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Haryana: ट्रेड डील के खिलाफ SKM का एलान: 9 मार्च को जंतर-मंतर पर किसान-मजदूर संसद, बरनाला में होगी महापंचायत
Tue, 24 Feb 2026 08:57 PM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 24 Feb 2026 08:57 PM IST
सार
एसकेएम बुधवार से ही 9 मार्च तक अपने आंदोलन को गांव तक पहुंचाने के लिए गांवों में जाकर जनसभाओं का आयोजन करेगा।
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संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक
- फोटो : संवाद
विस्तार
संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन को तेज करने के लिए संसद के ग्रीष्मकाल सत्र के पहले दिन यानी 9 मार्च को जंतर-मंतर पर किसान-मजदूर संसद चलाने का एलान किया है। 10 मार्च से पंजाब के बरनाला में किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। वहीं से जलियांवाला बाग हत्याकांड की बरसी 13 अप्रैल तक अलग-अलग राज्यों में होने वाली महापंचायतों का एलान किया जाएगा। इन महापंचायतों में किसानों को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और सरकार की अन्य कॉरपोरेट-समर्थक नीतियों के खतरों को समझाया जाएगा और भविष्य के लंबे संघर्ष की तैयारी की जाएगी।
मंगलवार को जाट धर्मशाला में राष्ट्रीय परिषद की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें एसकेएम ने निर्णय लिया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का दबाव डालने के साथ अपनी लंबित मांगे पूरी करने के लिए एसकेएम से जुड़े किसान संगठन अपने स्वतंत्र आंदोलन के साथ संयुक्त रूप से आंदोलन को तेज करेंगे। 23 मार्च शहीद दिवस को देशभर में साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा जिसके लिए विस्तृत कार्यक्रम राज्य स्तर पर तय किए जाएंगे।
एसकेएम बुधवार से ही 9 मार्च तक अपने आंदोलन को गांव तक पहुंचाने के लिए गांवों में जाकर जनसभाओं का आयोजन करेगा। इन आयोजनों में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बर्खास्त करने, प्रधानमंत्री को राष्ट्रविरोधी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश देने और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को गेहूं और धान किसानों के बोनस को समाप्त करने वाले डीओ पत्र को वापस लेने का निर्देश देने की मांग की जाएगी। राष्ट्रपति के नाम खुले पत्र लिखकर आयोजन स्थल से गांव के डाकघरों तक जुलूस निकालकर भेजें जाएंगे।
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वहीं 27 फरवरी या उसके बाद एसकेएम के प्रतिनिधिमंडल संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मिलकर केंद्र सरकार की ओर से सत्ता के केंद्रीकरण का विरोध करने, राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा करने, संसद से जीएसटी अधिनियम में संशोधन कर राज्यों की कराधान शक्ति बहाल करने और विभाज्य कर पूल में राज्यों की हिस्सेदारी वर्तमान में 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की मांग की जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता सात सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने की जिसमें जोगिंदर सिंह उग्राहां, राकेश टिकैत, डॉ. अशोक धवले, आशीष मित्तल, जगमोहन सिंह, राजन क्षीरसागर और जोगिंदर सिंह नैन शामिल रहे। पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और केरल सहित नौ राज्यों से 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया।
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मंगलवार को जाट धर्मशाला में राष्ट्रीय परिषद की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें एसकेएम ने निर्णय लिया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का दबाव डालने के साथ अपनी लंबित मांगे पूरी करने के लिए एसकेएम से जुड़े किसान संगठन अपने स्वतंत्र आंदोलन के साथ संयुक्त रूप से आंदोलन को तेज करेंगे। 23 मार्च शहीद दिवस को देशभर में साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा जिसके लिए विस्तृत कार्यक्रम राज्य स्तर पर तय किए जाएंगे।
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एसकेएम बुधवार से ही 9 मार्च तक अपने आंदोलन को गांव तक पहुंचाने के लिए गांवों में जाकर जनसभाओं का आयोजन करेगा। इन आयोजनों में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बर्खास्त करने, प्रधानमंत्री को राष्ट्रविरोधी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश देने और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को गेहूं और धान किसानों के बोनस को समाप्त करने वाले डीओ पत्र को वापस लेने का निर्देश देने की मांग की जाएगी। राष्ट्रपति के नाम खुले पत्र लिखकर आयोजन स्थल से गांव के डाकघरों तक जुलूस निकालकर भेजें जाएंगे।
