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सोमवती अमवास्या पर अव्यवस्था के बीच हुआ सन्निहित,ब्रह्मसरोवर और सरस्वती तीर्थ में स्नान
Updated Tue, 19 Dec 2017 12:58 AM IST
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सोमवती अमावस पर सरस्वती तीर्थ, सन्निहित और ब्रह्म सरोवर पर उमड़े श्रद्धालु
कुरुक्षेत्र-पिहोवा
सोमवती अमावस पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु सन्निहित, ब्रह्मसरोवर और पिहोवा सरस्वती तीर्थ पर स्नान के लिये पहुंचे। हालांकि पिहोवा में सोमवती अमावस पर श्रद्धालुओं का स्वागत सरस्वती तीर्थ के सूखे घाटों ने किया। सोमवती अमावस पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे,लेकिन यह हालात देख अधिकांश श्रद्धालुओं की भावना आहत हुई। यह श्रद्धालु तीर्थ में स्नान व पित्तरों के निमित्त तर्पण करने पहुंचे थे। मगर तीर्थ में जल नहीं मिलने से इन्होंने अस्थाई रूप से एक घाट पर तैयार किये गये कुंड में पंच स्नान से संतोष करना पड़ा। गौरतलब है कि 21 जनवरी 2018 से हरियाणा सरकार अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव मनाने जा रही है। इससे पहले प्रशासन पिहोवा तीर्थ में निरंतर स्वच्छ जल लाने के लिये लेवलिंग का काम करा रही है और यह कार्य पिछले सप्ताह ही तीर्थ पर शुरु कराया गया है,जबकि पिहोवा वासियों और तीर्थ पुरोहिता का कहना है कि जिस तेजी से काम अब शुरु हुआ है,अगर यह कार्य तीन चार माह पहले होता तो अब तक यह कार्र पूरा हो सकता था और तीर्थ यात्रियों को भी परेशानी नहीं होती। हिमाचल के हमीरपुर से आए श्रद्धालु राजकुमार ने बताया कि पित्तरों के लिए पिंडदान करवाने आए थे। लेकिन सरोवर में जल ना देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ है। उनकी तमन्ना थी कि वे सरोवर में स्नान कर पित्तरों के लिए पिंडदान करेंगे, लेकिन स्नान करना तो दूर उन्हें तीर्थ में आचमन के लिए भी स्वच्छ जल नहीं मिला और पित्तरों का तर्पण भी सूखे सरोवर में ही करना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को श्रद्धालुओं की भावनाओं को समझते हुए पहले से ही प्रबंध करने चाहिए थे।
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हाथ मुंह धोकर चलाया काम
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प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रेत पीपल के पास एक छोटे तालाब में पानी का प्रबंध किया गया था। लेकिन तालाब का पानी आटे व सामग्री से गंदा हो चुका था। अधिकतर श्रद्धालु तालाब तक पहुंच ही नहीं पाए थे और जो पहुंचे उन्होंने पानी की दशा देखकर हाथ मुंह धोकर ही बेहतर समझा। इसके अलावा बहुत से श्रद्धालुओं ने कैंपर के पानी से हाथ मुंह कर अपना काम चलाया।
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अब 16 अप्रैल 2018 को आएगी सोमवती अमावस
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तीर्थ पुरोहित विनोद पंचौली ने बताया कि अब अगली सोमवती अमावस साल 2018 में 16 अप्रैल को आएगी। सोमवार अमावस वर्ष में एक या दो बार ही आती है। कहा जाता है सोमवती अमावस के लिए पांडव पूरा जीवन तरसते रहे, लेकिन उनके जीवन काल में एक बार भी सोमवती अमावस नहीं पड़ी। सोमवार चंद्र देवता को समर्पित दिन है और चंद्र को मन का कारक माना जाता है। अत: इस दिन अमावस पड़ने का अर्थ है कि यह दिन मन संबंधित दोषों को दूर करने के लिए उत्तम है। हमारे शास्त्रों में चंद्रमा को ही दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों का कारक माना जाता है। इसलिए यह पूरे वर्ष में एक या दो बार ही पडने वाले इस पर्व का बहुत अधिक महत्व है। अगले पूरे वर्ष में केवल एक बार ही 16 अप्रैल को सोमवती अमावस पड़ेगी। जबकि इसी वर्ष गत 21 अगस्त 2017 सोमवती अमावस पर पिहोवा में हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ी थी। शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस पर पीपल की परिक्रमा करने से, पूजा करने से, स्पर्श करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा अक्षय लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। वहीं पित्तरों की निमित्त पूजा अर्चना करने से पित्तरों की अक्षय तृप्ति होती है।
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कार्तिकेय मंदिर में भी लगी रही भीड़
भगवान कार्तिकेय को तेल अर्पण करने के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा। पितरों की शांति के तीर्थ पर किए गए पिड़दान के बाद भगवान कार्तिकेय जी को तेल चढ़ाने की परम्परा है। मान्यतानुसार भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर महाराज युधिष्ठर ने महाभारत युद्ध मेें मारे गए लोगों की आत्मिक शांति के लिए स्वामी कार्तिकेय जी को तेल चढ़ाया था। तब से लेकर आज तक यह परम्परा कायम है। श्रद्धालु गति व पिंडदान के पश्चात कार्तिकेय मंदिर में तेल चढ़ाते है। इस मंदिर में स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है।
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अव्यवस्था से हुआ श्रद्धालुओं का सामना
तीर्थ में जल के अलावा अन्य अव्यवस्थाओं ने भी श्रद्धालुओं की परीक्षा ली। श्रद्धालु मांगने वालों से काफी परेशान दिखे। जो कि श्रद्धालुओं को घेर लेते थे। तीर्थ पुरोहित संदीप कुश ने बताया कि अमावस पर करीब 15 हजार यात्री पहुंचा था। प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। तीर्थ पर भिखारियों की संख्या काफी थी। जो हर यात्री को पैसों के लिए परेशान कर रहे थे। कुछ यात्री इस बात से काफी खफा दिखे। लेकिन कुछ बोल नहीं सके। तीर्थ पर पुलिस प्रशासन की ओर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था। यदि कोई पुलिसकर्मी यहां होता तो व्यवस्था हो सकती थी।
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आस्था को लगी ठेस
तीर्थ पुरोहित आशीष चक्रपाणी ने बताया कि तीर्थ पर बहते जल की परियोजना को लेकर काम चल रहा है। इस कारण सरोवर में जल नहीं था। श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस जरुर पहुंची है। लेकिन इसमें किसी का दोष नहीं है। प्रशासन ने अपनी ओर से वैकल्पिक तौर पर प्रबंध भी जरुर किया था। किंतु प्रबंध के बावजूद श्रद्धालुओं को समस्या का सामना करना पड़ा। उन्हें आशा है कि जल्द ही तीर्थ में निरंतर जल प्रवाह होगा और इस समस्या से निजात मिल सकेंगी।
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सरस्वती महोत्सव से पहले तीर्थ में बहेगा निरंतर जल-सचिव
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21 जनवरी से सरस्वती तीर्थ पर अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का शुभारंभ होगा। प्रशासन इस महोत्सव से पहले तीर्थ में निरंतन जल प्रवाह का दावा कर रहा है। नपा सचिव सुशील कुमार ने बताया कि प्रांची से सरस्वती तक आने वाली सरस्वती नदी में लेवलिंग का कार्य पूर्ण हो चुका है। इधर, सरस्वती तीर्थ पर भी मिट्टी डाली जा रही है और महिला घाट के निर्माण का कार्य जोरों पर है। डीसी सुमेधा कटारिया ने 7 दिसंबर को हवन व पूजन कर इस कार्य का शुभारंभ किया था। सरस्वती महोत्सव से पहले लेवलिंग का कार्य पूर्ण हो जाएगा और तीर्थ में साफ व स्वच्छ जल निरंतर बहेगा।
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कुरुक्षेत्र-पिहोवा
सोमवती अमावस पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु सन्निहित, ब्रह्मसरोवर और पिहोवा सरस्वती तीर्थ पर स्नान के लिये पहुंचे। हालांकि पिहोवा में सोमवती अमावस पर श्रद्धालुओं का स्वागत सरस्वती तीर्थ के सूखे घाटों ने किया। सोमवती अमावस पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे,लेकिन यह हालात देख अधिकांश श्रद्धालुओं की भावना आहत हुई। यह श्रद्धालु तीर्थ में स्नान व पित्तरों के निमित्त तर्पण करने पहुंचे थे। मगर तीर्थ में जल नहीं मिलने से इन्होंने अस्थाई रूप से एक घाट पर तैयार किये गये कुंड में पंच स्नान से संतोष करना पड़ा। गौरतलब है कि 21 जनवरी 2018 से हरियाणा सरकार अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव मनाने जा रही है। इससे पहले प्रशासन पिहोवा तीर्थ में निरंतर स्वच्छ जल लाने के लिये लेवलिंग का काम करा रही है और यह कार्य पिछले सप्ताह ही तीर्थ पर शुरु कराया गया है,जबकि पिहोवा वासियों और तीर्थ पुरोहिता का कहना है कि जिस तेजी से काम अब शुरु हुआ है,अगर यह कार्य तीन चार माह पहले होता तो अब तक यह कार्र पूरा हो सकता था और तीर्थ यात्रियों को भी परेशानी नहीं होती। हिमाचल के हमीरपुर से आए श्रद्धालु राजकुमार ने बताया कि पित्तरों के लिए पिंडदान करवाने आए थे। लेकिन सरोवर में जल ना देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ है। उनकी तमन्ना थी कि वे सरोवर में स्नान कर पित्तरों के लिए पिंडदान करेंगे, लेकिन स्नान करना तो दूर उन्हें तीर्थ में आचमन के लिए भी स्वच्छ जल नहीं मिला और पित्तरों का तर्पण भी सूखे सरोवर में ही करना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को श्रद्धालुओं की भावनाओं को समझते हुए पहले से ही प्रबंध करने चाहिए थे।
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हाथ मुंह धोकर चलाया काम
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प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रेत पीपल के पास एक छोटे तालाब में पानी का प्रबंध किया गया था। लेकिन तालाब का पानी आटे व सामग्री से गंदा हो चुका था। अधिकतर श्रद्धालु तालाब तक पहुंच ही नहीं पाए थे और जो पहुंचे उन्होंने पानी की दशा देखकर हाथ मुंह धोकर ही बेहतर समझा। इसके अलावा बहुत से श्रद्धालुओं ने कैंपर के पानी से हाथ मुंह कर अपना काम चलाया।
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अब 16 अप्रैल 2018 को आएगी सोमवती अमावस
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तीर्थ पुरोहित विनोद पंचौली ने बताया कि अब अगली सोमवती अमावस साल 2018 में 16 अप्रैल को आएगी। सोमवार अमावस वर्ष में एक या दो बार ही आती है। कहा जाता है सोमवती अमावस के लिए पांडव पूरा जीवन तरसते रहे, लेकिन उनके जीवन काल में एक बार भी सोमवती अमावस नहीं पड़ी। सोमवार चंद्र देवता को समर्पित दिन है और चंद्र को मन का कारक माना जाता है। अत: इस दिन अमावस पड़ने का अर्थ है कि यह दिन मन संबंधित दोषों को दूर करने के लिए उत्तम है। हमारे शास्त्रों में चंद्रमा को ही दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों का कारक माना जाता है। इसलिए यह पूरे वर्ष में एक या दो बार ही पडने वाले इस पर्व का बहुत अधिक महत्व है। अगले पूरे वर्ष में केवल एक बार ही 16 अप्रैल को सोमवती अमावस पड़ेगी। जबकि इसी वर्ष गत 21 अगस्त 2017 सोमवती अमावस पर पिहोवा में हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ी थी। शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस पर पीपल की परिक्रमा करने से, पूजा करने से, स्पर्श करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा अक्षय लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। वहीं पित्तरों की निमित्त पूजा अर्चना करने से पित्तरों की अक्षय तृप्ति होती है।
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कार्तिकेय मंदिर में भी लगी रही भीड़
भगवान कार्तिकेय को तेल अर्पण करने के लिए श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा। पितरों की शांति के तीर्थ पर किए गए पिड़दान के बाद भगवान कार्तिकेय जी को तेल चढ़ाने की परम्परा है। मान्यतानुसार भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर महाराज युधिष्ठर ने महाभारत युद्ध मेें मारे गए लोगों की आत्मिक शांति के लिए स्वामी कार्तिकेय जी को तेल चढ़ाया था। तब से लेकर आज तक यह परम्परा कायम है। श्रद्धालु गति व पिंडदान के पश्चात कार्तिकेय मंदिर में तेल चढ़ाते है। इस मंदिर में स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है।
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अव्यवस्था से हुआ श्रद्धालुओं का सामना
तीर्थ में जल के अलावा अन्य अव्यवस्थाओं ने भी श्रद्धालुओं की परीक्षा ली। श्रद्धालु मांगने वालों से काफी परेशान दिखे। जो कि श्रद्धालुओं को घेर लेते थे। तीर्थ पुरोहित संदीप कुश ने बताया कि अमावस पर करीब 15 हजार यात्री पहुंचा था। प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। तीर्थ पर भिखारियों की संख्या काफी थी। जो हर यात्री को पैसों के लिए परेशान कर रहे थे। कुछ यात्री इस बात से काफी खफा दिखे। लेकिन कुछ बोल नहीं सके। तीर्थ पर पुलिस प्रशासन की ओर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था। यदि कोई पुलिसकर्मी यहां होता तो व्यवस्था हो सकती थी।
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आस्था को लगी ठेस
तीर्थ पुरोहित आशीष चक्रपाणी ने बताया कि तीर्थ पर बहते जल की परियोजना को लेकर काम चल रहा है। इस कारण सरोवर में जल नहीं था। श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस जरुर पहुंची है। लेकिन इसमें किसी का दोष नहीं है। प्रशासन ने अपनी ओर से वैकल्पिक तौर पर प्रबंध भी जरुर किया था। किंतु प्रबंध के बावजूद श्रद्धालुओं को समस्या का सामना करना पड़ा। उन्हें आशा है कि जल्द ही तीर्थ में निरंतर जल प्रवाह होगा और इस समस्या से निजात मिल सकेंगी।
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सरस्वती महोत्सव से पहले तीर्थ में बहेगा निरंतर जल-सचिव
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21 जनवरी से सरस्वती तीर्थ पर अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का शुभारंभ होगा। प्रशासन इस महोत्सव से पहले तीर्थ में निरंतन जल प्रवाह का दावा कर रहा है। नपा सचिव सुशील कुमार ने बताया कि प्रांची से सरस्वती तक आने वाली सरस्वती नदी में लेवलिंग का कार्य पूर्ण हो चुका है। इधर, सरस्वती तीर्थ पर भी मिट्टी डाली जा रही है और महिला घाट के निर्माण का कार्य जोरों पर है। डीसी सुमेधा कटारिया ने 7 दिसंबर को हवन व पूजन कर इस कार्य का शुभारंभ किया था। सरस्वती महोत्सव से पहले लेवलिंग का कार्य पूर्ण हो जाएगा और तीर्थ में साफ व स्वच्छ जल निरंतर बहेगा।