{"_id":"5fa2fa328ebc3e9ba661cc88","slug":"fire-fighting-equipment-expired-in-ambulance-oxygen-machine-not-running-kurukshetra-news-knl49839920","type":"story","status":"publish","title_hn":"एंबुलेंस में एक साल से एक्सपायर पड़े अग्निशमन यंत्र, नहीं चल रही ऑक्सीजन मशीन,","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एंबुलेंस में एक साल से एक्सपायर पड़े अग्निशमन यंत्र, नहीं चल रही ऑक्सीजन मशीन,
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। एलएनजेवी अस्पताल की एंबुलेंस का दृश्य।
- फोटो : Kurukshetra
बिना रोक-टोक और बिना पूछताछ के सड़कों पर दौड़ रही स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस निर्धारित मानकों व नियमों पर खरी नहीं उतर रही। विभाग की एंबुलेंस नियमों को ताक पर रखकर सड़कों पर सरपट दौड़ रही हैं। हालात ये हैं कि स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस में पिछले एक साल से अग्निशमन यंत्र एक्सपायर पड़े हैं, जिनकी ओर किसी अधिकारियों और कर्मचारियों का ध्यान ही नहीं गया। यही नहीं कुछ एंबुलेंस में लगी ऑक्सीजन मशीनें बंद पड़ी हैं, जिलेभर में विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी 20 एंबुलेंस पर मात्र 33 ईएमटी है, जबकि होने चाहिए 60।
वैसे एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर की देख रेख व मरीज को ऑक्सीजन की सुविधा प्रदान करने की जिम्मेवारी ईएमटी को सौंपी गई है, लेकिन जिन एंबुलेंस पर ईएमटी उपलब्ध ही नहीं है और उन एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर तक की व्यवस्था नहीं है तो ऐसी स्थिति में जिम्मेदार कौन होगा? सवाल ये भी है कि खुदा ना खास्ता कोई दुर्घटना घट गई और एंबुलेंस में रखे एक्सपायर और खाली अग्निशमन यंत्रों से कैसे बचाव होगा? स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते छोटी सी चिंगारी मरीजों पर भारी पड़ सकती है। जब अमर उजाला की टीम ने अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस का निरीक्षण किया तो एंबुलेंस नंबर एचआर 65ए 8831 में ऑक्सीजन की मशीन खराब मिली और यहां रखा अग्नि शमन यंत्र खत्म मिला। इसके अलावा एंबुलेंस नंबर एचआर 65-8600 में अग्निशमन यंत्र गायब था और ऑक्सीजन का मात्र सिलिंडर रखा हुआ था। इनके अलावा भी अधिकतर एंबुलेंस में एक्सपायर अग्निशमन यंत्र रखे हुए थे, जो नवंबर 2018 में खरीदे गए थे। (संवाद)
हर तीन माह के बाद करें जांच, एक साल में कराए रिफिल : बहादुर सिंह
मुख्य अग्नि शामक बहादुर सिंह ने बताया कि हर अग्नि शमन यंत्र की हर तीसरे माह बाद जांच होनी चाहिए। वहीं, एक साल होने पर अग्नि शमन यंत्र की रिफिलिंग करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि सिलिंडर में डाले गए मोनो अमोनियम फास्फेट पाउडर को बाहर निकालकर उपकरण किया जाता है। बाद में इसमें नया पाउडर भरा जाता है। समय अवधि में उपकरण का उपयोग करते हैं तो ये अधिक गति से कार्य करता है। अगर यंत्र का कभी इस्तेमाल ही नहीं किया जाए तो पाउडर जम जाता है और हादसा होने पर यंत्र अनुपयोगी साबित होता है। समयावधि खत्म होने पर इसकी कार्य क्षमता खत्म हो जाती है। इसीलिए समय-समय पर इन यंत्रों का टेस्ट करवाना आवश्यक है। यदि जांच नहीं होती है तो हादसे के समय यंत्र कार्य करें या न करे इसकी कोई गारंटी नहीं है।