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वहीं 27 फरवरी या उसके बाद एसकेएम के प्रतिनिधिमंडल संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मिलकर केंद्र सरकार की ओर से सत्ता के केंद्रीकरण का विरोध करने, राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा करने, संसद से जीएसटी अधिनियम में संशोधन कर राज्यों की कराधान शक्ति बहाल करने और विभाज्य कर पूल में राज्यों की हिस्सेदारी वर्तमान में 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की मांग की जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता सात सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने की जिसमें जोगिंदर सिंह उग्राहां, राकेश टिकैत, डॉ. अशोक धवले, आशीष मित्तल, जगमोहन सिंह, राजन क्षीरसागर और जोगिंदर सिंह नैन शामिल रहे। पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और केरल सहित नौ राज्यों से 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया।
सुप्रीम कोर्ट की चिट्ठी का जवाब देने के लिए समिति का गठन
बैठक में एसकेएम को सुप्रीम कोर्ट की ओर मिली चिट्ठी का जवाब तैयार करने के लिए 15 सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाएगा। कमेटी व अन्य किसान संगठनों से बातचीत करके सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति को किसानों की समस्या समझाते हुए उन्हें हल करने का रास्ते सुझाएगा। साथ ही एसकेएम गैर राजनीतिक की ओर से मिले पत्र पर चर्चा की गई और उनसे वार्ता के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। इस समिति में जोगिंदर सिंह उग्राहां, युधवीर सिंह, पी. कृष्णप्रसाद, रामिंदर सिंह पटियाला और बलदेव सिंह निहालगढ़ शामिल होंगे।
पड़ोसी देशों के साथ संबंध बिगड़ने का नतीजा ट्रेड डील : एसकेएम
पत्रकार वार्ता में एसकेएम नेताओं ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते बिगाड़ने के कारण ही देश के किसानों पर यह ट्रेड डील थोपी जा रही है। कभी रूस हमारा सबसे अच्छा मित्र था लेकिन अमेरिका के दबाव में आकर रूस से सस्ता तेल खरीदना छोड़कर महंगे दामों पर तेल खरीदा जा रहा है। इस ट्रेड डील से देश का सेब व कपास का किसान बुरी तरह प्रभावित होगा। साथ ही टर्की की तरह देश से पशुधन समाप्त हो जाएगा।
देश के नामी नेता व उद्योगपति एपस्टीन के पास जाते थे टीका लगवाने : राकेश टिकैत
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि देश के बड़े नामी नेता व उद्योगपति जेफरी एपस्टीन के पास सेक्सुअल हरासमेंट के लिए नहीं बल्कि जवान रहने के लिए किशोरों के खून का इंजेक्शन लगवाने जाते थे। सरकार के आधे से ज्यादा नेता बुढ़ापे में भी जवान बने हुए हैं। ये सब एपस्टीन के पास जाते थे। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह ट्रेड डील भी शायद इसी दबाव में की गई हो।
बैठक में एसकेएम को सुप्रीम कोर्ट की ओर मिली चिट्ठी का जवाब तैयार करने के लिए 15 सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाएगा। कमेटी व अन्य किसान संगठनों से बातचीत करके सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति को किसानों की समस्या समझाते हुए उन्हें हल करने का रास्ते सुझाएगा। साथ ही एसकेएम गैर राजनीतिक की ओर से मिले पत्र पर चर्चा की गई और उनसे वार्ता के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। इस समिति में जोगिंदर सिंह उग्राहां, युधवीर सिंह, पी. कृष्णप्रसाद, रामिंदर सिंह पटियाला और बलदेव सिंह निहालगढ़ शामिल होंगे।
पड़ोसी देशों के साथ संबंध बिगड़ने का नतीजा ट्रेड डील : एसकेएम
पत्रकार वार्ता में एसकेएम नेताओं ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते बिगाड़ने के कारण ही देश के किसानों पर यह ट्रेड डील थोपी जा रही है। कभी रूस हमारा सबसे अच्छा मित्र था लेकिन अमेरिका के दबाव में आकर रूस से सस्ता तेल खरीदना छोड़कर महंगे दामों पर तेल खरीदा जा रहा है। इस ट्रेड डील से देश का सेब व कपास का किसान बुरी तरह प्रभावित होगा। साथ ही टर्की की तरह देश से पशुधन समाप्त हो जाएगा।
देश के नामी नेता व उद्योगपति एपस्टीन के पास जाते थे टीका लगवाने : राकेश टिकैत
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि देश के बड़े नामी नेता व उद्योगपति जेफरी एपस्टीन के पास सेक्सुअल हरासमेंट के लिए नहीं बल्कि जवान रहने के लिए किशोरों के खून का इंजेक्शन लगवाने जाते थे। सरकार के आधे से ज्यादा नेता बुढ़ापे में भी जवान बने हुए हैं। ये सब एपस्टीन के पास जाते थे। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह ट्रेड डील भी शायद इसी दबाव में की गई हो।