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धान की खरीद और उठान न होने से किसान परेशान : रणदीप सुरजेवाला
Sun, 28 Sep 2025 10:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 28 Sep 2025 10:22 AM IST
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कुरुक्षेत्र/पिपली। भाजपा की सरकार ने किसान से लेकर आढ़ती वह मजदूर से लेकर राइस मिलर्स तक लावारिस छोड़ दिए हैं। न तो अनाज मंडियों में धान की खरीद हो रही और नहीं उठान हो रहा है। किसान व अन्य वर्ग अपने आप को असहाय महसूस कर रहे हैं। नवरात्रों के बीच किसान सरेआम लुट रहे हैं। यह कहना है भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला का।
वे शनिवार को थानेसर, पिपली अनाजमंडियों का दौरा करने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि पहले ही मौसम की मार के कारण धान की निकासी बेहद कम रह गई है और अब जो धान बचा है उसे भी खरीदने वाला कोई नहीं है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने ऐलान किया था कि धान की खरीद 3100 रुपये प्रति क्विंटल की जाएगी लेकिन हकीकत कोसों दूर है। नमी बताकर किसानों को लूटा जा रहा है। 2369 के एमएसपी से भी कम रेट पर किसान धान बेचने को मजबूर है। सरकार न तो धान की खरीद और न हीं उठान की उचित व्यवस्था कर पाई है। उन्होंने कहा कि दक्षिणी हरियाणा में बाजरा उत्पादक किसानों के साथ भी इसी तरह शोषण हो रहा है लेकिन प्रदेश सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा। हर वर्ग को सरकार ने अपने हाल पर छोड़ दिया है। किसान कईं- कई दिनों तक मंडियों में पहरेदारी करने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में वे जाएं तो कहां जाएं। किसानों के लिए इससे ज्यादा बुरे दिन नहीं हो सकते। प्रदेश के अन्य जिले तो छोड़ सीएम सिटी में भी किसानों व उनके धान की बेकद्री हो रही है।
मंडियों में पड़ा पांच लाख मीट्रिक टन धान : सुरजेवाला ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले नायब सैनी ने बड़े-बड़े जुमले छोड़े कि धान का एक-एक दाना खरीदेंगे। हकीकत में 10 जिलों की मंडियों में पांच लाख मीट्रिक टन धान पड़ा सड़ रहा है। छह जिलों में तो खरीद शुरू ही नहीं हुई, और बाकी जगहों पर एमएसपी पर खरीद न के बराबर। जमीन का खर्च 82 000 रुपये प्रति एकड़, लेकिन धान से किसान को 40,000 रुपये भी नहीं मिल रहा। संवाद
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वे शनिवार को थानेसर, पिपली अनाजमंडियों का दौरा करने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि पहले ही मौसम की मार के कारण धान की निकासी बेहद कम रह गई है और अब जो धान बचा है उसे भी खरीदने वाला कोई नहीं है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने ऐलान किया था कि धान की खरीद 3100 रुपये प्रति क्विंटल की जाएगी लेकिन हकीकत कोसों दूर है। नमी बताकर किसानों को लूटा जा रहा है। 2369 के एमएसपी से भी कम रेट पर किसान धान बेचने को मजबूर है। सरकार न तो धान की खरीद और न हीं उठान की उचित व्यवस्था कर पाई है। उन्होंने कहा कि दक्षिणी हरियाणा में बाजरा उत्पादक किसानों के साथ भी इसी तरह शोषण हो रहा है लेकिन प्रदेश सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा। हर वर्ग को सरकार ने अपने हाल पर छोड़ दिया है। किसान कईं- कई दिनों तक मंडियों में पहरेदारी करने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में वे जाएं तो कहां जाएं। किसानों के लिए इससे ज्यादा बुरे दिन नहीं हो सकते। प्रदेश के अन्य जिले तो छोड़ सीएम सिटी में भी किसानों व उनके धान की बेकद्री हो रही है।
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मंडियों में पड़ा पांच लाख मीट्रिक टन धान : सुरजेवाला ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले नायब सैनी ने बड़े-बड़े जुमले छोड़े कि धान का एक-एक दाना खरीदेंगे। हकीकत में 10 जिलों की मंडियों में पांच लाख मीट्रिक टन धान पड़ा सड़ रहा है। छह जिलों में तो खरीद शुरू ही नहीं हुई, और बाकी जगहों पर एमएसपी पर खरीद न के बराबर। जमीन का खर्च 82 000 रुपये प्रति एकड़, लेकिन धान से किसान को 40,000 रुपये भी नहीं मिल रहा। संवाद
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