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श्रद्धा और उल्लास के दीयों से जगमग होगी र्ध्मनगरी
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दीपों का पांच दिन का उत्सव धनतेरस से शुरू हो गया है। इस बार दिवाली पर महालक्ष्मी का पूजन शाम 5 बजकर 21 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। वहीं व्यापारी वर्ग अपने प्रतिष्ठान पर दोपहर 1 बजकर 24 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक पूजन कर सकते है। उधर, दीपोत्सव पर्व को लेकर बाजार दुल्हन की तरह सजे हुए है। धर्मनगरी का कोना-कोना दीपोत्सव के उल्लास में जगमग है। दिवाली की पूर्व संध्या पर बुधवार को बाजारों में खूब रंगत रही। देर रात तक लोग गहने, बर्तन, इलेक्ट्रानिक सामान, वाहन, मिठाई, मिट्टी के खिलौने, खील, बताशे, लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां, दीये व मोमबत्ती की खरीदारी करते रहे। वहीं सुबह से बाजारों में खरीदारी के लिए आने वाले ग्राहकों को देखकर व्यापारियों को बेहतर कारोबार की उम्मीद है। हालांकि जिलेभर में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगने से लोग निराश दिखे, लेकिन पर्यावरण प्रेमियों ने पटाखे पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय का स्वागत किया।
प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन
इस बार दिवाली पर महालक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में होगा। वीरवार शाम 5 बजकर 21 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। प्रदोष काल का समय दिवाली पूजन के लिए शुभ मुहूर्त है। कॉस्मिक एस्ट्रो डायरेक्टर डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उत्तम रहता है। इस दिन प्रदोष काल व स्थिर लग्न दोनों तथा इसके साथ शुभ चौघड़िया भी रहने से मुहूर्त की शुभता में वृद्धि हो रही है। वहीं स्वाति नक्षत्र ,चंद्रमा और सूर्य तुला राशि में आयुष्मान योग विशेष होंगे। इस दिन एक साथ चार ग्रहों की युति बन रही है। दिवाली पर तुला राशि में सूर्य, बुध, मंगल और चंद्रमा उपस्थित रहेंगे। उन्होंने बताया कि दिवाली का मुख्य अर्थ ही लक्ष्मी पूजन है, लेकिन अगर लक्ष्मी पूजन विधि विधान से न हो, तो फल प्राप्ति मुश्किल हो जाती हैं, इसलिए पूरे विधि विधान से महालक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। अष्ट सिद्धि और नवनिधि की देवी महालक्ष्मी का पूजन सभी भौतिक कार्यों में सफलता के लिए किया जाता है।
व्यापारी वर्ग दोपहर को करें पूजा
उन्होंने बताया कि महालक्ष्मी पूजन स्थिर लग्न वृष, सिंह व कुंभ में ही करना उचित माना गया है। व्यावसायिक स्थल में पूजा कुंभ लग्न में दोपहर 1 बजकर 24 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक होगी। वहीं गृहस्थ में पूजन वृष लग्न में शाम 5 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक व साधना और सिद्धि के लिए सिंह लग्न में रात 12 बजकर 27 मिनट से 2 बजकर 42 मिनट तक होगी। कहा कि गोधूलि लग्न में पूजा आरंभ करके महानिशीथ काल तक अपने-अपने अस्तित्व के अनुसार महालक्ष्मी के पूजन को जारी रखा जाता है। जहां गृहस्थ और व्यापारी वर्ग के लोग धन की देवी लक्ष्मी से समृद्धि की कामना करते है, वहीं साधु-संत और तांत्रिक कुछ विशेष सिद्धियां अर्जित करने के लिए रात्रिकाल में अपने तांत्रिक षट्कर्म करते हैं।
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प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन
इस बार दिवाली पर महालक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में होगा। वीरवार शाम 5 बजकर 21 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। प्रदोष काल का समय दिवाली पूजन के लिए शुभ मुहूर्त है। कॉस्मिक एस्ट्रो डायरेक्टर डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उत्तम रहता है। इस दिन प्रदोष काल व स्थिर लग्न दोनों तथा इसके साथ शुभ चौघड़िया भी रहने से मुहूर्त की शुभता में वृद्धि हो रही है। वहीं स्वाति नक्षत्र ,चंद्रमा और सूर्य तुला राशि में आयुष्मान योग विशेष होंगे। इस दिन एक साथ चार ग्रहों की युति बन रही है। दिवाली पर तुला राशि में सूर्य, बुध, मंगल और चंद्रमा उपस्थित रहेंगे। उन्होंने बताया कि दिवाली का मुख्य अर्थ ही लक्ष्मी पूजन है, लेकिन अगर लक्ष्मी पूजन विधि विधान से न हो, तो फल प्राप्ति मुश्किल हो जाती हैं, इसलिए पूरे विधि विधान से महालक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। अष्ट सिद्धि और नवनिधि की देवी महालक्ष्मी का पूजन सभी भौतिक कार्यों में सफलता के लिए किया जाता है।
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व्यापारी वर्ग दोपहर को करें पूजा
उन्होंने बताया कि महालक्ष्मी पूजन स्थिर लग्न वृष, सिंह व कुंभ में ही करना उचित माना गया है। व्यावसायिक स्थल में पूजा कुंभ लग्न में दोपहर 1 बजकर 24 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक होगी। वहीं गृहस्थ में पूजन वृष लग्न में शाम 5 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 53 मिनट तक व साधना और सिद्धि के लिए सिंह लग्न में रात 12 बजकर 27 मिनट से 2 बजकर 42 मिनट तक होगी। कहा कि गोधूलि लग्न में पूजा आरंभ करके महानिशीथ काल तक अपने-अपने अस्तित्व के अनुसार महालक्ष्मी के पूजन को जारी रखा जाता है। जहां गृहस्थ और व्यापारी वर्ग के लोग धन की देवी लक्ष्मी से समृद्धि की कामना करते है, वहीं साधु-संत और तांत्रिक कुछ विशेष सिद्धियां अर्जित करने के लिए रात्रिकाल में अपने तांत्रिक षट्कर्म करते हैं।
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