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Kurukshetra News: शिक्षण संस्थानों में भीे होंगे गीता संवाद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2024 01:55 AM IST
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Geeta dialogues will also be held in educational institutions
कुरुक्षेत्र। गीता संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए विशेषज्ञ। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहली बार गीता संवाद में पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों के प्रचार-प्रसार को लेकर चिंतन किया गया। इसमें कुरुक्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों को लेकर गीता संवाद किए जाने लेकर मुख्य तौर पर चर्चा हुई।
पुरुषोत्तमपुरा बाग आरती स्थल पर हुए गीता संवाद का शुभारंभ कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सीईओ पंकज सेतिया, मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, केडीबी सदस्य अशोक रोशा, डॉ. ऋषिपाल मथाना, एमके मोदगिल, विजय नरुला, कैप्टन परमजीत सिंह, युद्घिष्ठर बहल ने किया।
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इसमें अंतरराष्ट्रीय मोटिवेटर एवं आयुर्वेदिक चिकित्सक डाॅ. मुकेश अग्रवाल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय गीता अध्ययन केंद्र के चेयरमैन डाॅ. आरके देसवाल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इंटरनेशनल सेमिनार के संयोजक प्रोफेसर तेजेंद्र शर्मा, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय मॉस कम्युनिकेशन विभाग के शिक्षक डाॅ. आबिद अली ने पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों का प्रचार-प्रसार करने पर चिंतन और मंथन किया।
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डाॅ. मुकेश अग्रवाल ने पवित्र ग्रंथ गीता के 700 श्लोकों और 700 कविताओं को लेकर पुस्तिका की रचना की गई है। उन्होंने श्लोकों और काव्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के परिपेक्ष्य में पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों को अपने जीवन में धारण करने की निहायत जरूरी है। इसलिए युवा पीढ़ी को फोकस रखकर पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों का प्रचार-प्रसार करना चाहिए।
चेयरमैन डाॅ. आरके देसवाल, प्रोफेसर तेजेंद्र शर्मा ने भी पवित्र ग्रंथ गीता के अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने पर बल देते हुए कहा कि देश की भावी पीढ़ी युवाओं तक पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों को पहुंचाना बहुत जरूरी है, क्योंकि आज के समय युवा पीढ़ी को संस्कृति और संस्कारों के साथ जोड़ना जरूरी है, यह तभी संभव हो सकता है, जब पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

इस गीता संवाद के अंत में केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने कहा कि आने वाले समय में प्रयास किया जाएगा कि शिक्षण संस्थानों में गीता संवाद जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए।
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