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Kurukshetra News: ब्रह्मसरोवर तट पर उमड़ा आस्था का सैलाब, ढलते सूर्य को दिया अर्घ्य
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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी में वीरवार को छठ महापर्व की धूम रही, जिसमें विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर पहली बार सरकारी तौर पर राज्य स्तरीय महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसको लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना रहा। मुख्यमंत्री नायब सैनी छठ उत्सव में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे, उन्होंने भी श्रद्धालुओं के बीच छठी मैया की पूजा की। महोत्सव को लेकर शहर के बस अड्डे ही नहीं रेलवे स्टेशन पर भी दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। हर कोई अपनी-अपनी पूजा सामग्री के साथ यहां पहुंचा। श्रद्धालु उत्साह से लबरेज दिखाई दिए।
यह पहला मौका था जब धर्मनगरी में छठ पर्व मनाने के लिए पूर्वांचल समाज की तीनों समितियां एकजुट हुईं तो व्यापक स्तर पर आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं में श्रद्धा इस कदर बनी रही कोई पूजा सामग्री के साथ तो कोई दंडवत होते हुए ब्रह्मसरोवर तट पर पहुंचा। यहां पूरे विधि विधान से पूजा की गई तो ढलते सूर्य को ब्रह्मसरोवर के जल में खड़े होकर अर्घ्य दिया। राज्य स्तरीय महोत्सव को लेकर प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा, स्वास्थ्य सहित व्यापक प्रबंध किए गए थे।
छठ उत्सव में प्रसिद्ध कलाकार मालनी अवस्थी की प्रस्तुति को देख हर कोई झूमने लगा। वहीं काव्य कृष्णा मूर्ति, सन्नी कुमार सनिया, सिंटू पांडे, खुशबू राज और शुभम भास्कर के छठी मैया के गीतों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। ब्रह्मसरोवर पर रातभर छठी मैया के गीत गूंजते रहे। छठ उत्सव में बड़ी संख्या में देश-प्रदेश से श्रद्धालु उमड़े। कई व्रतधारी श्रद्धालुओं ने ब्रह्मसरोवर तट पर पूजा स्थल पर ही रात गुजारी और ऊषा अर्घ्य का इंतजार किया।
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समाज के लोगों के लिए धर्मशाला जरूरी : सुधा
पूर्व मंत्री सुभाष सुधा ने महोत्सव के दौरान मंच से संबोधित करते हुए छठ महापर्व की बधाई दी तो वहीं कहा कि इस समाज के लोगों के लिए धर्मनगरी में धर्मशाला की जरूरत है, जिसे प्रदेश सरकार को जरूर पूरा किया जाना चाहिए। इससे पहले समाज के लोगों ने भी मुख्यमंत्री के समक्ष धर्मशाला बनाए जाने की मांग रखी तो वहीं प्रदेश सरकार द्वारा यह आयोजन किए जाने पर आभार भी जताया।
आज उषा अर्घ्य से संपन्न होगा पर्व
आठ नवंबर को कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदीयमान सूर्य को व्रती अर्घ्य देंगे, जिसके बाद छठ महापर्व संपन्न होगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा के मुताबिक उषा अर्घ्य का समय सुबह छह बजकर 47 मिनट का है। छठ पूजा में सच्ची भावना और विश्वास बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ये व्रत कठिन होता है, लेकिन श्रद्धालुओं को भगवान संतोष प्रदान करता है।
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यह पहला मौका था जब धर्मनगरी में छठ पर्व मनाने के लिए पूर्वांचल समाज की तीनों समितियां एकजुट हुईं तो व्यापक स्तर पर आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं में श्रद्धा इस कदर बनी रही कोई पूजा सामग्री के साथ तो कोई दंडवत होते हुए ब्रह्मसरोवर तट पर पहुंचा। यहां पूरे विधि विधान से पूजा की गई तो ढलते सूर्य को ब्रह्मसरोवर के जल में खड़े होकर अर्घ्य दिया। राज्य स्तरीय महोत्सव को लेकर प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा, स्वास्थ्य सहित व्यापक प्रबंध किए गए थे।
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छठ उत्सव में प्रसिद्ध कलाकार मालनी अवस्थी की प्रस्तुति को देख हर कोई झूमने लगा। वहीं काव्य कृष्णा मूर्ति, सन्नी कुमार सनिया, सिंटू पांडे, खुशबू राज और शुभम भास्कर के छठी मैया के गीतों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। ब्रह्मसरोवर पर रातभर छठी मैया के गीत गूंजते रहे। छठ उत्सव में बड़ी संख्या में देश-प्रदेश से श्रद्धालु उमड़े। कई व्रतधारी श्रद्धालुओं ने ब्रह्मसरोवर तट पर पूजा स्थल पर ही रात गुजारी और ऊषा अर्घ्य का इंतजार किया।
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समाज के लोगों के लिए धर्मशाला जरूरी : सुधा
पूर्व मंत्री सुभाष सुधा ने महोत्सव के दौरान मंच से संबोधित करते हुए छठ महापर्व की बधाई दी तो वहीं कहा कि इस समाज के लोगों के लिए धर्मनगरी में धर्मशाला की जरूरत है, जिसे प्रदेश सरकार को जरूर पूरा किया जाना चाहिए। इससे पहले समाज के लोगों ने भी मुख्यमंत्री के समक्ष धर्मशाला बनाए जाने की मांग रखी तो वहीं प्रदेश सरकार द्वारा यह आयोजन किए जाने पर आभार भी जताया।
आज उषा अर्घ्य से संपन्न होगा पर्व
आठ नवंबर को कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदीयमान सूर्य को व्रती अर्घ्य देंगे, जिसके बाद छठ महापर्व संपन्न होगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा के मुताबिक उषा अर्घ्य का समय सुबह छह बजकर 47 मिनट का है। छठ पूजा में सच्ची भावना और विश्वास बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ये व्रत कठिन होता है, लेकिन श्रद्धालुओं को भगवान संतोष प्रदान करता है।