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हिंदी भाषा प्रेम, मिलन और सौहार्द की भाषा
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रुंपा सेन
- फोटो : Kurukshetra
हिंदी भाषा प्रेम, मिलन और सौहार्द की भाषा है। चीनी भाषा के बाद हिंदी विश्व में बोली जाने वाली दूसरी सबसे बड़ी भाषा है। भारत और अन्य देशों में 60 करोड़ से अधिक लोग हिंदी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। इतना ही नहीं फिजी, मॉरीशस, गुयाना, सूरीनाम जैसे दूसरे देशों की अधिकतर जनता हिंदी बोलती है। भारत से सटे नेपाल की भी कुछ जनता हिंदी बोलती है। आज हिंदी राजभाषा, संपर्क भाषा, जनभाषा के सोपानों को पार कर विश्वभाषा बनने की ओर अग्रसर है।
हिंदी मुख्य रूप से आर्यों और पारसियों की देन है। हिंदी के ज्यादातर शब्द संस्कृत, अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं। हिंदी अपने आप में एक समर्थ भाषा है। प्रकृति से उदार ग्रहणशील, सहिष्णु और भारत की राष्ट्रीय चेतना की संवाहिका है हिंदी। यह विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध और महान भाषा होने के साथ ही हमारी राज्यभाषा भी है। भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिंदी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद ही हिंदी को हर क्षेत्र में प्रचारित-प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिंदी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।
चिकित्सक अमित सोबती ने भारतीयों ने अपनी कड़ी मेहनत, प्रतिभा और कुशाग्र बुद्धि से आज विश्व के तमाम देशों की उन्नति में जो सहायता की है उससे प्रभावित होकर सभी यह समझ गए हैं कि भारतीयों से अच्छे संबंध बनाने के लिए हिंदी सीखना कितना जरूरी है। आज हिंदी ने अंग्रेजी का वर्चस्व तोड़ डाला है। करोड़ों की हिंदी भाषी आबादी कंप्यूटर का प्रयोग अपनी भाषा में कर रही हैं।
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हिंदी प्रेमी रुपा सेन ने बताया कि हिंदी का इतिहास एक हजार वर्ष पुराना है। हिंदी हिंदुस्तान की राष्ट्रभाषा ही नहीं बल्कि हिंदुस्तानियों की पहचान भी है। हमें अपनी मातृभाषा हिंदी को कभी नहीं भूलना चाहिए। वैसे मेरा जन्म बंगाली परिवार में हुआ है और बंगाल में ही पली बढ़ी हूं लेकिन फिर भी मैं अपनी मात्र भाषा को कभी भूली नहीं और यही मेरी हिन्दुस्तानी होने की पहचान भी है।
भगवान परशुराम महाविद्यालय के प्राचार्य योगेश्वर जोशी ने कहा कि हिंदी दुनिया में चौथी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। भारत में हिंदी एक मात्र ऐसी भाषा है, जिसे सबसे अधिक बोला, लिखा व पढ़ा जाता है। आज के समय में युवाओं को अपनी इस भाषा को बोलने में शर्मिंदगी होती है, जो कि सही नहीं है। कई साहित्यकारों ने अपनी बातें कहने के लिए हिंदी को चुना क्योंकि केवल शब्द ही नहीं बल्कि इसके भाव भी लोगों के दिल को छूते हैं। ये मेरा आग्रह है कि बोलचाल और लिखते वक्त हिंदी का इस्तेमाल अधिक से अधिक हो।
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हिंदी मुख्य रूप से आर्यों और पारसियों की देन है। हिंदी के ज्यादातर शब्द संस्कृत, अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं। हिंदी अपने आप में एक समर्थ भाषा है। प्रकृति से उदार ग्रहणशील, सहिष्णु और भारत की राष्ट्रीय चेतना की संवाहिका है हिंदी। यह विश्व की एक प्राचीन, समृद्ध और महान भाषा होने के साथ ही हमारी राज्यभाषा भी है। भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिंदी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद ही हिंदी को हर क्षेत्र में प्रचारित-प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिंदी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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चिकित्सक अमित सोबती ने भारतीयों ने अपनी कड़ी मेहनत, प्रतिभा और कुशाग्र बुद्धि से आज विश्व के तमाम देशों की उन्नति में जो सहायता की है उससे प्रभावित होकर सभी यह समझ गए हैं कि भारतीयों से अच्छे संबंध बनाने के लिए हिंदी सीखना कितना जरूरी है। आज हिंदी ने अंग्रेजी का वर्चस्व तोड़ डाला है। करोड़ों की हिंदी भाषी आबादी कंप्यूटर का प्रयोग अपनी भाषा में कर रही हैं।
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हिंदी प्रेमी रुपा सेन ने बताया कि हिंदी का इतिहास एक हजार वर्ष पुराना है। हिंदी हिंदुस्तान की राष्ट्रभाषा ही नहीं बल्कि हिंदुस्तानियों की पहचान भी है। हमें अपनी मातृभाषा हिंदी को कभी नहीं भूलना चाहिए। वैसे मेरा जन्म बंगाली परिवार में हुआ है और बंगाल में ही पली बढ़ी हूं लेकिन फिर भी मैं अपनी मात्र भाषा को कभी भूली नहीं और यही मेरी हिन्दुस्तानी होने की पहचान भी है।
भगवान परशुराम महाविद्यालय के प्राचार्य योगेश्वर जोशी ने कहा कि हिंदी दुनिया में चौथी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। भारत में हिंदी एक मात्र ऐसी भाषा है, जिसे सबसे अधिक बोला, लिखा व पढ़ा जाता है। आज के समय में युवाओं को अपनी इस भाषा को बोलने में शर्मिंदगी होती है, जो कि सही नहीं है। कई साहित्यकारों ने अपनी बातें कहने के लिए हिंदी को चुना क्योंकि केवल शब्द ही नहीं बल्कि इसके भाव भी लोगों के दिल को छूते हैं। ये मेरा आग्रह है कि बोलचाल और लिखते वक्त हिंदी का इस्तेमाल अधिक से अधिक हो।

डा. योगेश्वर जोशी।- फोटो : Kurukshetra

डॉ अमित सोबती- फोटो : Kurukshetra