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अपेक्षा हर लक्ष्य में बाधक : मुरारी बापू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Nov 2022 08:30 AM IST
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Expectation hinders every goal: Murari Bapu, Kurukshetra
श्रीराम कथा सुनाते मुरारी बापू। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। रामचरित सत्य है, भागवत प्रेम की कथा है और गीता कृष्ण की करुणा है। यह कहना है संत मुरारी बापू का। वे अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद के सानिध्य में जीओ गीता की ओर से आयोजित श्रीराम कथा मानस गीता के चौथे दिन व्यासपीठ से अमृत वर्षा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिसका मोह नष्ट हो जाए उसे जीवन में कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। शास्त्र को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्र का अपमान श्रद्धा का अपमान है। कथा के शुभारंभ से पूर्व श्री राम कथा मानस गीता के मुख्य संयोजक प्रदीप मित्तल, संरक्षक डा. सुदर्शन अग्रवाल, अशोक चावला, विभु पालीवाल, राजेश पजनी एवं विजय नरूला ने कथा में पधारे संतो एवं अतिथियों का स्वागत किया। शुकतीर्थ से पधारे स्वामी केशवानंद महाराज, स्वामी गीतानंद महाराज, स्वामी दयानंद महाराज, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री मिलिंद एस परांदे एवं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक विजय कुमार ने व्यासपीठ पर विराजमान मुरारी बापू को पुष्प भेंट किए।
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मुरारी बापू ने कहा कि जीवन में अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। अपेक्षा हर लक्ष्य में बाधक है। मानव को अपने लक्ष्य के लिए अपेक्षा से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी व्याख्या केवल मार्गदर्शन करती है। उद्धार तो आपका अनुभव ही करेगा। अगर ज्ञान लेने वाला व्यक्ति सही नहीं होगा तो वह कुछ प्राप्त नहीं कर सकता। भगवान कृष्ण को 700 श्लोक कहने के बाद इस सृष्टि को बोलना पड़ा मेरी शरण में आ जाओ, लोगों ने इस पर आपत्ति भी जताई कि कृष्ण अहंकार में बोल रहे हैं कि मेरी शरण में आओ, मैं ही तुम्हारा उद्धार करूंगा। मानस गीता में ऐसा नहीं हुआ। लक्ष्मण इसलिए पहले ही राम की शरण में आ गए कि कोई मेरे प्रभु पर अंगुली न उठाए।
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उन्होंने इसी दौरान पंक्तियां कही कि कितनी सदियां बीत गई हाय तुझे समझाने में। उन्होंने कहा कि जब तक पात्र खाली नहीं होगा तब तक उसमें कुछ डलने वाला नहीं है। इसलिए स्वयं को खाली करके ही कुछ सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब मानस पर भी लिखा जाने लगा है। बापू ने कहा कि मानस पर तो आना ही पड़ेगा। मानस हृदय है कब तक बुद्धि पर रहोगे मानस पर तो आना ही पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि बुद्धि प्रभाववादी है, तुरंत किसी के प्रभाव में आ जाती है। किसी वक्ता की वाणी के प्रभाव से ज्यादा प्रभावित नहीं होना चाहिए। उससे प्रेरणा लेनी चाहिए। मगर मन अभाववादी है और जिसका अंत:करण ठीक हो गया, उसके पीछे शास्त्र आशीर्वाद देने के लिए पीछे-पीछे जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस भी साधक के जीवन में जप और भजन से उसकी उपासना से दो घटनाएं घटती हैं। एक तो मोह गया और दूसरा बोध हो गया। मोह भंग होगा तो बोध की प्राप्ति होगी।

यह दोनों जिसके जीवन में घटता है उसको कोई प्रमाण में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। नित्यप्रति की भांति श्री राम कथा से पूर्व महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने भी अपने प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को सराबोर किया। इस अवसर पर विद्या भारती से बाल कृष्ण, भारत भूषण कपूर, प्रदीप सैनी, अनुभव अग्रवाल, भोला सभरवाल, सुनील वत्स, राजू भट्ट, जगदीश तनेजा, पवन शर्मा, भूपेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।
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