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गंगा-यमुना की तर्ज पर अब रोजाना होगी सरस्वती की महाआरती
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- फोटो : Kurukshetra
गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा और कावेरी की तर्ज पर सरस्वती के पवित्र घाट पर भी अब महाआरती हर दिन होगी। इसी के साथ सरस्वती से जुड़े उत्सव आयोजनों का कैलेंडर तैयार होगा,ताकि इनमें लोगों की भागीदारी में इजाफा किया जा सके। अमर उजाला से विशेष बातचीत में यह जानकारी हरियाणा सरस्वती हैरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच ने दी है। उन्होंने बताया कि सरस्वती उद्गम स्थल आदी बद्री और कुरुक्षेत्र के पिहोवा सरस्वती तीर्थ पर विश्वविख्यात गंगा आरती की तर्ज पर सरस्वती की महाआरती अब प्रतिदिन होगी। उन्होंने बताया कि 2015 से पहले कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर की महाआरती का वह स्वरुप नहीं था,जो आज है। धुम्मन ने बताया कि इसके लिये उनके प्रयासों से ही ब्रह्मसरोवर पर विशेष महाआरती की शुरुआत मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने की थी। बाद में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने ब्रह्मसरोवर के इस आरती स्थल को और भी भव्य और आकर्षक बनाने के साथ महाआरती का स्वरुप निखारने का काम किया।उन्होंने दावा किया कि जल्द ही पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर भी भव्य और आकर्षक आरती स्थल स्थापित किया जाएगा।हालांकि इससे पहले सरस्वती के घाट पर रोजाना सरस्वती महाआरती जारी रहेगी। इसका जिम्मा चार पुरोहितों
को सौंपा गया है। भविष्य में इस संख्या को बढ़ाया जाएगा,बल्कि धार्मिक और सामाजिक संगठनों के साथ पिहोवा वा सियों को भी जोड़ा जाएगा।
सरस्वती तीर्थ पर विशेष महाआरती के लिये पहले चरण में इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने और महाआरती के समय उनकी मौजूदगी को तय की जाएगी। इसके अलावा आए दिन महाआरती के यजमान कौन होंगे? इसके लिये ऑनलाइन सेवा शुरु की जाएगी,ताकि सरस्वती पर महाआरती करने के इच्छुक श्रद्धालुगण पहले से ही अपनी तारीख सुनिश्चित कर इसमें भाग ले सकें।
सरस्वती हैरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुम्मन सिंह के मुताबिक देश की कई पवित्र नदियों में विशेष अवसरों पर साड़ी चढ़ाने की परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। इस तरह सरस्वती तीर्थ और इस नदी से जुड़े पुराने आयोजनों को और भव्य कैसे बनाया जाए,जिससे देश दुनिया में सरस्वती के प्रति आस्था रखने वाले लोग यहां जुड़ें,इसकी रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।
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बोर्ड के वाइस चेयरमैन ने कहा कि कुरुक्षेत्र प्राची तीर्थ के निकट जो मामला संज्ञान में आया है,ऐसा दुबारा ना हो इसके लिये संबंधित जिलों के उपायुक्तों से सरस्वती हैरिटेज बोर्ड संपर्क करेगा। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री और राज्य सरकार सरस्वती नदी के प्रति गंभीर है। उसकी पवित्रता को किसी भी सूरत में भंग नहीं करने दिया जाएगा और उन स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है,जहां इस तरह की लापरवाही हो रही है।
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को सौंपा गया है। भविष्य में इस संख्या को बढ़ाया जाएगा,बल्कि धार्मिक और सामाजिक संगठनों के साथ पिहोवा वा सियों को भी जोड़ा जाएगा।
सरस्वती तीर्थ पर विशेष महाआरती के लिये पहले चरण में इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने और महाआरती के समय उनकी मौजूदगी को तय की जाएगी। इसके अलावा आए दिन महाआरती के यजमान कौन होंगे? इसके लिये ऑनलाइन सेवा शुरु की जाएगी,ताकि सरस्वती पर महाआरती करने के इच्छुक श्रद्धालुगण पहले से ही अपनी तारीख सुनिश्चित कर इसमें भाग ले सकें।
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सरस्वती हैरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुम्मन सिंह के मुताबिक देश की कई पवित्र नदियों में विशेष अवसरों पर साड़ी चढ़ाने की परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। इस तरह सरस्वती तीर्थ और इस नदी से जुड़े पुराने आयोजनों को और भव्य कैसे बनाया जाए,जिससे देश दुनिया में सरस्वती के प्रति आस्था रखने वाले लोग यहां जुड़ें,इसकी रूपरेखा भी तैयार की जा रही है।
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बोर्ड के वाइस चेयरमैन ने कहा कि कुरुक्षेत्र प्राची तीर्थ के निकट जो मामला संज्ञान में आया है,ऐसा दुबारा ना हो इसके लिये संबंधित जिलों के उपायुक्तों से सरस्वती हैरिटेज बोर्ड संपर्क करेगा। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री और राज्य सरकार सरस्वती नदी के प्रति गंभीर है। उसकी पवित्रता को किसी भी सूरत में भंग नहीं करने दिया जाएगा और उन स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है,जहां इस तरह की लापरवाही हो रही है।