फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   education, KU

ईसी के मेंबर डॉ. अनिल गुप्ता की तल्ख प्रतिक्रिया से केयू प्रशासन कटघरे में

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2020 01:36 AM IST
विज्ञापन
education, KU
यहां एक्शन तो होता नहीं और जो भ्रष्टाचार कर रहे हैं, उनके हाथ बहुत लंबे हैं...ये टीस दो बार केयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष रहे और एक साल पहले केयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी पद से इस्तीफा दे चुके यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव कौंसिल के मेंबर डॉ.अनिल गुप्ता ने सोशल मीडिया पर जताई है। बता दें कि अमर उजाला में प्रकाशित शिमला गेस्ट हाऊस के बेडशीट एवं अन्य मैटीरियल घोटाले की खबर पर उनकी ये प्रतिक्रिया केयू प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। वहीं जानकारी मिली है कि बेडशीट प्रकरण के सुर्खियों में आने के बाद संबंधित अधिकारी से केयू प्रशासन ने स्पष्टीकरण मांग लिया है।
विज्ञापन

बहरहाल बड़ा सवाल यही है कि शिमला स्थित कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस के लिये खरीदी गई 80 में से 40 बेडशीट सहित अन्य सामग्री करीब एक साल तक कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में किस
विज्ञापन

इरादे से रखी रही ? ये सामान हिमाचल भेजे जाने की बजाये केयू में क्यों रखा गया था तो संज्ञान में क्यों नहीं लाया गया ? उपरोक्त मामला उजागर होने के बाद यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि उक्त मामले में केयू प्रशासन ने संबंधित अधिकारी से शुक्रवार को स्पष्टीकरण मांगा है। उधर केयू प्रवक्ता डॉ. दीपक राय बब्बर ने किसी भी तरह के घोटाले की बात से इंकार किया है। उनके मुताबिक सामान कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में ही रखा है। उन्होंने यह भी बताया कि जितने सामान की आवश्यकता शिमला गेस्ट हाउस में होती है, वहां उतना सामान भेजा जाता है। हालांकि परचेज कमेटी द्वारा शिमला गेस्ट हाउस के लिये खरीदे गये छह बेड में से केवल चार बेड ही हिमाचल भेजे गये थे, जबकि अन्य दो बेड उसी फर्नीचर यूनिट में करीब छह माह तक पड़े रहे, जहां से यह खरीदे गये थे, ऐसा क्यों हुआ ? इसका जवाब केयू प्रशासन के उच्चाधिकारी और प्रवक्ता ने अभी तक नहीं दिया है। डॉ. अनिल गुप्ता की प्रतिक्रिया के साथ केयू में इस समय चर्चा यही है कि पिछले कुछ माह में कई ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी हुई, जिनकी भूमिका या तो सवालों के घेरे में है या फिर किसी ना किसी गंभीर मामले के चलते उनकी जांच चल रही है। संभवत: डा. अनिल गुप्ता की प्रतिक्रिया में ऐसे ही लोग निशाने पर थे और उन्होंने यहां तक लिख दिया कि यहां भ्रष्टाचार करने वालों पर एक्शन नहीं होता, क्योंकि इनके हाथ बहुत लंबे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

बाक्स
यों आया सामने आया प्रकरण
केयू जनरल ब्रांच की एक चिट्ठी के जरिये यह प्रकरण सामने आया है। इस चिट्ठी में गुपचुप ढंग से केयू के माल को गोल करने का अंदेशा जताया गया है। साध ही इस चिट्ठी से यह भी स्पष्ट होता है कि शिमला गेस्ट हाऊस के लिये उक्त जिस सामान की खरीद हुई थी, उसे एक साल तक दबाये रखा। इसलिये केयू की जनरल ब्रांच ने उक्त चिट्ठी कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को भेजी गई थी। इसी के माध्यम से रजिस्ट्रार आफिस को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराते हुए जांच कराने बारे लिखा गया।
बाक्स
ये भी दिया जा रहा है तर्क
केयू की परचेज कमेटी ने कुरुक्षेत्र की जिस फर्म से छह बेड खरीदे गये थे,वहां से चार बेड तो
शिमला स्थित कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस पहुंच चुके हैं,जबकि दो को इसी फर्म पर छोड़ दिया गया था और यहां यह बेड करीब छह माह से ज्यादा समय तक पड़े रहे। डैमेज कंट्रोल के

साथ अब तर्क ये दिया जा रहा है संभव है कि यह बेड इसलिये यहां छोड़े गये हैं कि इन्हें बाद में भिजवा दिया जाएगा। मगर सवाल यह उठ रहे है कि जब अन्य सामान वहां पहुंचाया गया था तो यह सामान यहीं क्यों छोड़ा गया। दूसरे तर्क के साथ संभावना जताते हुए यह भी कहा जा रहा है कि हो सकता है कि पेमेंट ना की गई हो, इसलिए ये बेड यहीं छोड़ दिये गये हों।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed