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नैतिकता के बिना धर्म नहीं हो सकता है : जगन्नाथ पुरी
Updated Thu, 23 Nov 2017 12:03 AM IST
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नैतिकता के बिना धर्म नहीं हो सकता है : जगन्नाथ पुरी
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
मारकंडा नदी के तट पर श्री मार्कण्डेश्वर महादेव मंदिर ठसका मीरां जी में देवताओं में श्रीगणेश का चतुर्थी पर मंत्रोच्चारण के साथ संत महापुरुषों और विद्वान ब्राह्मणों ने अभिषेक किया। पूजन में अखिल भारतीय श्री मार्कण्डेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी, स्वामी प्रमोद पुरी, स्वामी हरिहर पुरी, स्वामी भास्कर गिरि, स्वामी रामनाथ पुरी, स्वामी संतोषानंद, प. भारत भूषण आदि ने भाग लिया। महंत जगन्नाथ पुरी ने कहा कि जहां नैतिकता नहीं, वहां धर्म नहीं हो सकता है।
पूजन के बाद संतों ने कहा कि समाज में भौतिकतावादी मानसिकता के साथ स्वार्थों में वृद्धि हो रही है। महंत जगन्नाथ पुरी ने कहा कि जहां कथनी और करनी में अंतर होता है, वहां ज्ञान नहीं बल्कि अज्ञान होता है। वह धर्म नहीं पाखंड कहलाता है। शुद्ध भौतिकतावादी मानसिकता के साथ स्वार्थ की गति भी बढ़ती जा रही हैं। वैज्ञानिक प्रगति ने मानव जीवन में सर्व सुख के साधन उपलब्ध करवा दिए हैं। प्रत्येक व्यक्ति ने उन्हें अपने प्रारब्ध के अनुसार प्राप्त भी कर लिया है। इच्छाओं और आकांक्षाओं ने इन भौतिक साधनों को प्राप्त करना ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। इस अवसर पर रणधीर चहल, शुभम शर्मा, कविराज शर्मा, राम कुमार, लखविंदर सिंह, मामराज, ज्ञान ठोलिया, सीमा शर्मा, अनीता देवी, सुषमा चुघ आदि मौजूद थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
मारकंडा नदी के तट पर श्री मार्कण्डेश्वर महादेव मंदिर ठसका मीरां जी में देवताओं में श्रीगणेश का चतुर्थी पर मंत्रोच्चारण के साथ संत महापुरुषों और विद्वान ब्राह्मणों ने अभिषेक किया। पूजन में अखिल भारतीय श्री मार्कण्डेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी, स्वामी प्रमोद पुरी, स्वामी हरिहर पुरी, स्वामी भास्कर गिरि, स्वामी रामनाथ पुरी, स्वामी संतोषानंद, प. भारत भूषण आदि ने भाग लिया। महंत जगन्नाथ पुरी ने कहा कि जहां नैतिकता नहीं, वहां धर्म नहीं हो सकता है।
पूजन के बाद संतों ने कहा कि समाज में भौतिकतावादी मानसिकता के साथ स्वार्थों में वृद्धि हो रही है। महंत जगन्नाथ पुरी ने कहा कि जहां कथनी और करनी में अंतर होता है, वहां ज्ञान नहीं बल्कि अज्ञान होता है। वह धर्म नहीं पाखंड कहलाता है। शुद्ध भौतिकतावादी मानसिकता के साथ स्वार्थ की गति भी बढ़ती जा रही हैं। वैज्ञानिक प्रगति ने मानव जीवन में सर्व सुख के साधन उपलब्ध करवा दिए हैं। प्रत्येक व्यक्ति ने उन्हें अपने प्रारब्ध के अनुसार प्राप्त भी कर लिया है। इच्छाओं और आकांक्षाओं ने इन भौतिक साधनों को प्राप्त करना ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। इस अवसर पर रणधीर चहल, शुभम शर्मा, कविराज शर्मा, राम कुमार, लखविंदर सिंह, मामराज, ज्ञान ठोलिया, सीमा शर्मा, अनीता देवी, सुषमा चुघ आदि मौजूद थे।
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