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Kurukshetra News: इंदिरा कॉलोनी के संदीप हत्याकांड में तीनों आरोपी बरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2026 01:50 AM IST
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All three accused in the Indira Colony Sandeep murder case were acquitted.
कुरुक्षेत्र। दो साल दस महीने तक चले चर्चित इंदिरा कॉलोनी संदीप हत्याकांड केस में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार की अदालत ने फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। 103 पृष्ठों के इस फैसले में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की संलिप्तता साबित करने में पूरी तरह असफल रहा।
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16 सितंबर 2022 की रात इंदिरा कॉलोनी शोरगीर बस्ती परास सिनेमा रोड पर एक होटल में काम करने वाले 22 वर्षीय संदीप कुमार का शव मिला था। प्रारंभ में पूरे मामले को सड़क दुर्घटना बताया गया। संदीप की लिव-इन पार्टनर ने उनके परिवार को फोन कर दुर्घटना की सूचना दी थी लेकिन अगले दिन संदीप के भाई प्रदीप कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि यह दुर्घटना नहीं, बल्कि पूर्व दुश्मनी के चलते हत्या है। आरोप था कि राहुल उर्फ गोलू, रिंकू, घसीटू और फरार महिला ने संदीप को बुलाकर उसके सिर और चेहरे पर कुल्हाड़ी व ईंट से हमला कर हत्या कर दी। मामले में धारा 302, 203 व 34 आईपीसी लगाई गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, हथियारों की बरामदगी और डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के आधार पर केस तैयार किया था।
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अदालत ने फैसले में सख्त टिप्पणियां करते हुए कहा कि गवाह मुकर गए। मृतक के भाई प्रदीप, मां, पिता राम चंदर, दोस्त तिलक राज और सबसे महत्वपूर्ण संदीप की लिव-इन पार्टनर सभी गवाह अदालत में मुकर गए। लिव-इन-पार्टनर ने स्पष्ट कहा कि संदीप की मौत दुर्घटना में हुई थी और वह आरोपियों को अदालत में पहली बार देख रही है। सीसीटीवी फुटेज देने वाले दुकानदार विपन गोयल ने बयान बदला। उन्होंने कहा कि पेन ड्राइव और 65-बी प्रमाणपत्र पुलिस ने खुद तैयार किया था। पेन ड्राइव में 20 सितंबर 2022 को संशोधन पाया गया, जबकि इसे 18 सितंबर को जब्त किया गया था। चेहरा साफ नहीं दिख रहा था।
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कुल्हाड़ी और ईंट की बरामदगी बिना किसी स्वतंत्र गवाह के हुई। फॉरेंसिक रिपोर्ट में खून का मृतक से मिलान नहीं हो सका। डॉक्टर ने भी कहा कि चोट ऊंचाई से गिरने से भी हो सकती है। गांजा संबंधी दुश्मनी का आरोप भी किसी विश्वसनीय गवाह ने समर्थन नहीं किया। अदालत ने लिखा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की शृंखला पूरी तरह साबित नहीं हुई। संदेह, चाहे कितना भी गहरा हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता। तीनों आरोपी, जो पहले से जमानत पर थे, अब अदालत से बरी होकर घर चले गए।
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