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Kurukshetra News: तीन माह बाद सिख संस्थानों को मिली नई कमेटी, तीन नए सदस्यों को मिला मौका

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Aug 2024 06:40 AM IST
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After three months, Sikh institutions got a new committee, three new members got a chance
कुरुक्षेत्र। प्रदेश के गुरुघरों व अन्य सिख संस्थानों के संचालन के लिए तीन माह बाद आखिरकार कमेटी मिल ही गई। हालांकि इस कमेटी में पुराने चेहरे ही अधिक हैं जबकि तीन नए सदस्यों को जरूर मौका मिलेगा। अब कमेटी की 30 अगस्त को पहली बैठक होगी, जिसमें विभिन्न एजेंडों पर चर्चा होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में अब इस बैठक पर सभी की निगाहें टिक गईं है। यह कमेटी कितना काम और कब तक कर पाएगी, यह तो समय आने पर पता चलेगा लेकिन पहली कमेटी का हिस्सा रहे दीदार सिंह नलवी व जगदीश सिंह झींडा ने इसे सरकारी कमेटी करार देते हुए कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं।
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31 मई को पिछली कार्यकारिणी का कार्यकाल खत्म हो गया था और अब तक नई कार्यकारिणी बनने का इंतजार था। सरकार द्वारा नए नामित सदस्यों में इस बार दीदार सिंह नलवी, जगदीश सिंह झींडा, रमणीक सिंह मान को शामिल नहीं किया। वर्ष 2022 में गठित की गई कमेटी के 22 सदस्यों को बाहर कर दिया तो 25 नए सदस्य शामिल किए गए हैं। गुरु प्रसाद सिंह, बीबी परमिंदर कौर व परमजीत सिंह को पहली बार नई कार्यकारिणी में मौका मिला है जबकि अन्य सदस्य पिछली र्काकारिणी में भी शामिल रहे हैं।
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पहले गुरुद्वारा छठी पातशाही में चर्चा फिर पहुंचे सचिवालय
प्रदेश सरकार द्वारा नामित किए गए सदस्य पहले सुबह ही गुरुद्वारा छठी पातशाही पहुंचे, जहां करीब डेढ़ घंटा तक चर्चा के बाद जिला सचिवालय पहुंचे। जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में नई कार्यकारिणी का चयन करीब आधे घंटे में कर लिया गया, लेकिन बैठक करीब ढाई घंटे चली। इस दौरान एक-एक सदस्य का परिचय भी हुआ। जहां एक सदस्य ने प्रधान पद के लिए भूपिंदर सिंह असंध के नाम का प्रस्ताव रखा तो वहीं उसके बाद अन्य पदाधिकारियों के नाम पर भी सभी ने सहमति जताई। भूपिंदर सिंह असंध ने कार्यकारिणी सदस्यों के नाम बताए तो इन पर भी सहमति हुई। बाबा बलजीत सिंह दादूवाल ने चयन के बाद सभी पदाधिकारियों के नाम की बैठक में घोषणा की। उधर बताया जा रहा है कि कार्यकारिणी की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी।
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बाबा मेहर सिंह बैठक में नहीं पहुंचे
प्रदेश सरकार ने गत 14 अगस्त को 41 सदस्य नामित किए गए थे। कार्यकारिणी पर मुहर लगाने के लिए बैठक में 40 सदस्य पहुंचे जबकि करनाल से बाबा मेहर सिंह इस बैठक में नहीं पहुंचे। उनसे संपर्क नहीं हो सका लेकिन उनके न आने पर प्रधान भूपिंदर सिंह असंध भी कुछ बोलने को तैयार नहीं थे। हालांकि उनको लेकर कई प्रकार की चर्चाएं चलती रही।



संगत को सरकारी नहीं चुनी हुई कमेटी चाहिए : झींडा
पहले कमेटी में शामिल रहे वरिष्ठ सिख नेता जगदीश सिंह झींडा ने नई कार्यकारिणी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संगत को बार-बार सरकारी एडहॉक कमेटी नहीं बल्कि चयन की हुई स्थायी कमेटी चाहिए। इस कमेटी का पता नहीं कब तक चलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एसजीपीसी में तो बादल का दखल रहा है, जो सिख है लेकिन यहां स्थिति बेहद अलग है।



डेढ़ साल में 10 गुरुघरों व मीरी पीरी मेडिकल कॉलेज का संचालन नहीं ले पाई कमेटी : नलवी
पिछली कमेटी में सदस्य रह चुके वरिष्ठ सिख नेता दीदार सिंह नलवी का कहना है कि पिछली कमेटी ने भी कुछ नहीं किया और अब भी कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि शाहाबाद स्थित मीरी पीरी मेडिकल कॉलेज व प्रदेश के 10 गुरुघरों का संचालन तक अपने अधीन पिछली कमेटी नहीं ले पाई, जिसका इनके पास कोई जवाब भी नहीं है। अब फिर वही लोग कार्यकारिणी में हैं, जो पहले सिख संस्थानों के लिए कुछ नहीं कर पाए।



आज करोड़ों की रकम बैंक खातों में जमा : भूपिंदर असंध
प्रधान बने भूपिंदर असंध का कहना है कि वे हर सदस्य को साथ लेकर कार्य करेंगे। पहले भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और सभी के सहयोग से ही किए गए कार्यों का परिणाम है कि आज सिख संस्थानों के करोड़ों की रकम बैंक खातों में हैं जबकि पहले यह शून्य ही रही। अब विकास कार्यों में कोई कमी नहीं रहने देंगे।




आचार संहिता को लेकर रही चर्चा
विधानसभा चुनाव के चलते लगी आचार संहिता के बीच हुई बैठक व बनाई गई कार्यकारिणी को लेकर चर्चाएं जारी रही। हालांकि इस पर जिला उपायुक्त से संपर्क नहीं हो पाया जबकि प्रधान बने भूपिंदर असंध ने भी कुछ नहीं कहा। वहीं दीदार सिंह नलवी का कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह चुनाव आयोग से इजाजत लेकर यह कार्रवाई की गई है या इस पर आचार संहिता से संबंधित कोई मामला नहीं।
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