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Kurukshetra News: छह महीने चली जांच, अब छेड़छाड़ मामले में दोषी मिला केयू का प्रोफेसर, हुई कार्रवाई
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में परीक्षा के दौरान छात्रा से छेड़छाड़ के आरोपों की जांच करीब छह महीने तक चलती रही। फरवरी में छात्रा की शिकायत के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामला आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) को सौंपा था। समिति की जांच के बाद अब प्रोफेसर को आरोपों का दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर का विभाग बदलने, एक इंक्रीमेंट रोकने और तीन साल तक कोई प्रशासनिक पद नहीं देने का फैसला किया है। खास बात यह है कि प्रोफेसर का विभाग इसी महीने बदला गया था और अब जांच में दोषी पाए जाने के बाद आगे की कार्रवाई की गई है।
मामले में छात्रा ने फरवरी में परीक्षा के दौरान प्रोफेसर ने छेड़छाड़ की थी, जिसके बाद छात्रा अपने हॉस्टल जाकर अपनी सहेलियों समेत परिवार को आपबीती बताई। उसके बाद छात्रा द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत दी जाती है। करीब छह महीने तक चली जांच में समिति ने मामले से जुड़े पक्षों की जानकारी और बयान लिए। जांच पूरी होने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी, जिसमें प्रोफेसर पर लगाए गए आरोपों को सही माना गया।
पिता बोले- छह महीने बाद दोषी पाया, कार्रवाई से संतुष्ट नहीं
छात्रा के पिता का कहना है कि प्रोफेसर को अब जाकर दोषी पाया गया है, लेकिन विभाग बदलने जैसी कार्रवाई से वे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि वे कुलपति से मिलकर मामले में और ठोस कार्रवाई की मांग करेंगे। यदि वहां से भी संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे कानूनी कदम उठाएंगे।
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कुलसचिव बोले- जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई
केयू के कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने बताया कि आंतरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को मिल चुकी है। समिति ने प्रोफेसर पर लगाए गए छेड़छाड़ के आरोपों को सही माना है। रिपोर्ट के आधार पर उनका विभाग बदला गया है। साथ ही एक इंक्रीमेंट रोकने और तीन साल तक कोई प्रशासनिक पद नहीं देने का निर्णय लिया गया है। वहीं दोषी प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जाएगा।
इनसो ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
इनसो के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विशाल मुकीमपुरा ने विश्वविद्यालय में अलग-अलग मामलों में कार्रवाई के मानकों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक मामले में कार्यक्रम के दौरान कुर्सियां टूटने को लेकर हिंदी प्रोफेसर अजायब सिंह को निलंबित किया गया था, जबकि इस मामले में विश्वविद्यालय की अपनी जांच समिति ने प्रोफेसर को दोषी माना है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में कार्रवाई को लेकर विश्वविद्यालय को स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।
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मामले में छात्रा ने फरवरी में परीक्षा के दौरान प्रोफेसर ने छेड़छाड़ की थी, जिसके बाद छात्रा अपने हॉस्टल जाकर अपनी सहेलियों समेत परिवार को आपबीती बताई। उसके बाद छात्रा द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत दी जाती है। करीब छह महीने तक चली जांच में समिति ने मामले से जुड़े पक्षों की जानकारी और बयान लिए। जांच पूरी होने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपी, जिसमें प्रोफेसर पर लगाए गए आरोपों को सही माना गया।
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पिता बोले- छह महीने बाद दोषी पाया, कार्रवाई से संतुष्ट नहीं
छात्रा के पिता का कहना है कि प्रोफेसर को अब जाकर दोषी पाया गया है, लेकिन विभाग बदलने जैसी कार्रवाई से वे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि वे कुलपति से मिलकर मामले में और ठोस कार्रवाई की मांग करेंगे। यदि वहां से भी संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे कानूनी कदम उठाएंगे।
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कुलसचिव बोले- जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई
केयू के कुलसचिव प्रो. वीरेंद्र पाल ने बताया कि आंतरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को मिल चुकी है। समिति ने प्रोफेसर पर लगाए गए छेड़छाड़ के आरोपों को सही माना है। रिपोर्ट के आधार पर उनका विभाग बदला गया है। साथ ही एक इंक्रीमेंट रोकने और तीन साल तक कोई प्रशासनिक पद नहीं देने का निर्णय लिया गया है। वहीं दोषी प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जाएगा।
इनसो ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
इनसो के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विशाल मुकीमपुरा ने विश्वविद्यालय में अलग-अलग मामलों में कार्रवाई के मानकों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक मामले में कार्यक्रम के दौरान कुर्सियां टूटने को लेकर हिंदी प्रोफेसर अजायब सिंह को निलंबित किया गया था, जबकि इस मामले में विश्वविद्यालय की अपनी जांच समिति ने प्रोफेसर को दोषी माना है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले में कार्रवाई को लेकर विश्वविद्यालय को स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।