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Kurukshetra News: सरस्वती तीर्थ पर आकार ले रही आस्था की अमिट छवि, मिलेगी नई पहचान
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पिहोवा। सरस्वती तीर्थ क्षेत्र में बनाई गई मूर्ति को देखते सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन
- फोटो : स्वयं
पिहोवा। सरस्वती तीर्थ क्षेत्र में धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। तीर्थ परिसर में पत्थर से विभिन्न देवी-देवताओं की भव्य व कलात्मक मूर्तियों का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है। ये मूर्तियां न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनेंगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत पहचान भी होंगी।
निर्माणाधीन मूर्तियों में मां सरस्वती के साथ-साथ विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं शामिल हैं। सभी मूर्तियां उच्च गुणवत्ता वाले पत्थर से अनुभवी शिल्पकारों की ओर से पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक तकनीक के संतुलन के साथ गढ़ी जा रही हैं। मूर्तियों की बनावट, भाव-भंगिमा और सूक्ष्म कलाकारी दर्शकों को आकर्षित करने वाली है।
सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमच का कहना है कि इन मूर्तियों का उद्देश्य सरस्वती तीर्थ को एक सशक्त आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। इससे न केवल श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। पिहोवा की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग ही पहचान बनेगी जिससे क्षेत्र की धार्मिक गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी। सरस्वती तीर्थ पर चल रहा यह निर्माण कार्य भारतीय आस्था, कला और संस्कृति का संगम प्रस्तुत करता है और भविष्य में यह स्थल श्रद्धा, शांति और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
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निर्माणाधीन मूर्तियों में मां सरस्वती के साथ-साथ विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं शामिल हैं। सभी मूर्तियां उच्च गुणवत्ता वाले पत्थर से अनुभवी शिल्पकारों की ओर से पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक तकनीक के संतुलन के साथ गढ़ी जा रही हैं। मूर्तियों की बनावट, भाव-भंगिमा और सूक्ष्म कलाकारी दर्शकों को आकर्षित करने वाली है।
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सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमच का कहना है कि इन मूर्तियों का उद्देश्य सरस्वती तीर्थ को एक सशक्त आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। इससे न केवल श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। पिहोवा की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग ही पहचान बनेगी जिससे क्षेत्र की धार्मिक गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी। सरस्वती तीर्थ पर चल रहा यह निर्माण कार्य भारतीय आस्था, कला और संस्कृति का संगम प्रस्तुत करता है और भविष्य में यह स्थल श्रद्धा, शांति और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
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