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Kurukshetra News: मुर्दा पेंशन घोटाला- सीबीआई ने रिपोर्ट में पुलिस जांच पर उठाए सवाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Oct 2024 04:17 AM IST
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Dead pension scam- CBI raised questions on police investigation in the report
कुरुक्षेत्र/ शाहाबाद। बहुचर्चित मुर्दा पेंशन घोटाले में पुलिस की जांच पर सवाल उठे हैं। हाईकोर्ट में दायर याचिका के दौरान सीबीआई ने प्रदेश पुलिस को बेपरवाह बताया और यह भी कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी ठीक से जांच नहीं हुई।
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याचिकाकर्ता राकेश बैंस और सुखविंदर सिंह ने वर्ष 2017 में अपने वकील प्रदीप रापड़िया के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा था कि पूरे प्रदेश भर में मृत व्यक्तियों को पेंशन बांटी हुई दिखाकर मिलीभगत से करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया है, जिसकी जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग की गई थी। मामला सीबीआई को सौंपा गया तो पांच मार्च को बड़े गबन की आशंका जताते हुए अपनी पहली रिपोर्ट में सीबीआई ने हाईकोर्ट में केवल शाहाबाद में हुए गबन की स्थिति पर रिपोर्ट दर्ज कार्रवाई थी। इस पर हाईकोर्ट ने सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख सचिव और महानिदेशक के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करने और पेंशन धारकों की वेरिफिकेशन करने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई रखी है।
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याचिकाकर्ता के मुताबिक उस समय हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कहा था कि इस गबन में अब तक इस मामले में कार्रवाई के दौरान विभाग के जिन-जिन अधिकारियों ने दोषियों की मदद की उनके खिलाफ भी विभागीय कार्यवाही की जाए। सीबीआई ने अगली रिपोर्ट हाईकोर्ट में दर्ज करवाई और बताया कि पेंशन घोटाले में मुख्यत: नगर निकाय कमेटी के प्रधान, पार्षद, सचिव और जिला समाज कल्याण अधिकारी शामिल है।
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सीबीआई जांच में खुलासा हुआ कि मृत लाभार्थियों के परिवारों से पेंशन की रिकवरी दिखाई गई, लेकिन जब सीबीआई ने इन परिवारों से संपर्क किया तो उन्होंने बयान दिया कि न तो उन्होंने कोई पैसा जमा करवाया और न ही उनको कभी पेंशन मिली। जांच के दौरान 17094 पेंशन लाभार्थी गायब मिले और 50312 की मृत्यु हो चुकी है। पेंशन घोटाले में पुलिस ने अपर्याप्त जांच की है। सीबीआई ने हाईकोर्ट में सिफारिश की है कि हर जिले में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज हो। यही नहीं संबंधित पार्षदों और सरपंचों की भूमिका की भी जांच हो।





यह बताया जा रहा मामला

वर्ष 2013 में सीता देवी की विधवा पेंशन बनवाई गई। उसके पति का झूठा मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर विधवा पेंशन स्वीकृत करवा दी। इसका खुलासा तब हुआ जब वर्ष 2015 में सीता देवी बैंक में लोन लेने गई और आवेदन करने के लिए पति का आधार कार्ड दिया तो उसे बताया गया कि रिकॉर्ड अनुसार उनके पति की 2013 में मौत हो चुकी है। आरोप लगाया कि उसके पति का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर उसकी विधवा पेंशन मंजूर कराई। जब इस बात का उनको पता चला तो उन्होंने सर्वप्रथम डीसी व महानिदेशक को इसकी शिकायत भेजी, जिसमें उन्होंने जाली दस्तावेज तैयार करने व करवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जिसके बाद गड़बड़ी पाई गई और कुछ पार्षदों व अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई थी। तब कुछ पेंशनधारकों से रिकवरी भी हुई लेकिन दो कर्मचारियों को चार्जशीट करने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद राकेश बैंस और सुखविंदर ने हाईकोर्ट की शरण ली।
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