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भारत विश्व की पांचवी बड़ी और तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था : संजय
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कुरुक्षेत्र। भारत विश्व की पांचवी बड़ी एवं तीव्र गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है, जिसमें युवाओं का सुनहरा भविष्य निहित है। वर्तमान समय के अनुसार प्रौद्योगिकी, नवाचार, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक गुरुत्वाकर्षण तथा सामाजिक परिवर्तन के अनुरूप बदलाव करने की आवश्यकता है।
उक्त विचार बतौर मुख्य वक्ता एंबेसडर संजय भट्टाचार्य, पूर्व सचिव विदेश मंत्रालय, केंद्र सरकार नई दिल्ली ने सोमवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में जी-20 के तहत कृषि में आर्थिक सहयोग पर आयोजित विशेष व्याख्यान में व्यक्त किए। एंबेसडर संजय भट्टाचार्य ने कहा कि देश ने डिजिटल युग में आधार कार्ड एवं यूपीआई, भूमि पंजीकरण सहित अन्य ढांचागत सुविधाओं में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वहीं यूपीआई को अब वैश्विक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। विकासशील देशों का स्तर उंचा उठाने के लिए खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु के लिए वित्तीय सहायता, महिलाओं की भूमिका सहित कौशल विकास बहुत जरूरी है।
मुख्यातिथि कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि देश को जी-20 प्रेसीडेंसी ऐसे समय में मिली जब पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था में अस्थिरता का माहौल था। जी-20 का उद्देश्य वित्तीय अर्थव्यवस्था को सुधारना एवं उसका समाधान करना है। उन्होंने कहा कि उत्पाद को बढ़ाने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन को कम करना पर्यावरण की दृष्टि से अहम है। इसके लिए मनुष्य को अपनी जीवन शैली एवं आदतों में बदलाव किए जाने की आवश्यकता है।
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उन्होंने कहा कि शोध को लेकर कुवि ने पांच वर्गों में शोध अवार्ड शुरू किए है और युवाओं में उद्यमिता एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए दो इंक्यूबेशन सेंटर बनाए गए हैं, जिसके माध्यम से चार स्टार्टअप को बाजार में भी लॉन्च किया गया है।
पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. एमआर खुराना ने बतौर विशिष्ट अतिथि कहा कि जलवायु परिवर्तन का कृषि क्षेत्र पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा है। इसलिए पर्यावरण को संतुलित एवं संरक्षण करना हम सभी का दायित्व है।
प्रो. वीएन अत्री ने कहा कि यह समय विज्ञान, तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी में नीली डिप्लोमेसी का है। देश में जी-20 के इतिहास में पहली बार 43 डेलिगेशन प्रतिभागिता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस), नई दिल्ली द्वारा भविष्य में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कॉन्फ्रेंस एवं कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इस मौके पर डीन सोशल साइंस प्रो. एसके चहल, प्रो. अशोक चौहान, प्रो. संजीव बंसल, प्रो. ब्रजेश साहनी, डॉ. निधि बगड़िया, डॉ. रिशु गर्ग सहित अन्य मौजूद रहे।
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उक्त विचार बतौर मुख्य वक्ता एंबेसडर संजय भट्टाचार्य, पूर्व सचिव विदेश मंत्रालय, केंद्र सरकार नई दिल्ली ने सोमवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में जी-20 के तहत कृषि में आर्थिक सहयोग पर आयोजित विशेष व्याख्यान में व्यक्त किए। एंबेसडर संजय भट्टाचार्य ने कहा कि देश ने डिजिटल युग में आधार कार्ड एवं यूपीआई, भूमि पंजीकरण सहित अन्य ढांचागत सुविधाओं में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वहीं यूपीआई को अब वैश्विक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। विकासशील देशों का स्तर उंचा उठाने के लिए खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु के लिए वित्तीय सहायता, महिलाओं की भूमिका सहित कौशल विकास बहुत जरूरी है।
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मुख्यातिथि कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि देश को जी-20 प्रेसीडेंसी ऐसे समय में मिली जब पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था में अस्थिरता का माहौल था। जी-20 का उद्देश्य वित्तीय अर्थव्यवस्था को सुधारना एवं उसका समाधान करना है। उन्होंने कहा कि उत्पाद को बढ़ाने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन को कम करना पर्यावरण की दृष्टि से अहम है। इसके लिए मनुष्य को अपनी जीवन शैली एवं आदतों में बदलाव किए जाने की आवश्यकता है।
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उन्होंने कहा कि शोध को लेकर कुवि ने पांच वर्गों में शोध अवार्ड शुरू किए है और युवाओं में उद्यमिता एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए दो इंक्यूबेशन सेंटर बनाए गए हैं, जिसके माध्यम से चार स्टार्टअप को बाजार में भी लॉन्च किया गया है।
पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. एमआर खुराना ने बतौर विशिष्ट अतिथि कहा कि जलवायु परिवर्तन का कृषि क्षेत्र पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा है। इसलिए पर्यावरण को संतुलित एवं संरक्षण करना हम सभी का दायित्व है।
प्रो. वीएन अत्री ने कहा कि यह समय विज्ञान, तकनीकी एवं प्रौद्योगिकी में नीली डिप्लोमेसी का है। देश में जी-20 के इतिहास में पहली बार 43 डेलिगेशन प्रतिभागिता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस), नई दिल्ली द्वारा भविष्य में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कॉन्फ्रेंस एवं कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इस मौके पर डीन सोशल साइंस प्रो. एसके चहल, प्रो. अशोक चौहान, प्रो. संजीव बंसल, प्रो. ब्रजेश साहनी, डॉ. निधि बगड़िया, डॉ. रिशु गर्ग सहित अन्य मौजूद रहे।