बाग में हरियाणा पवेलियन को लेकर चल रही तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों और एजेंसियों संचालकों को कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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मंच पर पहली प्रस्तुति राजस्थान से आए लोक कलाकारों के ग्रुप ने दी। इस ग्रुप के कलाकार विशेष तौर पर कालबेलिया और चकरी लोक नृत्य की प्रस्तुति देकर सभी दर्शकों को आकर्षित किया। कलाकारों ने अपने पांव पर परंपरागत आभूषण बांधकर और हाथों में राजस्थानी परंपरा के अनुसार चूड़ा पहन कर जबरदस्त प्रस्तुती दी। इस प्रस्तुति को देखकर दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। इन कलाकारों ने अपने इस लोक नृत्य के माध्यम से तीज त्योहारों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा किए जाने वाले नृत्य से सबको भार विभोर कर दिया। वहीं हिमाचल प्रदेश के लोक कलाकारों ने कुल्लू नाटी व गद्दी नाटी नृत्य के माध्यम से पर्यटकों का खूब मनोरंजन किया। इसमें प्रदेश ग्रामीण जीवन स्तर भी दर्शाने का प्रयास किया। इन लोक नृत्यों के द्वारा हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से गद्दी, पंजाब का भांगड़ा व जिंदवा तथा उत्तराखंड का छबेली नृत्य भी लोगों ने पसंद किया। एनजेडसीसी के अधिकारी महिंद्र सिंह ने बताया कि कलाकार इस महोत्सव में सालों से लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। विभाग का प्रयास रहता है कि हर वर्ष कुछ न कुछ नया किया जाए ताकि दर्शक क्राफ्ट मेले के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी खूब आनंद ले सकें। वहीं हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की निदेशिका प्रतिमा चौधरी ने पुरुषोत्तमपुरा बाग में हरियाणा पवेलियन को लेकर चल रही तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों और एजेंसियों संचालकों को कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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