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Kurukshetra News: प्राकृतिक खेती के आइकॉन बने डॉ. हरिओम को मिला पद्मश्री पुरस्कार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Apr 2024 07:08 AM IST
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Dr. Hariom, who became the icon of natural farming, received Padmashree award.
कुरुक्षेत्र। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्राकृतिक खेती मॉडल के राज्य समन्वयक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरिओम को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा है, जिससे खुशी की लहर दौड़ गई है। प्राकृतिक खेती के आइकॉन बन चुके डॉ. हरिओम को गत दिवस यह पुरस्कार प्रदान किया गया, जिसे डॉ. हरिओम ने किसानों के नाम किया। इस पुरस्कार के लिए गणतंत्र दिवस पर उनके नाम की घोषणा की गई थी, जिसके बाद से ही उनके परिवार के साथ-साथ पूरी धर्मनगरी में खुशी की लहर है। अब पुरस्कार लेकर लौटे तो उन्हें फिर बधाई देने वालों का तांता लग गया।
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उन्हें यह पुरस्कार साइंस एंड इंजीनियरिंग में नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देने व चार हजार से ज्यादा गांवों के किसानों को प्रशिक्षण दिए जाने के चलते दिया गया है। जिस पर उन्होंने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का आभार जताया है। उनका कहना है कि यह पुरस्कार देकर केंद्र सरकार ने उन्हें प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने को लेकर बड़ी चुनौती भी दी है और वे भरसक प्रयास करेंगे कि इस खेती को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दे सकें।
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एचएयू में रह चुके प्रमुख कृषि वैज्ञानिक
डॉ. हरिओम चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के अंतर्गत स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में प्रमुख वैज्ञानिक के तौर पर कार्यरत रह चुके हैं, उन्होंने कैथल कुरुक्षेत्र के अलावा भी कई जगह अपनी सेवाएं दी हैं और सेवानिवृत्ति के बाद पिछले कई वर्षों से आचार्य देवव्रत के प्राकृतिक खेती मॉडल को बढ़ावा देने में लगे हैं।
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जीवन बचाना है तो प्राकृतिक खेती जरूरी : डॉ. हरिओम
डॉ. हरिओम ने चर्चा करते हुए बताया कि अगर हमें अपना व आने वाली पीढि़यों का जीवन बचाना है तो प्राकृतिक खेती अपनानी ही होगी। इसके जरिए न केवल हम अपनी बल्कि जमीन व जीव जंतुओं का स्वास्थ्य भी बेहतर बना सकते हैं। शून्य लागत प्राकृतिक खेती के जरिए किसान की आमदनी भी बढ़ाई जा सकती है तो वहीं प्राकृतिक आपदाओं से भी किसी हद तक अवश्य बचा जा सकता है।
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