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दिखाई दिया पीला रतुआ, 20 एकड़ फसल प्रभावित

Fri, 05 Feb 2016 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र Updated Fri, 05 Feb 2016 11:53 PM IST
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got peela ratua, 20 acre crop affacted
करनाल और यमुनागर के बाद अब कुरुक्षेत्र में भी गेंहू की फसल पर पीले रतुआ
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आ गया है। शाहबाद, बाबैन और लाडवा में पहुंची इस बीमारी ने अभी तक 20 एकड़ फसल को चपेट में ले लिया है। इसकी जानकारी होते ही कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों में हड़कंप मच गया है।

इसके साथ ही किसानों की पेशानी पर भी बल पड़ गए हैं। कृषि विभाग के वैज्ञानिक इस बीमारी को रोकने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। करनाल और यमुनानगर में पीला रतुआ की जानकारी होते ही प्रदेश सरकार ने कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिकों को सतर्क हरने के आदेश जारी कर दिए थे। इसके तहत ही इस बीमारी से अछूते क्षेत्रों में भी कृषि विभाग के अधिकारी और वैज्ञानिक अलर्ट हो गए थे।

कुरुक्षेत्र में भी जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में इस बीमारी की आशंका जताई जाने लगी थी। किसानों की सूचना पर कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र ने सहायक पौधा सरंक्षण अधिकारी की अगुवाई में टीमें बनाई थीं। इन टीमों ने अभी तक जिले की 20 एकड़ गेहूं की फसल में इस बीमारी की पहचान कर ली है।

इन गांवों के किसानों की फसल में बीमारी
कृषि विभाग ने अभी तक बाबैन खंड के गांव मंगोली जाटान और संगौर, शाहबाद खंड के गांव खरींडवा और मोहनपुर, लाडवा के गांव धन्नौरा के खेतों में पीले रतुए की पहचान की है।

10 हजार एकड़ प्रभावित फसल के लिए दवाई का किया स्टॉक : वजीर सिंह
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि विभाग ने इस बीमारी से निपटने के लिए पूरी तैयारी की है। इसके तहत ही दो हजार लीटर दवाई का स्टॉक जिले के सभी खंडों पर किया गया है। इस दवा का स्प्रे 10 हजार एकड़ फसल पर किया जा सकता है।

किसानों को इस बीमारी के लक्षण पहचानने के साथ ही विभाग के साथ लगातार संपर्क करना चाहिए। किसान को हर रोज अपनी फसल की निगरानी करनी चाहिए। एक बार दवाई का असर न दिखे तो 15 दिन बाद दोबारा स्प्रे करना चाहिए।

ये किस्में हैं अधिक अतिसंवेदनशील
कृषि वैज्ञानिक डॉ. पी भटनागर और जेएन भाटिया के अनुसार गेहूं की पीबीडब्ल्यू 343, 373, 502, यूपी 2338, डब्ल्यूएच 711, एसआर 152, 172 और एस 11 किस्में इस बीमारी के प्रति अतिसंवेदनशील हैं। डब्ल्यूएच 1105, एचडी 3086 और पीडब्ल्यूडी 621-50 किस्मों में यह बीमारी कम आती है।

तीन हजार किसान ऑन लाईन
कृषि विभाग किसानों से लगातार संपर्क साध रहा है। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र ने भी तीन हजार किसानों से ऑन लाइन संपर्क में है।

हवा से बढ़ रही बीमारी
कृषि उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह और कृषि वैज्ञानिक डॉ. पी भटनागर ने बताया कि यह बीमारी हवा के रुख के साथ चलती है। इसके साथ ही यदि कोई किसान इस बीमारी के गेहूं के बीच जाकर दूसरे खेत में चला जाता है, तो भी यह बीमारी फैल जाती है।
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