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Kurukshetra News: डॉ. आनंद फोटोग्राफी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित
Fri, 08 Aug 2025 03:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 08 Aug 2025 03:26 AM IST
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कुरुक्षेत्र। डॉ. आनंद जायसवाल की उपलब्धि पर प्रोत्साहित करते कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा व अन्य
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग के शिक्षक डॉ. आनंद जायसवाल को ललित कला अकादमी, नई दिल्ली और संस्कृति मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें 5 अगस्त को आयोजित 64वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से केंद्रीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से सम्मानित किया गया। उनके साथ संस्कृति मंत्रालय, केंद्र सरकार के सचिव विवेक अग्रवाल, अपर सचिव अमिता प्रसाद सारभाई, ललित कला अकादमी के वाइस चेयरमैन डॉ. नंद लाल ठाकुर भी शामिल रहे।
इस उपलब्धि पर वीरवार को कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने डॉ. आनंद जायसवाल को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि डॉ. आनंद हरियाणा के वो कलाकार हैं, जिन्हें इस वर्ष यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है। कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल, ललित कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरचरण सिंह व विभाग के शिक्षकों ने भी डॉ. आनंद की उपलब्धि पर बधाई दी।
डॉ. आनंद ने बताया कि राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में 5922 आवेदक थे जिनमें से 283 कलाकारों का प्रदर्शनी के लिए चयन किया गया और 20 कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है। प्रदेश से केवल उन्हें इस वर्ष 2025 के लिए उनकी रचना वृत्त की पहेली सुलझाने के लिए पुरस्कृत किया गया है। इस मौके पर पर डीन प्रो. कृष्णा देवी, लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, डॉ. पवन कुमार, डॉ. मोनिका, डॉ. जया सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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डॉ. आनंद जायसवाल की रचना वृत्त की पहेली सुलझाना
डॉ. आनंद जायसवाल ने बताया कि उनकी रचित सॉल्विंग द पजल ऑफ सर्कल्स एक दृश्यात्मक रूप से प्रभावशाली, किंतु गहन रूप से व्यंग्यात्मक रचना है जो औद्योगिक रूपों की व्यवस्थित सुंदरता और मानवीय कष्टों की कठोर वास्तविकता के बीच का अंतर दर्शाती है। नीले, हरे और काले रंग के करीने से रखे ड्रम, बार-बार दोहराए जाने वाले वृत्तों का एक मनमोहक जाल बनाते हैं, जो सटीकता, एकरूपता और नियंत्रण का संकेत देते हैं लेकिन इस व्यवस्थित पृष्ठभूमि के सामने एक नंगे पांव मजदूर खड़ा है, जो एक बैरल पर झुका हुआ है, जो शहरी गरीबों के मौन संघर्ष का प्रतीक है। यह चित्र विस्थापन, गरीबी और आधुनिक प्रगति की मशीनरी में शारीरिक श्रम की अदृश्यता की बात करता है।
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इस उपलब्धि पर वीरवार को कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने डॉ. आनंद जायसवाल को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि डॉ. आनंद हरियाणा के वो कलाकार हैं, जिन्हें इस वर्ष यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है। कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल, ललित कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरचरण सिंह व विभाग के शिक्षकों ने भी डॉ. आनंद की उपलब्धि पर बधाई दी।
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डॉ. आनंद ने बताया कि राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में 5922 आवेदक थे जिनमें से 283 कलाकारों का प्रदर्शनी के लिए चयन किया गया और 20 कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है। प्रदेश से केवल उन्हें इस वर्ष 2025 के लिए उनकी रचना वृत्त की पहेली सुलझाने के लिए पुरस्कृत किया गया है। इस मौके पर पर डीन प्रो. कृष्णा देवी, लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, डॉ. पवन कुमार, डॉ. मोनिका, डॉ. जया सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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डॉ. आनंद जायसवाल की रचना वृत्त की पहेली सुलझाना
डॉ. आनंद जायसवाल ने बताया कि उनकी रचित सॉल्विंग द पजल ऑफ सर्कल्स एक दृश्यात्मक रूप से प्रभावशाली, किंतु गहन रूप से व्यंग्यात्मक रचना है जो औद्योगिक रूपों की व्यवस्थित सुंदरता और मानवीय कष्टों की कठोर वास्तविकता के बीच का अंतर दर्शाती है। नीले, हरे और काले रंग के करीने से रखे ड्रम, बार-बार दोहराए जाने वाले वृत्तों का एक मनमोहक जाल बनाते हैं, जो सटीकता, एकरूपता और नियंत्रण का संकेत देते हैं लेकिन इस व्यवस्थित पृष्ठभूमि के सामने एक नंगे पांव मजदूर खड़ा है, जो एक बैरल पर झुका हुआ है, जो शहरी गरीबों के मौन संघर्ष का प्रतीक है। यह चित्र विस्थापन, गरीबी और आधुनिक प्रगति की मशीनरी में शारीरिक श्रम की अदृश्यता की बात करता है।