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Kurukshetra News: मानव तस्करी और धोखाधड़ी के दोषी एजेंट को सात साल की सजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। धनौरा जट्टान के नितिन की हंगरी में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए जगाधरी निवासी सुखविंदर सिंह को मानव तस्करी और धोखाधड़ी का दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास और 52 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। यह फैसला नितिन के परिवार के लिए भी बड़ी राहत है, जो अपने बेटे को ऑस्ट्रिया भेजने के सपने के साथ ठगा गया था।
30 सितंबर 2022 को नितिन के पिता सुखबीर सिंह ने थाना लाडवा में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह अपने बेटे को विदेश भेजना चाहते थे। रिश्तेदार अमित की मध्यस्थता से सुखविंदर सिंह, उनके बेटे कुलबीर सिंह और सतवंत संधू ने 12 लाख रुपये में नितिन को ऑस्ट्रिया भेजने का वादा किया। सुखबीर ने साढ़े आठ लाख रुपये का भुगतान किया, लेकिन नितिन को ऑस्ट्रिया की बजाय सर्बिया और फिर हंगरी भेज दिया गया। 24 अगस्त 2022 को कुलबीर ने सुखबीर से पांच लाख रुपये और मांगते हुए धमकी दी कि पैसे न देने पर नितिन को नुकसान होगा। इसके बाद एजेंटों ने संपर्क तोड़ लिया और नितिन से कोई बात नहीं हुई।
सुखबीर के भतीजे अमन, जो पुर्तगाल में रहता है, ने हंगरी में छानबीन की और भारतीय दूतावास में नितिन की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। हंगरी पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन नितिन का कोई पता नहीं चला। परिजनों ने आरोप लगाया कि कुलबीर और उनके साथियों ने नितिन की हत्या कर दी। थाना लाडवा पुलिस ने सुखविंदर, कुलबीर, और सतवंत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (विश्वासघात), 384 (उगाही), 370 (मानव तस्करी), 120-बी (आपराधिक साजिश), और इमिग्रेशन एक्ट, 1983 की धारा 10/24 के तहत मामला दर्ज किया। सुखविंदर को गिरफ्तार कर चालान अदालत में पेश किया गया।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने गवाहों और सबूतों के आधार पर सुखविंदर को दोषी ठहराया। उन्हें धारा 420 के तहत पांच साल कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना, धारा 120-बी, 384, और 406 के तहत तीन-तीन साल कठोर कारावास व 10-10 हजार रुपये जुर्माना, तथा धारा 370 के तहत सात साल कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया। जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भी निर्धारित की गई।
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कुरुक्षेत्र। धनौरा जट्टान के नितिन की हंगरी में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए जगाधरी निवासी सुखविंदर सिंह को मानव तस्करी और धोखाधड़ी का दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास और 52 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। यह फैसला नितिन के परिवार के लिए भी बड़ी राहत है, जो अपने बेटे को ऑस्ट्रिया भेजने के सपने के साथ ठगा गया था।
30 सितंबर 2022 को नितिन के पिता सुखबीर सिंह ने थाना लाडवा में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह अपने बेटे को विदेश भेजना चाहते थे। रिश्तेदार अमित की मध्यस्थता से सुखविंदर सिंह, उनके बेटे कुलबीर सिंह और सतवंत संधू ने 12 लाख रुपये में नितिन को ऑस्ट्रिया भेजने का वादा किया। सुखबीर ने साढ़े आठ लाख रुपये का भुगतान किया, लेकिन नितिन को ऑस्ट्रिया की बजाय सर्बिया और फिर हंगरी भेज दिया गया। 24 अगस्त 2022 को कुलबीर ने सुखबीर से पांच लाख रुपये और मांगते हुए धमकी दी कि पैसे न देने पर नितिन को नुकसान होगा। इसके बाद एजेंटों ने संपर्क तोड़ लिया और नितिन से कोई बात नहीं हुई।
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सुखबीर के भतीजे अमन, जो पुर्तगाल में रहता है, ने हंगरी में छानबीन की और भारतीय दूतावास में नितिन की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। हंगरी पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन नितिन का कोई पता नहीं चला। परिजनों ने आरोप लगाया कि कुलबीर और उनके साथियों ने नितिन की हत्या कर दी। थाना लाडवा पुलिस ने सुखविंदर, कुलबीर, और सतवंत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (विश्वासघात), 384 (उगाही), 370 (मानव तस्करी), 120-बी (आपराधिक साजिश), और इमिग्रेशन एक्ट, 1983 की धारा 10/24 के तहत मामला दर्ज किया। सुखविंदर को गिरफ्तार कर चालान अदालत में पेश किया गया।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने गवाहों और सबूतों के आधार पर सुखविंदर को दोषी ठहराया। उन्हें धारा 420 के तहत पांच साल कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना, धारा 120-बी, 384, और 406 के तहत तीन-तीन साल कठोर कारावास व 10-10 हजार रुपये जुर्माना, तथा धारा 370 के तहत सात साल कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया। जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भी निर्धारित की गई।