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मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने सरोवर में लगाई डुबकी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Feb 2022 02:03 AM IST
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Devotees take a dip in the lake on Mauni Amavasya
Devotees take a dip in the lake on Mauni Amavasya - फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। माघ मास की मौनी एवं भौमवती अमावस्या पर हजारों श्रद्धालु ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर पहुंचे। यहां उन्होंने अपने पितरों की अक्षय मुक्ति के लिए पिंडदान, गति कर्म और तर्पण किया। घनी धुंध और सर्दी की परवाह किए बिना श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में डुबकी भी लगाई।
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अमावस की पूर्व संध्या पर ही श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचना शुरू हो गए थे। पूर्व संध्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने सूर्योदय पर पितरों के लिए पूजा अर्चना की। उसके बाद उन्होंने पुरोहितों से अपनी वंशावली का ज्ञान भी प्राप्त किया। कई श्रद्धालुओं ने पुरोहितों से अपनी वंशावली का रिकॉर्ड अपने मोबाइल में भी सुरक्षित किया। वहीं सरस्वती तीर्थ स्थित प्रेत पीपल पर श्रद्धालुओं ने जल अर्पित किया तथा सूत बांधकर अपनी सुख समृद्धि की कामना की। उसके बाद उन्होंने भगवान कार्तिकेय के मंदिर में साक्षी के रूप में उनको तेल व सिंदूर भी चढ़ाया। मंदिर में अभिषेक के लिए श्रद्धालुओं को काफी लंबा इंतजार करना पड़ा। मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पितरों के निमित्त पिंडदान किए।
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सरस्वती तीर्थ पुरोहित आशीष चक्रपाणी ने बताया कि अमावस पर अपने दिवंगत परिजन के निमित्त पिंडदान, गति कर्म व नारायण बलि जैसे धार्मिक कार्य करने का महत्व है। सरस्वती तीर्थ पर अन्न से बने पिंडों को मृतक जीव का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। तत्पश्चात उन पिंडों का तीर्थ के जल में तर्पण किया जाता है। मौनी अमावस्या पर पवित्र नदियों, संगम और सरोवर में स्नान के बाद अपनी इच्छानुसार अन्न, वस्त्र, धन, गाय, भूमि तथा स्वर्ण दान करने का विधान है। मौनी अमावस्या पर नदियों का जल गंगा के समान पावन माना गया है। इन नदियों में स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है।
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बताया कि इस दिन मौन व्रत करने का भी विधान है और बहुत से लोग मौन व्रत भी करते हैं। इसका अर्थ है कि अभ्यास करने से व्यक्ति वाणी पर संयम रखकर अपनी इंद्रियों को वश में रख सकता है। व्यक्ति को प्रण करना चाहिए कि वह झूठ, छल-कपट नहीं करेगा और बेकार की बातों व बुरी आदतों का त्यागकर अपने मन को शांत करने की कोशिश करेगा। इससे चित्त की शुद्धि होगी और पाप का विनाश होगा।
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