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Kurukshetra News: जिला भर में धूमधाम से मनाई गई श्रीराम नवमी
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कुरुक्षेत्र। जिला भर में वीरवार को श्रीराम नवमी पर्व हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया गया। घरों से लेकर मंदिरों में भी श्रद्धालुओं में उत्साह बना रहा। जगह-जगह भंडारे लगाए गए तो कईं अन्य जगहों पर कार्यक्रम किए गए, जहां हर मनुष्य को भगवान श्रीराम के चरित्र को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया। शहर के साथ-साथ गांव हथीरा के माता बाला सुंदरी मंदिर में दिन भर मेले जैसा माहौल बना रहा। हजारों लोगों ने पूजा अर्चना की तो विशाल भंडारे का भी आयोजन किया।
श्रीराम नवमी के उपलक्ष्य में धर्मनगरी में जहां एक दिन पहले बुधवार को ही विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया वहीं वीरवार को भी विश्व हिंदू परिषद सहित अन्य संस्थाओं की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्रीराम का पूजन किया गया तो वहीं उनके चरित्र को अपनाकर अपना जीवन सरल बनाए जाने का आह्वान किया गया। उधर महादेव सेवा समिति की ओर से जितेंद्र शर्मा, मंगत राम मेहता, सीपी गुप्ता सहित अन्य लोगों ने कहा कि श्रीरामचंद्र का जीवन हर मनुष्य के लिए अनुकरणीय रहा है।
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भगवान श्रीराम की आराधना से होती सुख-समृद्धि की प्राप्ति
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श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव है और जिनके मन में श्री राम हैं, उनके भाग्य में वैकुण्ठ धाम है। भगवान श्री राम के चरणों में जिसने जीवन वार दिया, संसार में उसका कल्याण ही कल्याण है। ब्रह्मचारी ने बताया कि श्री रामनवमी का पर्व भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को मनाया जाता है। चैत्र नवमी तिथि नवरात्रों का आखिरी दिन होता है। इसी के साथ नौ दिनों तक चलने वाले देवी मां दुर्गा की आराधना का पर्व समाप्त होता है। ब्रह्मचारी ने बताया कि चैत्र नवमी शुक्ल पक्ष तिथि पर भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। संस्कृति एवं संस्कारों में विश्वास करने वाले लोग हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर भगवान राम के जन्मोत्सव का त्योहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं। धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान राम भगवान विष्णु जी के सातवें अवतार माने जाते हैं। भगवान श्रीराम की जो व्यक्ति सच्चे मन से उनकी पूजा-आराधना करता है उसे जीवन में मान-सम्मान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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श्रीराम नवमी के उपलक्ष्य में धर्मनगरी में जहां एक दिन पहले बुधवार को ही विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया वहीं वीरवार को भी विश्व हिंदू परिषद सहित अन्य संस्थाओं की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्रीराम का पूजन किया गया तो वहीं उनके चरित्र को अपनाकर अपना जीवन सरल बनाए जाने का आह्वान किया गया। उधर महादेव सेवा समिति की ओर से जितेंद्र शर्मा, मंगत राम मेहता, सीपी गुप्ता सहित अन्य लोगों ने कहा कि श्रीरामचंद्र का जीवन हर मनुष्य के लिए अनुकरणीय रहा है।
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भगवान श्रीराम की आराधना से होती सुख-समृद्धि की प्राप्ति
श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव है और जिनके मन में श्री राम हैं, उनके भाग्य में वैकुण्ठ धाम है। भगवान श्री राम के चरणों में जिसने जीवन वार दिया, संसार में उसका कल्याण ही कल्याण है। ब्रह्मचारी ने बताया कि श्री रामनवमी का पर्व भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को मनाया जाता है। चैत्र नवमी तिथि नवरात्रों का आखिरी दिन होता है। इसी के साथ नौ दिनों तक चलने वाले देवी मां दुर्गा की आराधना का पर्व समाप्त होता है। ब्रह्मचारी ने बताया कि चैत्र नवमी शुक्ल पक्ष तिथि पर भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। संस्कृति एवं संस्कारों में विश्वास करने वाले लोग हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर भगवान राम के जन्मोत्सव का त्योहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं। धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान राम भगवान विष्णु जी के सातवें अवतार माने जाते हैं। भगवान श्रीराम की जो व्यक्ति सच्चे मन से उनकी पूजा-आराधना करता है उसे जीवन में मान-सम्मान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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