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छात्राओं को अश्लील वीडियो दिखाने का आरोपी मुख्याध्यापक अदालत ने किया बरी
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छात्राओं को अश्लील वीडियो दिखाने का आरोपी मुख्याध्यापक साक्ष्य न मिलने पर अदालत ने किया बरी
अमर उजाला ब्यूरो
लाडवा। गांव बराहण में सरकारी स्कूल की छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करने व उन्हें अपने मोबाइल में अश्लील वीडियो दिखाने के मामले में न्यायालय ने आरोपी मुख्याध्यापक को बरी कर दिया है। उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिल पाए।
17 सितंबर को गांव वासियों ने भारी हंगामा करते हुए स्कूल के मुख्याध्यापक पर कक्षा आठवीं की छात्राओं को अपने मोबाइल में जबरदस्ती अश्लील वीडियो दिखाने के आरोप लगाए थे। खंड शिक्षा अधिकारी ने स्कूल में पहुंचकर पीड़ित छात्राओं व उनके अभिभावकों से बात की थी और जांच के बाद मामले की रिपोर्ट बनाकर शिक्षा विभाग को कारवाई के लिए भेजी थी। पुलिस ने मुख्याध्यापक विक्रम सिंह के खिलाफ विभिन्न संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया था।
शरारती लोगों ने फंसाया था : विक्रम सिंह
मामले में आरोपी बनाए गए मुख्याध्यापक विक्रम सिंह ने न्यायालय के आए फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि उन पर लगाए गए सभी आरोप अदालत में निराधार पाए गए हैं। अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है। कुछ शरारती लोगों ने उन्हें षड्यंत्र के तहत फंसाया था। वे 28 साल से शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं और उनकी पूरी सेवा बेदाग रही है। कुछ शरारती तत्वों के कारण करीब तीन माह तक चली पुलिस व अदालती कार्रवाई के दौरान उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
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अमर उजाला ब्यूरो
लाडवा। गांव बराहण में सरकारी स्कूल की छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करने व उन्हें अपने मोबाइल में अश्लील वीडियो दिखाने के मामले में न्यायालय ने आरोपी मुख्याध्यापक को बरी कर दिया है। उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिल पाए।
17 सितंबर को गांव वासियों ने भारी हंगामा करते हुए स्कूल के मुख्याध्यापक पर कक्षा आठवीं की छात्राओं को अपने मोबाइल में जबरदस्ती अश्लील वीडियो दिखाने के आरोप लगाए थे। खंड शिक्षा अधिकारी ने स्कूल में पहुंचकर पीड़ित छात्राओं व उनके अभिभावकों से बात की थी और जांच के बाद मामले की रिपोर्ट बनाकर शिक्षा विभाग को कारवाई के लिए भेजी थी। पुलिस ने मुख्याध्यापक विक्रम सिंह के खिलाफ विभिन्न संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया था।
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शरारती लोगों ने फंसाया था : विक्रम सिंह
मामले में आरोपी बनाए गए मुख्याध्यापक विक्रम सिंह ने न्यायालय के आए फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि उन पर लगाए गए सभी आरोप अदालत में निराधार पाए गए हैं। अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है। कुछ शरारती लोगों ने उन्हें षड्यंत्र के तहत फंसाया था। वे 28 साल से शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं और उनकी पूरी सेवा बेदाग रही है। कुछ शरारती तत्वों के कारण करीब तीन माह तक चली पुलिस व अदालती कार्रवाई के दौरान उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
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