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आयुर्वेद संहिताएं पढ़कर बनें अच्छे डॉक्टर : डॉ. संतोष
Sat, 02 Mar 2024 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 02 Mar 2024 01:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत विभाग द्वारा शुक्रवार को चरक संहिता विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता दिल्ली के चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान के आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. संतोश एसआर नायर रहे।
उन्होंने कहा कि चरक संहिता आयुर्वेद का मूल ग्रंथ है, जो आयुर्वेद के सिद्धांत का पूर्ण ग्रंथ है। चरक संहिता में व्याधियों के उपचार तो बताए ही गए हैं। इसी के साथ ही दर्शन और अर्थशास्त्र के विषयों का भी उल्लेख है। उन्होंने कहा कि चरक संहिता हो या आयुर्वेद का कोई भी ग्रंथ एक बार पढ़कर नहीं समझा जा सकता। विद्यार्थियों को एक विषय को दो या तीन बार जरूर पढ़ना चाहिए।
कुलपति प्रो. करतार सिंह धीमान ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति विज्ञान आधारित है, इसलिए संहिताओं के मूल अर्थ को पढ़ना बहुत जरूरी है। अगर विद्यार्थी संस्कृत भाषा जानता है और चरक संहिता को पढ़कर रोगी के रोग का निदान करता है, तो वह सही अर्थों में अच्छा चिकित्सक बन सकता है।
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उन्होंने कहा कि जहां दूसरी चिकित्सा पद्धतियों में डॉक्टर सीधे पढ़ने के बाद ही रोगी की बीमारी का इलाज करते हैं, वहीं आयुर्वेद के मूल भाव को जाने बिना रोग का निदान असंभव है। इस मौके पर आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना, सहायक प्राध्यापक डॉ. कृष्ण कुमार, सह प्राध्यापिका डॉ. लसिथा सहित अन्य शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।।
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत विभाग द्वारा शुक्रवार को चरक संहिता विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता दिल्ली के चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान के आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. संतोश एसआर नायर रहे।
उन्होंने कहा कि चरक संहिता आयुर्वेद का मूल ग्रंथ है, जो आयुर्वेद के सिद्धांत का पूर्ण ग्रंथ है। चरक संहिता में व्याधियों के उपचार तो बताए ही गए हैं। इसी के साथ ही दर्शन और अर्थशास्त्र के विषयों का भी उल्लेख है। उन्होंने कहा कि चरक संहिता हो या आयुर्वेद का कोई भी ग्रंथ एक बार पढ़कर नहीं समझा जा सकता। विद्यार्थियों को एक विषय को दो या तीन बार जरूर पढ़ना चाहिए।
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कुलपति प्रो. करतार सिंह धीमान ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति विज्ञान आधारित है, इसलिए संहिताओं के मूल अर्थ को पढ़ना बहुत जरूरी है। अगर विद्यार्थी संस्कृत भाषा जानता है और चरक संहिता को पढ़कर रोगी के रोग का निदान करता है, तो वह सही अर्थों में अच्छा चिकित्सक बन सकता है।
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उन्होंने कहा कि जहां दूसरी चिकित्सा पद्धतियों में डॉक्टर सीधे पढ़ने के बाद ही रोगी की बीमारी का इलाज करते हैं, वहीं आयुर्वेद के मूल भाव को जाने बिना रोग का निदान असंभव है। इस मौके पर आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र खुराना, सहायक प्राध्यापक डॉ. कृष्ण कुमार, सह प्राध्यापिका डॉ. लसिथा सहित अन्य शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।।