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Kurukshetra News: हिंदी बनी भारत-श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक सेतु
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कुरुक्षेत्र। हिंदी भाषा भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है। श्रीलंका की हिंदी संस्थान की संस्थापक निदेशक अंतिला कोतलावल ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में एक व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि श्रीलंका के करीब 80 स्कूलों में हिंदी ऐच्छिक विषय के रूप में पढ़ाई जाती है।
अंतिला कोतलावल ने हिंदी फिल्मी गीतों और रेडियो कार्यक्रमों के माध्यम से यह भाषा सीखी। श्रीलंका में हिंदी धारावाहिकों का स्थानीय भाषा में अनुवाद भी किया जाता है। भारतीय उच्चायोग और अन्य भारतीय संस्थाएं वहां हिंदी के प्रचार-प्रसार में सहयोग कर रही हैं। अंतिला कोतलावल ने बताया कि श्रीलंका में हिंदी अनुवाद के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। भारत से बड़ी संख्या में पर्यटक श्रीलंका जाते हैं, जिससे पर्यटन और सांस्कृतिक संबंध मजबूत हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध तरीके से हिंदी के प्रचार-प्रसार के प्रयास किए जाएं तो रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। अंतिला कोतलावल ने विद्यार्थियों को श्रीलंका आकर रामायण सहित भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक ग्रंथों पर शोध करने के लिए आमंत्रित किया। हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने विद्यार्थियों से हिंदी को रोजगार की भाषा के रूप में अपनाने का आह्वान किया। संवाद
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अंतिला कोतलावल ने हिंदी फिल्मी गीतों और रेडियो कार्यक्रमों के माध्यम से यह भाषा सीखी। श्रीलंका में हिंदी धारावाहिकों का स्थानीय भाषा में अनुवाद भी किया जाता है। भारतीय उच्चायोग और अन्य भारतीय संस्थाएं वहां हिंदी के प्रचार-प्रसार में सहयोग कर रही हैं। अंतिला कोतलावल ने बताया कि श्रीलंका में हिंदी अनुवाद के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। भारत से बड़ी संख्या में पर्यटक श्रीलंका जाते हैं, जिससे पर्यटन और सांस्कृतिक संबंध मजबूत हो रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध तरीके से हिंदी के प्रचार-प्रसार के प्रयास किए जाएं तो रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। अंतिला कोतलावल ने विद्यार्थियों को श्रीलंका आकर रामायण सहित भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक ग्रंथों पर शोध करने के लिए आमंत्रित किया। हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने विद्यार्थियों से हिंदी को रोजगार की भाषा के रूप में अपनाने का आह्वान किया। संवाद
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