{"_id":"6584a362ed3b5aa71b089f24","slug":"international-gita-mahotsav-will-be-organized-grandly-in-sri-lanka-next-year-wickramanayake-kurukshetra-news-c-45-1-kur1001-10680-2023-12-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"अगले वर्ष श्रीलंका में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का किया जाएगा भव्य आयोजन : विक्रमनायके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अगले वर्ष श्रीलंका में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का किया जाएगा भव्य आयोजन : विक्रमनायके
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। श्रीलंका के धार्मिक सांस्कृतिक मामलों के मंत्री विदुरा विक्रमनायके ने वीरवार देर शाम अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में सांध्यकालीन महाआरती की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का अगले साल आयोजन श्रीलंका में भी भव्य और हर्षोल्लास के साथ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र की इस पावन धरा पर पांव रखते ही आध्यात्मिकता और भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद की अनुभूति हुई। इस धरा पर हजारों वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के जो उपदेश दिए वह आज भी प्रासंगिक है। इन उपदेशों का अनुसरण करने के लिए श्रीलंका के नागरिकों को भी प्रेरित और जागरूक किया जाएगा।
विुदरा विक्रमनायके ने कहा कि गीता के उपदेशों से पूरी मानवता को शांति का संदेश मिल रहा है। इस ग्रंथ के उपदेशों का अनुसरण करते हुए एक-दूसरे को समझने का प्रयास करना चाहिए और पूरे विश्व को शांति की राह पर आगे बढ़ना चाहिए। इन उपदेशों का अनुसरण करके ही कोई भी देश तरक्की की राह पर आगे बढ़ सकता है। इससे मन शुद्ध होता है और जब मन शुद्ध होगा तो विश्व धर्म जाति को भूलकर मानवता के सूत्र में बंध जाएगा। इससे निश्चित ही विश्व में शांति स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि इस पावन धरा पर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को देखकर निर्णय लिया गया है कि आगामी वर्ष यानी वर्ष 2024 में श्रीलंका की धरा पर इस महोत्सव का आयोजन किया जाएगा ताकि श्रीलंका के लोग भी पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों को आत्मसात कर सकें।
विज्ञापन
विुदरा विक्रमनायके ने कहा कि गीता के उपदेशों से पूरी मानवता को शांति का संदेश मिल रहा है। इस ग्रंथ के उपदेशों का अनुसरण करते हुए एक-दूसरे को समझने का प्रयास करना चाहिए और पूरे विश्व को शांति की राह पर आगे बढ़ना चाहिए। इन उपदेशों का अनुसरण करके ही कोई भी देश तरक्की की राह पर आगे बढ़ सकता है। इससे मन शुद्ध होता है और जब मन शुद्ध होगा तो विश्व धर्म जाति को भूलकर मानवता के सूत्र में बंध जाएगा। इससे निश्चित ही विश्व में शांति स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि इस पावन धरा पर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को देखकर निर्णय लिया गया है कि आगामी वर्ष यानी वर्ष 2024 में श्रीलंका की धरा पर इस महोत्सव का आयोजन किया जाएगा ताकि श्रीलंका के लोग भी पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों को आत्मसात कर सकें।
विज्ञापन