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हरियाणा के लोक जीवन पर आधारित फिल्मों से हरियाणवी सिनेमा का हो रहा विकास : यशपाल शर्मा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Aug 2024 03:53 AM IST
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Haryanvi cinema is developing through films based on folk life of Haryana: Yashpal Sharma
कुरुक्षेत्र। हरियाणवी सिनेमा में विकास की अपार संभावनाएं हैं। युवा पीढ़ी हरियाणा के लोक जीवन पर आधारित कहानियों पर फिल्मों का निर्माण कर रही है, जिसे लोग बहुत पसंद कर रहे हैं। इससे हरियाणवी भाषा एवं सिनेमा का विकास हो रहा है। भविष्य में इसके और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। ये कहना है हरियाणा के प्रसिद्ध अभिनेता एवं लख्मीचंद फिल्म के निर्माता यशपाल शर्मा का। वह रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित सातवें हरियाणा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में युवाओं से संवाद कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि इस तरह के महोत्सव हरियाणा के कलाकारों को मंच देने के साथ उभरते कलाकारों के कार्य का मूल्यांकन करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। वहीं फिल्मी अभिनेता रामपाल बल्हारा ने कहा कि हरियाणा में नए दौर के सिनेमा ने अपने आप को गढ़ना शुरू कर दिया है। युवा निर्माता एवं प्रोड्यूसर नए थीम पर आधारित फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं। ओटीटी प्लेटफार्म से फिल्में दर्शकों तक पहुंच रही हैं। हरियाणवी सिनेमा आने वाले दिनों में अपनी अलग पहचान के साथ उभरेगा। उन्होंने बताया कि लख्मीचंद फिल्म का दूसरा भाग भी सभी के बीच होगा।
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पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा से करने पर ही सफलता संभव : राजेंद्र गुप्ता
कुरुक्षेत्र। कार्य को पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा से करने पर ही सफलता उसके कदम चूमती है, जिससे आत्मिक संतुष्टि भी मिलती है। ये कहना है कुवि के पूर्व छात्र एवं अभिनेता राजेंद्र गुप्ता का। वे रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हरियाणा फिल्म महोत्सव में आए, जहां उन्होंने युवाओं के साथ अपने अभिनय के अनुभवों को साझा किया। युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने उनके साथ संवाद किया। अभिनेता राजेंद्र ने युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और सकारात्मकता के साथ कार्य करने की सीख दी।
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अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जब वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पढ़ते थे, उनका मन पढ़ाई में कम और नाटक में ज्यादा लगता था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दाखिला ले लिया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने बताया कि कविता गद्य से ज्यादा प्रभावशाली होती है। जब उनके पास समय होता है तो वह कविता लेखन भी करते हैं। व्यक्ति को हमेशा अपने मन की बात सुननी चाहिए और जिस कार्य को करने में मन लगे उसे को करना चाहिए। जीवन का लक्ष्य जरूर निर्धारित करना चाहिए, जिसे पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। क्योंकि जिस कार्य को करने में मजा आता है, वही सर्वश्रेष्ठ कार्य होता है। इस दौरान गंगा और महादेव नाम से कविता का पाठन मंच से किया। उन्होंने कहा कि वह अपने विश्वविद्यालय में आकर बहुत अच्छा महसूस कर रहे हैं।
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