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केयू छात्र संघर्ष समिति ने फूंका कुलपति का पुतला, 2
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में भाजपा द्वारा आयोजित क्लस्टर की वर्कशाप व कुलपति द्वारा विद्यार्थियों से बातचीत न करने के विरोध में विद्यार्थी भड़क गए। भड़के विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कुलपति का पुुतला फूंका और 28 फरवरी को विश्वविद्यालय बंद करने की चेतावनी दी। इस दौरान स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा तो छात्रों के शांत होने तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
संयुक्त छात्र संघर्ष समिति से जुड़े विद्यार्थी शनिवार सुबह ही केयू को भाजपा की वर्कशॉप व कुलपति द्वारा समस्याओं को लेकर विद्यार्थियों से बातचीत न करने के विरोध में आर्ट फैकल्टी पर एकजुट हुए। इस दौरान उन्होंने कुलपति के पुतले को फूंकने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में रोष मार्च निकालने का प्रयास किया तो वहां तैनात पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सेंटर कैंटीन के समक्ष कुलपति का पुतला फूंका।
विद्यार्थियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा ग्रहण करने के लिए बनाए जाते हैं न कि राजनीतिक अड्डा बनाने के लिए। समिति के संयोजक विनोद गिल ने कहा कि विद्यार्थी विश्वविद्यालय की समस्याओं को लेकर करीब एक माह से कुलपति कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कुलपति ने विद्यार्थियों की समस्याएं नहीं सुनी। कहा कि कुलपति के पास भाजपा के कार्यकर्ताओं की बैठक के लिए तो समय है, लेकिन विद्यार्थियों की समस्या सुनने के लिए कभी समय तक नहीं होता। संयुक्त छात्र संघर्ष समिति के सदस्य ने दीपेंदर बरार, रजत, जसविंदर जस्सी, संजीव सिहाग, मनीष, मनदीप लांबा, नीलम, रोहित आर्य ने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थी अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करने की बजाय उन पर मामले दर्ज करा रहा है। कहा कि संयुक्त छात्र संघर्ष समिति ने प्रशासन के अड़ियल रवैये को देखते हुए 28 फरवरी को विश्वविद्यालय बंद करने का ऐलान किया है।
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विद्यार्थी बोले, परीक्षा नियंत्रक की भर्ती पर खर्च किए जा रहे लाखों रुपये
विद्यार्थियों ने कहा कि प्रसाशन के पास विद्यार्थियों की समस्या हल करने के लिए पास बजट नहीं है, लेकिन परीक्षा नियंत्रक की भर्ती के लिए लाखों रुपये बर्बाद किए जा रहे हैं। पूर्व सरकार ने 8 जुलाई 2008 को विश्वविद्यालय को परीक्षा नियंत्रक के खाली पद भरने की अनुमति दी थी। कहा कि उस समय प्रदेश के 50 प्रतिशत कॉलेज विश्वविद्यालय के अंदर आते थे, लेकिन अब इन कॉलेजों की संख्या घटकर आधी रह गई है और विश्वविद्यालय प्रशासन अभी भी इस भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने में लगा हुआ है। देश के किसी भी विश्वविद्यालय में एक से ज्यादा परीक्षा नियंत्रक नहीं हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों पर अधिक आर्थिक बोझ डाल रही है जबकि आंतरिक मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालय को पत्र जारी करके आदेश दे दिए हैं। विश्वविद्यालय अपनी मनमानी चलाते हुए साक्षात्कार की तिथि तय कर चुका है। कहा कि संयुक्त छात्र संघर्ष समिति विश्वविद्यालय प्रशासन की मनमानी नहीं चलने देगी। विश्वविद्यालय में जितने भी घोटाले हो रहे हैं उनको उजागर करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की पोल खोलेगी और आंदोलन को मजबूती के साथ लड़ेंगे।
संयुक्त छात्र संघर्ष समिति से जुड़े विद्यार्थी शनिवार सुबह ही केयू को भाजपा की वर्कशॉप व कुलपति द्वारा समस्याओं को लेकर विद्यार्थियों से बातचीत न करने के विरोध में आर्ट फैकल्टी पर एकजुट हुए। इस दौरान उन्होंने कुलपति के पुतले को फूंकने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में रोष मार्च निकालने का प्रयास किया तो वहां तैनात पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सेंटर कैंटीन के समक्ष कुलपति का पुतला फूंका।
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विद्यार्थियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा ग्रहण करने के लिए बनाए जाते हैं न कि राजनीतिक अड्डा बनाने के लिए। समिति के संयोजक विनोद गिल ने कहा कि विद्यार्थी विश्वविद्यालय की समस्याओं को लेकर करीब एक माह से कुलपति कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कुलपति ने विद्यार्थियों की समस्याएं नहीं सुनी। कहा कि कुलपति के पास भाजपा के कार्यकर्ताओं की बैठक के लिए तो समय है, लेकिन विद्यार्थियों की समस्या सुनने के लिए कभी समय तक नहीं होता। संयुक्त छात्र संघर्ष समिति के सदस्य ने दीपेंदर बरार, रजत, जसविंदर जस्सी, संजीव सिहाग, मनीष, मनदीप लांबा, नीलम, रोहित आर्य ने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थी अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करने की बजाय उन पर मामले दर्ज करा रहा है। कहा कि संयुक्त छात्र संघर्ष समिति ने प्रशासन के अड़ियल रवैये को देखते हुए 28 फरवरी को विश्वविद्यालय बंद करने का ऐलान किया है।
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विद्यार्थी बोले, परीक्षा नियंत्रक की भर्ती पर खर्च किए जा रहे लाखों रुपये
विद्यार्थियों ने कहा कि प्रसाशन के पास विद्यार्थियों की समस्या हल करने के लिए पास बजट नहीं है, लेकिन परीक्षा नियंत्रक की भर्ती के लिए लाखों रुपये बर्बाद किए जा रहे हैं। पूर्व सरकार ने 8 जुलाई 2008 को विश्वविद्यालय को परीक्षा नियंत्रक के खाली पद भरने की अनुमति दी थी। कहा कि उस समय प्रदेश के 50 प्रतिशत कॉलेज विश्वविद्यालय के अंदर आते थे, लेकिन अब इन कॉलेजों की संख्या घटकर आधी रह गई है और विश्वविद्यालय प्रशासन अभी भी इस भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने में लगा हुआ है। देश के किसी भी विश्वविद्यालय में एक से ज्यादा परीक्षा नियंत्रक नहीं हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों पर अधिक आर्थिक बोझ डाल रही है जबकि आंतरिक मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालय को पत्र जारी करके आदेश दे दिए हैं। विश्वविद्यालय अपनी मनमानी चलाते हुए साक्षात्कार की तिथि तय कर चुका है। कहा कि संयुक्त छात्र संघर्ष समिति विश्वविद्यालय प्रशासन की मनमानी नहीं चलने देगी। विश्वविद्यालय में जितने भी घोटाले हो रहे हैं उनको उजागर करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की पोल खोलेगी और आंदोलन को मजबूती के साथ लड़ेंगे।