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Kurukshetra News: ड्रायज दर घटाने से चावल व्यापारियों में फैल रहा रोष
Tue, 20 Aug 2024 06:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 20 Aug 2024 06:09 AM IST
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पिहोवा। चावल ड्रायज पर दी जाने वाली एक किलो प्रति क्विंटल की छूट को घटाकर आधा किलो करके सरकार ने व्यापारी विरोधी होने का प्रमाण दिया है। व्यापारियों की मांग ड्रायज दर को दोगुना करने की थी। उल्टा इसे आधा कर दिया गया, जबकि एग्रीमेंट में ऐसी कोई शर्त नहीं थी। यह आरोप राइस मिलर्स एसोसिएशन के उपप्रधान जनक राज सिंगला ने लगाया।
उन्होंने कहा कि व्यापारी स्टेट एजेंसियों के लिए खरीद करता है, लेकिन डिलीवरी एफसीआई को दिलाई जाती है। एफसीआई के अधिकारी उन्हें जिले से बाहर डिलीवरी देने पर मजबूर करते हैं। व्यापारियों से लिखित में लिया जाता है कि जिला से बाहर डिलीवरी देने पर वे किराया नहीं मांगेंगे, जबकि ट्रांसपोर्टर को किराया जेब से देना पड़ता है। यदि व्यापारी लिखित में नहीं देते तो माल नहीं उठाया जाता।
फिजिकल वेरिफिकेशन के नाम पर व्यापारियों का आर्थिक व मानसिक शोषण किया जाता है। कहा कि एक क्विंटल धान से 67 किलो चावल निकाल कर देने की शर्त भी उचित नहीं है। टॉप किस्म से भी 64 किलो से अधिक चावल नहीं निकल पाता। इस बार एजेंसियां खुद खरीद करवाकर अपना माल जहां मर्जी ले जा सकती हैं। माल मिल्स में नहीं लिया जाएगा।
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तानाशाही के चलते चावल का व्यापार करोड़ों के घाटे में चला गया है। सरकारी गोदाम में जगह नहीं होती, लेकिन होल्डिंग चार्ज व्यापारी पर लगाया जाता है। इस तानाशाही के खिलाफ सीजन में व्यापारी खरीद में सहयोग नहीं करेंगे, जब तक उनके साथ एग्रीमेंट करके पक्के तौर पर बातचीत नहीं की जाती।
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उन्होंने कहा कि व्यापारी स्टेट एजेंसियों के लिए खरीद करता है, लेकिन डिलीवरी एफसीआई को दिलाई जाती है। एफसीआई के अधिकारी उन्हें जिले से बाहर डिलीवरी देने पर मजबूर करते हैं। व्यापारियों से लिखित में लिया जाता है कि जिला से बाहर डिलीवरी देने पर वे किराया नहीं मांगेंगे, जबकि ट्रांसपोर्टर को किराया जेब से देना पड़ता है। यदि व्यापारी लिखित में नहीं देते तो माल नहीं उठाया जाता।
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फिजिकल वेरिफिकेशन के नाम पर व्यापारियों का आर्थिक व मानसिक शोषण किया जाता है। कहा कि एक क्विंटल धान से 67 किलो चावल निकाल कर देने की शर्त भी उचित नहीं है। टॉप किस्म से भी 64 किलो से अधिक चावल नहीं निकल पाता। इस बार एजेंसियां खुद खरीद करवाकर अपना माल जहां मर्जी ले जा सकती हैं। माल मिल्स में नहीं लिया जाएगा।
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तानाशाही के चलते चावल का व्यापार करोड़ों के घाटे में चला गया है। सरकारी गोदाम में जगह नहीं होती, लेकिन होल्डिंग चार्ज व्यापारी पर लगाया जाता है। इस तानाशाही के खिलाफ सीजन में व्यापारी खरीद में सहयोग नहीं करेंगे, जब तक उनके साथ एग्रीमेंट करके पक्के तौर पर बातचीत नहीं की जाती।