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नियम 134 ए : सरकार ने भुगतान अटकाया, तो अधिकतर स्कूलों ने रिक्त सीटों का ब्योरा लटकाया
Updated Wed, 21 Feb 2018 12:41 AM IST
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नियम 134 ए : सरकार ने भुगतान अटकाया, तो अधिकतर स्कूलों ने रिक्त सीटों का ब्योरा लटकाया
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। आर्थिक रूप से कमजोर और बीपीएल वर्ग के बच्चों का नियम-134 ए के तहत निजी स्कूलों में पढ़ाई करने का सपना इस बार भी पूरा होता नहीं दिख रहा। पिछले शिक्षा सत्र की तरह उन्हें इस बार भी मुश्किलों से गुजरना पड़ सकता है। शिक्षा विभाग ने समय रहते उन्हें दाखिला देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है तो इस बार भी निजी स्कूल संचालकों ने कड़ा रुख अपना लिया है। इससे विभाग के इस प्रयास को शुरू में ही झटका लगने की संभावना है। यदि ऐसा हुआ तो विभाग और स्कूल संचालकों में फिर से खींचतान हो सकती है।
इसका सबसे बड़ा कारण विभाग और सरकार का अभी तक पिछले दो वर्षों का इन बच्चों का रिइंबेसमेंट नहीं देना है। प्रक्रिया के आरंभ में ही निजी स्कूलों ने विभाग को अपने रुख से अवगत करा दिया है। विभाग के निर्देशों के बावजूद 50 फीसदी से अधिक स्कूलों ने आज तक इन दाखिलों को लेकर उनके यहां रिक्त सीटों का ब्योरा नहीं दिया है। जबकि, विभाग ने 18 फरवरी तक पूरा ब्योरा देने के निर्देश दिए थे।
बता दें कि विभाग ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक की दाखिला प्रक्रिया शुरू करने के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है। साथ ही स्कूलों को विभाग की ओर से पत्र जारी कर पिछले सत्र में दाखिल हुए बच्चों, रिक्त रही सीटों और इस बार बच्चों को दाखिला देने के लिए रिक्त सीटों का विवरण देने के लिए कहा था। विभाग के 12 फरवरी को जारी निर्देशों के अनुसार, सभी स्कूलों ने 18 फरवरी तक यह विवरण विभाग को पत्र से तो ऑनलाइन भी विवरण देना था, इसके बावजूद अधिकतर स्कूलों ने यह जानकारी नहीं है। बता दें कि पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट निजी स्कूलों में इन दोनों वर्गों के बच्चों को दाखिला देने के आदेश पिछले सत्र से पहले ही दे चुका है। सरकार ने हर कक्षा में 10 फीसदी सीटें इन बच्चों के लिए निर्धारित की है।
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थानेसर के आठ स्कूलों ने ही दिया ब्योरा
थानेसर ब्लॉक के महज आठ स्कूलों ने ही विभाग के पास रिक्त सीटों का ब्योरा दिया है। ब्लॉक में करीब 65 निजी स्कूल हैं। इसके बाद विभाग ने 21 तक सभी स्कूलों से ब्योरा दिए जाने को लेकर रिमांडर भेजा है।
ब्योरा नहीं दिया तो होगी कार्रवाई
अधिकतर निजी स्कूलों ने रिक्त सीटों को लेकर ब्योरा न देने और शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रक्रिया शुरू करने के आदेश देने से विभाग के अधिकारियों में भी खलबली है। मंगलवार को ही शिक्षा अधिकारी ने इन स्कूलों को रिमांडर भेजा दिया। इसमें विभाग ने माना कि अधिकतर स्कूलों ने ब्योरा नहीं दिया। साथ ही कहा है कि जल्द ही यह ब्योरा नहीं दिया गया तो स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इससे स्कूल संचालक भी लामबंद होने शुरू हो गए हैं।
ये रहेगी प्रक्रिया
एक मार्च को सभी स्कूलों की रिक्त सीटें विभाग द्वारा मीडिया में जारी करनी होंगी।
आठ मार्च को ब्लॉक स्तर पर कमेटियां बनाई जाएंगी।
20 मार्च को हर स्कूल के नोटिस बोर्ड और विभाग की वेबसाइट पर रिक्त सीटों का विवरण उपलब्ध होगा।
20 मार्च से 10 अप्रैल तक ऑनलाइन और ऑफ लाइन देने होंगे आवेदन।
12 अप्रैल को बीईओ कार्यालय पर योग्य बच्चों की सूची जारी होगी।
15 अप्रैल को परीक्षा होगी। इसका परिणाम 20 को जारी होगा।
22 अप्रैल को दाखिले के लिए पहला ड्रा होगा।
23 से 26 अप्रैल तक ड्रॉ के आधार पर दाखिले होंगे।
दो मई को दूसरा ड्रॉ होगा।
तीन से पांच मई को दूसरे ड्रॉ के आधार पर होंगे दाखिले।
पिछले वर्ष भी मुश्किल से हुए थे दाखिले, तीन हजार से अधिक सीटें रहीं थीं खाली
पिछले वर्ष भी नियम 134 ए के तहत निजी स्कूलों में बच्चों के दाखिले मुश्किल से हुए थे। अनेक स्कूलों के मामले में तो खुद डीसी को भी संज्ञान लेना पड़ा था। साथ ही अभिभावकों को भी सड़कों पर उतरना पड़ा था। इसके बावजूद जिले में उपलब्ध 5513 सीटों में से तीन हजार से अधिक सीटें रिक्त रह गई थीं।
दो वर्षों का लाखों रुपये भुुगतान अटका, कैसे दें दाखिला : कर्म सिंह
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रधान कर्म सिंह का कहना है कि सरकार ने नियम 134 ए के तहत बीपीएल और गरीब बच्चों को दाखिला देने पर उनकी प्रतिपूर्ति के लिए निर्धारित भुगतान देने का वादा किया था। वर्ष 2016 से आज तक दो वर्षों के जिले के निजी स्कूलों के करीब 35 लाख रुपये सरकार के पास अटके हुए हैं। ऐसे में स्कूल बर्बाद हो जाएंगे। स्कूल संचालक इन हालात में इन बच्चों को कैसे दाखिला दे पाएंगे। इसी रोष के चलते अधिकतर स्कूलों ने ब्योरा देने से इंकार कर दिया है। यह भुगतान न होने तक वे दाखिला नहीं देंगे। बीईओ विनोद कौशिक का कहना है कि सरकार की ओर से राशि आते ही सभी संबंधित स्कूलों को जारी कर दी जाएगी।
नियम अनुसार देने होंगे दाखिले : डीईओ
डीईओ नमिता कौशिक का कहना है कि इस नियम के अनुसार सभी स्कूलों को योग्य बच्चों को दाखिले अवश्य ही देने होंगे। निदेशालय ने शेड्यूल जारी कर दिया है। तैयारियां की जा रही हैं। सभी स्कूलों से रिक्त और भरी सीटों का ब्योरा मांगा गया है। जो नहीं देंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। आर्थिक रूप से कमजोर और बीपीएल वर्ग के बच्चों का नियम-134 ए के तहत निजी स्कूलों में पढ़ाई करने का सपना इस बार भी पूरा होता नहीं दिख रहा। पिछले शिक्षा सत्र की तरह उन्हें इस बार भी मुश्किलों से गुजरना पड़ सकता है। शिक्षा विभाग ने समय रहते उन्हें दाखिला देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है तो इस बार भी निजी स्कूल संचालकों ने कड़ा रुख अपना लिया है। इससे विभाग के इस प्रयास को शुरू में ही झटका लगने की संभावना है। यदि ऐसा हुआ तो विभाग और स्कूल संचालकों में फिर से खींचतान हो सकती है।
इसका सबसे बड़ा कारण विभाग और सरकार का अभी तक पिछले दो वर्षों का इन बच्चों का रिइंबेसमेंट नहीं देना है। प्रक्रिया के आरंभ में ही निजी स्कूलों ने विभाग को अपने रुख से अवगत करा दिया है। विभाग के निर्देशों के बावजूद 50 फीसदी से अधिक स्कूलों ने आज तक इन दाखिलों को लेकर उनके यहां रिक्त सीटों का ब्योरा नहीं दिया है। जबकि, विभाग ने 18 फरवरी तक पूरा ब्योरा देने के निर्देश दिए थे।
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बता दें कि विभाग ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक की दाखिला प्रक्रिया शुरू करने के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है। साथ ही स्कूलों को विभाग की ओर से पत्र जारी कर पिछले सत्र में दाखिल हुए बच्चों, रिक्त रही सीटों और इस बार बच्चों को दाखिला देने के लिए रिक्त सीटों का विवरण देने के लिए कहा था। विभाग के 12 फरवरी को जारी निर्देशों के अनुसार, सभी स्कूलों ने 18 फरवरी तक यह विवरण विभाग को पत्र से तो ऑनलाइन भी विवरण देना था, इसके बावजूद अधिकतर स्कूलों ने यह जानकारी नहीं है। बता दें कि पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट निजी स्कूलों में इन दोनों वर्गों के बच्चों को दाखिला देने के आदेश पिछले सत्र से पहले ही दे चुका है। सरकार ने हर कक्षा में 10 फीसदी सीटें इन बच्चों के लिए निर्धारित की है।
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थानेसर के आठ स्कूलों ने ही दिया ब्योरा
थानेसर ब्लॉक के महज आठ स्कूलों ने ही विभाग के पास रिक्त सीटों का ब्योरा दिया है। ब्लॉक में करीब 65 निजी स्कूल हैं। इसके बाद विभाग ने 21 तक सभी स्कूलों से ब्योरा दिए जाने को लेकर रिमांडर भेजा है।
ब्योरा नहीं दिया तो होगी कार्रवाई
अधिकतर निजी स्कूलों ने रिक्त सीटों को लेकर ब्योरा न देने और शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रक्रिया शुरू करने के आदेश देने से विभाग के अधिकारियों में भी खलबली है। मंगलवार को ही शिक्षा अधिकारी ने इन स्कूलों को रिमांडर भेजा दिया। इसमें विभाग ने माना कि अधिकतर स्कूलों ने ब्योरा नहीं दिया। साथ ही कहा है कि जल्द ही यह ब्योरा नहीं दिया गया तो स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इससे स्कूल संचालक भी लामबंद होने शुरू हो गए हैं।
ये रहेगी प्रक्रिया
एक मार्च को सभी स्कूलों की रिक्त सीटें विभाग द्वारा मीडिया में जारी करनी होंगी।
आठ मार्च को ब्लॉक स्तर पर कमेटियां बनाई जाएंगी।
20 मार्च को हर स्कूल के नोटिस बोर्ड और विभाग की वेबसाइट पर रिक्त सीटों का विवरण उपलब्ध होगा।
20 मार्च से 10 अप्रैल तक ऑनलाइन और ऑफ लाइन देने होंगे आवेदन।
12 अप्रैल को बीईओ कार्यालय पर योग्य बच्चों की सूची जारी होगी।
15 अप्रैल को परीक्षा होगी। इसका परिणाम 20 को जारी होगा।
22 अप्रैल को दाखिले के लिए पहला ड्रा होगा।
23 से 26 अप्रैल तक ड्रॉ के आधार पर दाखिले होंगे।
दो मई को दूसरा ड्रॉ होगा।
तीन से पांच मई को दूसरे ड्रॉ के आधार पर होंगे दाखिले।
पिछले वर्ष भी मुश्किल से हुए थे दाखिले, तीन हजार से अधिक सीटें रहीं थीं खाली
पिछले वर्ष भी नियम 134 ए के तहत निजी स्कूलों में बच्चों के दाखिले मुश्किल से हुए थे। अनेक स्कूलों के मामले में तो खुद डीसी को भी संज्ञान लेना पड़ा था। साथ ही अभिभावकों को भी सड़कों पर उतरना पड़ा था। इसके बावजूद जिले में उपलब्ध 5513 सीटों में से तीन हजार से अधिक सीटें रिक्त रह गई थीं।
दो वर्षों का लाखों रुपये भुुगतान अटका, कैसे दें दाखिला : कर्म सिंह
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रधान कर्म सिंह का कहना है कि सरकार ने नियम 134 ए के तहत बीपीएल और गरीब बच्चों को दाखिला देने पर उनकी प्रतिपूर्ति के लिए निर्धारित भुगतान देने का वादा किया था। वर्ष 2016 से आज तक दो वर्षों के जिले के निजी स्कूलों के करीब 35 लाख रुपये सरकार के पास अटके हुए हैं। ऐसे में स्कूल बर्बाद हो जाएंगे। स्कूल संचालक इन हालात में इन बच्चों को कैसे दाखिला दे पाएंगे। इसी रोष के चलते अधिकतर स्कूलों ने ब्योरा देने से इंकार कर दिया है। यह भुगतान न होने तक वे दाखिला नहीं देंगे। बीईओ विनोद कौशिक का कहना है कि सरकार की ओर से राशि आते ही सभी संबंधित स्कूलों को जारी कर दी जाएगी।
नियम अनुसार देने होंगे दाखिले : डीईओ
डीईओ नमिता कौशिक का कहना है कि इस नियम के अनुसार सभी स्कूलों को योग्य बच्चों को दाखिले अवश्य ही देने होंगे। निदेशालय ने शेड्यूल जारी कर दिया है। तैयारियां की जा रही हैं। सभी स्कूलों से रिक्त और भरी सीटों का ब्योरा मांगा गया है। जो नहीं देंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।