विज्ञापन
सूचना मिलते ही लिया संज्ञान, शीघ्र ही रिफिल कराए जाएंगे अग्निशमन यंत्र : डॉ. रमेश सभ्रवाल
मामला संज्ञान में आने के तत्काल बाद ही उप सिविल सर्जन (एनएचएम) डॉ. रमेश सभ्रवाल ने संज्ञान लेते हुए तत्काल एफएम को एंबुलेंस में रखे सभी अग्निशमन यंत्रों को रिफिल कराने के निर्देश दिये हैं और जिस एंबुलेंस में ऑक्सीजन की सुविधा नहीं, उन सभी खामियों को दूर करने के निर्देश दिये हैं। डॉ. सभ्रवाल का कहना है कि शुक्रवार तक सभी खामियों को दूर किया जाएगा।
विज्ञापन
वैसे एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर की देख रेख व मरीज को ऑक्सीजन की सुविधा प्रदान करने की जिम्मेवारी ईएमटी को सौंपी गई है, लेकिन जिन एंबुलेंस पर ईएमटी उपलब्ध ही नहीं है और उन एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर तक की व्यवस्था नहीं है तो ऐसी स्थिति में जिम्मेदार कौन होगा? सवाल ये भी है कि खुदा ना खास्ता कोई दुर्घटना घट गई और एंबुलेंस में रखे एक्सपायर और खाली अग्निशमन यंत्रों से कैसे बचाव होगा? स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते छोटी सी चिंगारी मरीजों पर भारी पड़ सकती है। जब अमर उजाला की टीम ने अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस का निरीक्षण किया तो एंबुलेंस नंबर एचआर 65ए 8831 में ऑक्सीजन की मशीन खराब मिली और यहां रखा अग्नि शमन यंत्र खत्म मिला। इसके अलावा एंबुलेंस नंबर एचआर 65-8600 में अग्निशमन यंत्र गायब था और ऑक्सीजन का मात्र सिलिंडर रखा हुआ था। इनके अलावा भी अधिकतर एंबुलेंस में एक्सपायर अग्निशमन यंत्र रखे हुए थे, जो नवंबर 2018 में खरीदे गए थे। (संवाद)
विज्ञापन
हर तीन माह के बाद करें जांच, एक साल में कराए रिफिल : बहादुर सिंह
मुख्य अग्नि शामक बहादुर सिंह ने बताया कि हर अग्नि शमन यंत्र की हर तीसरे माह बाद जांच होनी चाहिए। वहीं, एक साल होने पर अग्नि शमन यंत्र की रिफिलिंग करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि सिलिंडर में डाले गए मोनो अमोनियम फास्फेट पाउडर को बाहर निकालकर उपकरण किया जाता है। बाद में इसमें नया पाउडर भरा जाता है। समय अवधि में उपकरण का उपयोग करते हैं तो ये अधिक गति से कार्य करता है। अगर यंत्र का कभी इस्तेमाल ही नहीं किया जाए तो पाउडर जम जाता है और हादसा होने पर यंत्र अनुपयोगी साबित होता है। समयावधि खत्म होने पर इसकी कार्य क्षमता खत्म हो जाती है। इसीलिए समय-समय पर इन यंत्रों का टेस्ट करवाना आवश्यक है। यदि जांच नहीं होती है तो हादसे के समय यंत्र कार्य करें या न करे इसकी कोई गारंटी नहीं है।
विज्ञापन
सूचना मिलते ही लिया संज्ञान, शीघ्र ही रिफिल कराए जाएंगे अग्निशमन यंत्र : डॉ. रमेश सभ्रवाल
मामला संज्ञान में आने के तत्काल बाद ही उप सिविल सर्जन (एनएचएम) डॉ. रमेश सभ्रवाल ने संज्ञान लेते हुए तत्काल एफएम को एंबुलेंस में रखे सभी अग्निशमन यंत्रों को रिफिल कराने के निर्देश दिये हैं और जिस एंबुलेंस में ऑक्सीजन की सुविधा नहीं, उन सभी खामियों को दूर करने के निर्देश दिये हैं। डॉ. सभ्रवाल का कहना है कि शुक्रवार तक सभी खामियों को दूर किया जाएगा।