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बारिश से नुकसान, किसान सुखाते रहे धान
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पिछले तीन दिनों तक जिला भर में जोरदार बारिश हुई, जिससे खेत से लेकर अनामंडियां भी पानी से लबालब रही। बारिश के पिछले 24 घंटे सबसे भारी रहे। शनिवार सुबह से रविवार सुबह तक सबसे ज्यादा इस्माईलाबाद में 96 फीसदी तक बारिश हुई तो सबसे कम पिहोवा में 50 एमएम दर्ज की गई। थानेसर में 79, शाहाबाद में 55, लाडवा में 76 व बाबैन में 68 एमएम बारिश हुई।
रविवार करीब 11 बजे बाद बारिश रूकी तो धूप भी खिलने लगी, जिसके बाद किसानों से लेकर मजदूरों व आम जन ने भी राहत की सांस ली। धूप निकलते ही अनाजमंडियों में पिछले तीन दिनों से खुले आसमान के नीचे बारिश में भीगते रहे अनाज को सुखाने का शाम तक प्रयास किया जाता रहा। अब किसानों से लेकर मजदूरों को भी उम्मीद जगी है कि मौसम साफ रहेगा तो मंडियों में काम तेज होगा। उधर जोरदार बारिश के चलते शहर में भी चारों ओर पानी भर गया। रात को ही शहर की अधिकतर सड़कें पानी में डूब गई थी, जिसके चलते लोगों को भारी परेशनी भी झेलनी पड़ी।
आढ़ती दौलत राम बंसल, बलविंद्र सिंह आदि का कहना है कि मंडियों में आए धान को ही कई दिनों तक सुखाना होगा, जिसके बाद ही इसे बेचा जा सकेगा। धान की बिक्री सरकारी तौर पर एक अक्तूबर से होनी है तो निजी खरीददार भी अभी किनारा कर रहे हैं। आढ़ती हड़ताल पर है। ऐसे में किसानों को धान कई दिनों तक सुखानी होगी। उधर किसान जयसिंह, राजबीर, सुरता राम का कहना था कि अभी धान की कटाई करीब एक सप्ताह तक होनी मुश्किल है। खेत पानी के लबालब है। ऐसे में मंडियों में धान की आवक करीब एक सप्ताह बाद ही शुरू हो पाएगी।
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अपनी मांगों को लेकर आढ़तियों की हड़ताल जारी रही। रविवार को भी थानेसर अनाजमंडी सहित अन्य मंडियों से कई आढ़ती करनाल में धरने में शामिल होने के लिए रवाना हुए। आढ़तियों का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
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रविवार करीब 11 बजे बाद बारिश रूकी तो धूप भी खिलने लगी, जिसके बाद किसानों से लेकर मजदूरों व आम जन ने भी राहत की सांस ली। धूप निकलते ही अनाजमंडियों में पिछले तीन दिनों से खुले आसमान के नीचे बारिश में भीगते रहे अनाज को सुखाने का शाम तक प्रयास किया जाता रहा। अब किसानों से लेकर मजदूरों को भी उम्मीद जगी है कि मौसम साफ रहेगा तो मंडियों में काम तेज होगा। उधर जोरदार बारिश के चलते शहर में भी चारों ओर पानी भर गया। रात को ही शहर की अधिकतर सड़कें पानी में डूब गई थी, जिसके चलते लोगों को भारी परेशनी भी झेलनी पड़ी।
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आढ़ती दौलत राम बंसल, बलविंद्र सिंह आदि का कहना है कि मंडियों में आए धान को ही कई दिनों तक सुखाना होगा, जिसके बाद ही इसे बेचा जा सकेगा। धान की बिक्री सरकारी तौर पर एक अक्तूबर से होनी है तो निजी खरीददार भी अभी किनारा कर रहे हैं। आढ़ती हड़ताल पर है। ऐसे में किसानों को धान कई दिनों तक सुखानी होगी। उधर किसान जयसिंह, राजबीर, सुरता राम का कहना था कि अभी धान की कटाई करीब एक सप्ताह तक होनी मुश्किल है। खेत पानी के लबालब है। ऐसे में मंडियों में धान की आवक करीब एक सप्ताह बाद ही शुरू हो पाएगी।
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अपनी मांगों को लेकर आढ़तियों की हड़ताल जारी रही। रविवार को भी थानेसर अनाजमंडी सहित अन्य मंडियों से कई आढ़ती करनाल में धरने में शामिल होने के लिए रवाना हुए। आढ़तियों का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी।