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ऐसा क्या हुआ कि भड़क उठे किसान
कुरुक्ष्ाेत्र/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2015 12:42 AM IST
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शाहाबाद। प्रदेश सरकार द्वारा हाईकोर्ट में सूरजमुखी की सरकारी खरीद करने का एफिडेविट देने के बावजूद खरीद शुरू न होने से गुस्साए किसानों ने मंगलवार को मार्केट कमेटी कार्यालय के गेट को ताला लगा दिया।
इस दौरान किसानों ने जोरदार नारेबाजी व प्रदर्शन किया। वे मार्केट कमेटी ताला लगाकर किसान गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए।
भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकारी खरीद शुरू न होने से किसानोें के खून पसीने से पैदा की गई फसल मंडी में लुट रही है और सरकारी मूल्य 3750 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों को 2800 से 3300 रुपये के दाम मिल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट में सूरजमुखी की सरकारी खरीद शुरू करने को लेकर एक याचिका डाली थी और सरकार ने अपने जवाब में एक एफिडेविट देकर 1 जून से 15 जुलाई तक सूरजमुखी की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करने का भरोसा दिया था, लेकिन 1 जून बीत जाने के बावजूद सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई और किसानों को व्यापारियों की लूट का शिकार होना पड़ा।
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इस कारण भाकियू को खरीद शुरू करने को लेकर धरने पर बैठना पड़ा है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष हरियाणा में बाजरे और सूरजमुखी की बिक्री पर किसानों को 4 करोड़ रुपये का और पजंाब में मक्का की बिक्री पर करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था, जिसकी भरपाई सरकार द्वारा की जानी चाहिए।
धरने पर बैठने की सूचना मिलते की एसएचओ रमेश चंद दलबल सहित मौके पर पहुंचे, लेकिन दोपहर तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी किसानों से बातचीत करने के लिए नहीं पहुंचा। इससे किसान भड़क उठे।
बाद में हैफेड के डीएम एमएल पोसवाल और सोसायटी के मैनेजर सूरज पाल भी धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि सूरजमुखी की खरीद केंद्रीय एजेंसी नैफेड को करनी है और इसके लिए उन्होंने पत्र लिखा हुआ है। जैसे ही वहां से अनुमति मिलेगी तत्काल खरीद शुरू कर दी जाएगी।
लेकिन इस जवाब से किसान संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने दोनों अधिकारियों को अपने साथ धरने पर ही बैठा लिया। दोपहर लगभग 3 बजे एसडीएम हवा सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों के प्रतिनिधि मंडल को 4 जून को कुरुक्षेत्र में सीएम से मिलवाने का आश्वासन दिया, जिस पर किसानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
इस अवसर पर राकेश बैंस, अर्जुन सिंह, तेजपाल, छोटू राम, सतविंद्र पाल हांडा, सुभाष बावेजा, सुरेंद्र सिंह, पवित्र सिंह, अरुण कालड़ा, कुंदन लाल, अशोक मक्क ड़, शिव राम सैनी, केहर सिंह, जरनैल सिंह, अनील तनेजा, राम पाल, अजीत सिंह तथ्सस महल सिंह सहित सैंकड़ों की संख्या में किसान मौजूद थे।
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इस दौरान किसानों ने जोरदार नारेबाजी व प्रदर्शन किया। वे मार्केट कमेटी ताला लगाकर किसान गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए।
भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकारी खरीद शुरू न होने से किसानोें के खून पसीने से पैदा की गई फसल मंडी में लुट रही है और सरकारी मूल्य 3750 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों को 2800 से 3300 रुपये के दाम मिल रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट में सूरजमुखी की सरकारी खरीद शुरू करने को लेकर एक याचिका डाली थी और सरकार ने अपने जवाब में एक एफिडेविट देकर 1 जून से 15 जुलाई तक सूरजमुखी की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करने का भरोसा दिया था, लेकिन 1 जून बीत जाने के बावजूद सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई और किसानों को व्यापारियों की लूट का शिकार होना पड़ा।
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इस कारण भाकियू को खरीद शुरू करने को लेकर धरने पर बैठना पड़ा है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष हरियाणा में बाजरे और सूरजमुखी की बिक्री पर किसानों को 4 करोड़ रुपये का और पजंाब में मक्का की बिक्री पर करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था, जिसकी भरपाई सरकार द्वारा की जानी चाहिए।
धरने पर बैठने की सूचना मिलते की एसएचओ रमेश चंद दलबल सहित मौके पर पहुंचे, लेकिन दोपहर तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी किसानों से बातचीत करने के लिए नहीं पहुंचा। इससे किसान भड़क उठे।
बाद में हैफेड के डीएम एमएल पोसवाल और सोसायटी के मैनेजर सूरज पाल भी धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि सूरजमुखी की खरीद केंद्रीय एजेंसी नैफेड को करनी है और इसके लिए उन्होंने पत्र लिखा हुआ है। जैसे ही वहां से अनुमति मिलेगी तत्काल खरीद शुरू कर दी जाएगी।
लेकिन इस जवाब से किसान संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने दोनों अधिकारियों को अपने साथ धरने पर ही बैठा लिया। दोपहर लगभग 3 बजे एसडीएम हवा सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों के प्रतिनिधि मंडल को 4 जून को कुरुक्षेत्र में सीएम से मिलवाने का आश्वासन दिया, जिस पर किसानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
इस अवसर पर राकेश बैंस, अर्जुन सिंह, तेजपाल, छोटू राम, सतविंद्र पाल हांडा, सुभाष बावेजा, सुरेंद्र सिंह, पवित्र सिंह, अरुण कालड़ा, कुंदन लाल, अशोक मक्क ड़, शिव राम सैनी, केहर सिंह, जरनैल सिंह, अनील तनेजा, राम पाल, अजीत सिंह तथ्सस महल सिंह सहित सैंकड़ों की संख्या में किसान मौजूद थे।