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कलयुग में ज्ञान, भक्ति व कर्म योग का बराबर महत्व : मुरारी बापू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Nov 2022 08:30 AM IST
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Equal importance of knowledge, devotion and karma yoga in Kalyug: Murari Bapu, Kurukshetra
श्रीराम कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। कलयुग में गीता के ज्ञान योग, भक्ति योग और कर्म योग तीनों का बराबर का महत्व है, लेकिन अपनी रुचि के अनुसार सहज योग सबसे महत्वपूर्ण है। सहज योग आज की जरूरत भी है। किसी भी युग को अपनाने से पूर्व सहजता से या तो आत्मचिंतन से निर्णय करें अथवा अपने गुरु के चरणों में बैठकर वहां से निर्णय प्राप्त करें। यह प्रवचन संत मुरारी बापू ने दिए।
गीता ज्ञान संस्थानम के तत्वाधान में आयोजित श्रीराम कथा में मुरारी बापू ने कहा कि किसी बुद्ध पुरुष के चरणों में समर्पित हो जाने से स्मृति खुद जग जाएगी। उन्होंने कहा कि वैसे तो स्मृति का ज्यादा वर्णन करना मुश्किल है, लेकिन सुमिरन करने से स्मृति जगती है। जब तक सुमिरन भजन न किया जाए तब तक स्मरण भी नहीं कर सकते।
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बापू ने कहा कि जहां पहुंचने के बाद कोई उहापोह न रहे हमें वहां पहुंचना है। पद पर संवाद करते हुए मुरारी बापू ने बोला कि व्यक्ति के जीवन में सबसे ऊंचा पद मातृ पद कहा गया है। जो शीतलता मां के आंचल में मिलती है, वह हिमालय में भी नहीं मिलती। तत्पश्चात पितृ पद और उसके बाद पति पद जो कि मन, वचन और कर्म से पति को समर्पित है।
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उन्होंने कहा कि राज पद में खतरा रहता है। राज पद में मद न आए यह केवल गुरु कृपा से होता है। इसके पश्चात मुरारी बापू ने प्रभु पद और विप्र पद पर विस्तार से चर्चा करते हुए गुरु पद को सभी पदों से ऊपर बताया। उन्होंने कहा कि गुरु पद से ऊपर कोई पद नहीं होता। सेवा सबकी करो, लेकिन सुमिरन केवल गुरु का ही करो। मुरारी बापू के अनुसार गुरु के घर का पिया हुआ पानी गंगाजल की भांति होता है।
व्यासपीठ से बरस रहा प्रेम मानस गीता का दिव्य भाव : स्वामी ज्ञानानंद
श्रीराम कथा मानस गीता के शुभारंभ अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि श्रीराम कथा मानस गीता में जहां एक और मानस व गीता के समन्वय में प्रेम की रसधारा प्रवाहित हो रही है, वहीं प्रतिदिन अनेक संप्रदायों एवं परंपराओं से संतों का आगमन एवं यहां पूरा समय उनकी सहज उपस्थिति समरसता के दिव्य अभाव को दर्शाती है। श्री राम कथा सद्भावना की कथा है और वर्तमान में सद्भावना सबसे बड़ी आवश्यकता है। गीता मनीषी ने कहा कि मन में प्रेम और सद्भावना नहीं है तो शांति भी कभी नहीं होगी। व्यासपीठ से जो प्रेम बरस रहा है, वह मानस और गीता की दिव्यता का पावन भाव है।

मुरारी बापू ने किया जीओ गीता संग्रहालय का अवलोकन
संत मुरारी बापू ने शनिवार को जीओ गीता संग्रहालय का अवलोकन किया। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने संग्रहालय में स्वयं उपस्थित रहकर मुरारी बापू को संग्रहालय से संबंधित समस्त जानकारी दी। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानव सचिव मदन मोहन छाबड़ा व उपेंद्र सिंघल ने जीओ गीता संग्रहालय में विराजित अनेक श्रीमद्भगवद्गीता एवं गीता से संबंधित चिंतकों एवं महापुरुषों की स्मृतियां बापू से सांझा की। उन्होंने संग्रहालय में प्रोजेक्टर के माध्यम से भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप शो को भी देखा। उन्होंने जीओ गीता संग्रहालय के अवलोकन को अद्भुत बताया एवं विजिटर बुक में अपने विचार भी लिखे।

 श्रीराम कथा में प्रवचन देते मुरारी बापू। संवाद

श्रीराम कथा में प्रवचन देते मुरारी बापू। संवाद- फोटो : Kurukshetra

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