फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   For the first time in Dharmnagari, Nav Samvat New Year festival will be celebrated collectively on the banks of Brahma Sarovar

Kurukshetra News: धर्मनगरी में पहली बार सामूहिक रूप से ब्रह्मसरोवर तट पर मनेगा नव संवत नव वर्ष उत्सव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Mar 2025 01:38 AM IST
विज्ञापन
For the first time in Dharmnagari, Nav Samvat New Year festival will be celebrated collectively on the banks of Brahma Sarovar
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी के इतिहास में आज रविवार को एक और अध्याय जुड़ जाएगा। पहली बार सामूहिक रूप से नव संवत नव वर्ष के रूप में सायं 5:30 बजे पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर पुरुषोत्तमपुरा बाग में कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें 100 से ज्यादा धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। इस कार्यक्रम में सबसे पहले गीता ज्ञान संस्थानम केंद्र में जीओ गीता और धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के लोग पहुंचेंगे और यहां से ब्रह्मसरोवर पुरुषोत्तमपुरा बाग मेंं कीर्तन करते जाएंगे। कार्यक्रम की सभी तैयारी पूरी कर ली गई है।
विज्ञापन

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद शनिवार को गीता ज्ञान संस्थानम केंद्र के वैलनेस हेल्थ सेंटर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नव संवत सनातन स्वाभिमान जैसे पौराणिक कार्यक्रमों से धर्मनगरी को एक धाम के रूप में भी पहचान मिलेगी। इस गीता स्थली को कुरुक्षेत्र धाम की पहचान दिलवाने के लिए हर नागरिक के योगदान की जरूरत होगी। इस धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की सीमा में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को धर्मनगरी धाम की जय हो का उच्चारण करने का प्रयास करना चाहिए। इन तमाम प्रयास से ही कुरुक्षेत्र को एक धाम के रूप में विकसित करना चाहिए।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि ब्रह्मसरोवर पर सैकडोंं लोग मिलकर पवित्र ग्रंथ गीता का पाठ करेंंगे और महाआरती में शिरकत करेंगे। इस कार्यक्रम के साथ भजन कीर्तन का भी श्रद्धालु आनंद ले पाएंगे। इस कार्यक्रम की समाप्ति के बाद नागरिकों और श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया जाएगा। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समाजसेवी जितेंद्र ढ़ीगडा को संयोजक बनाया गया है और 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा भी अहम भूमिका अदा करेंगे। उन्होंने कहा कि जिओ गीता संस्थानम के परिसर में मंदिर, संग्रहालय, गुरुकुल के साथ-साथ अब जियो वैलनेस सेंटर व आचार्य मनीष के सहयोग से अब आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन



नव संवत को मनाने के प्राकृतिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण भी
गीता मनीषी ने कहा कि विश्व में कैलेंडर और परंपरा के अनुसार एक जनवरी को ही नया साल मनाया जाता है, लेकिन भारतीय संस्कृति का नव वर्ष नव संवत को ही मनाया जाता है। इस देश में नव संवत को नव वर्ष के रूप में मनाने के प्राकृतिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण भी है। इसलिए भारतीय संस्कृति के अनुसार नव संवत को नव वर्ष के रूप मेंं मनाना चाहिए। इस सनातन परंपरा को गीता स्थली कुरुक्षेत्र की पावन धरा से फिर से आगे बढ़ाने का काम किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed